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ICRA: हीरा उद्योग में गिरावट की आशंका; कमजोर मांग, एलजीडी चुनौती और अमेरिकी टैरिफ का पड़ सकता है असर

Thu, 26 Jun 2025 07:22 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 26 Jun 2025 07:22 PM IST
सार

आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में भारतीय हीरा उद्योग में गिरावट की संभावना है। कमजोर वैश्विक मांग, लैब-ग्रोन डायमंड (एलजीडी) से बढ़ती प्रतिसपर्धा और अमेरिका टैरिफ के कारण इसमें दबाव पड़ेगा। कट और पॉलिश हीरे (सीपीडी) के निर्यात में 7 से 10 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है।

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Diamond industry likely to decline; weak demand, LGD challenge and US tariffs may have an impact
Kohinoor Diamond History - फोटो : Istock

विस्तार

कमजोर वैश्विक मांग, लैब-ग्रोन डायमंड (एलजीडी) से बढ़ती प्रतिसपर्धा और अमेरिका टैरिफ के कारण भारतीय हीरा उद्योग को दोहरे दबाव का सामना करना पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ही हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में कट और पॉलिश हीरे (सीपीडी) के निर्यात में 7 से 10 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। वित्त वर्ष 2025 में यह गिरावट 17 प्रतिशत रही थी। तब से ही इस क्षेत्र का दृष्टिकोण नकारात्मक बना हुआ है। 

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सीपीडी निर्यात 20 साल के निचले स्तर पर पहुंचा

आईसीआरए की रिपोर्ट में बताया गया कि सीपीडी निर्यात वित्त वर्ष 2025 में 20 साल के निचले स्तर 13.3 अरब डॉलर पर आ गया। यह वैश्विक व्यापक आर्थिक मंदी और सस्ते एलजीडी के लिए बढ़ती उपभोक्ता पसंद से प्रभावित है। ये अब पॉलिश किए गए हीरे के निर्यात का 8% हिस्सा है, जो वित्त वर्ष 2019 में केवल 1% था। 

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अमेरिकी टैरिफ ने चिंता बढ़ाई 

इसके अलावा हाल ही में अमेरिका द्वारा 27 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने से भारत के नुकसान होने की संभावना है। अमेरिका भारत के सीपीडी निर्यात का एक तिहाई से अधिक हिस्सा रखने वाला एक प्रमुख बाजार है। हालांकि वर्तमान में 10 प्रतिशत अंतरिम टैरिफ लगाकर इसे रोक दिया गया है लेकिन निर्यातक अभी भी चिंतित हैं। कई भारतीय कंपनी अब दुबई और बेल्जियम जैसे कम टैरिफ वाले केंद्रों के जरिए शिपमेंट को फिर से भेज रहे हैं ताकि प्रभाव को कम किया जा सके। 

परिचालन लाभ मार्जिन में आई गिरावट 

रिपोर्ट में बताया गया कि सीपीडी फर्मों के लिए परिचालन लाभ मार्जिन वित्त वर्ष 2025 में 400 आधार अंक घटकर लगभग 4 प्रतिशत रह गया है। वहीं आईसीआरए ने वित्त वर्ष 2026 में 3.6 से 3.7 प्रतिशत की और गिरावट का अनुमान लगाया है। 

कीमतों में आई भारी गिरावट 

इस बीच, वित्त वर्ष 2025 में कच्चे हीरों की कीमत में 8 प्रतिशत और पॉलिश हीरों की कीमत में 7 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। वहीं डी बीयर्स जैसे खनिकों ने उत्पादन में कटौती से कच्चे हीरों की कीमतें सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है। आईसीआरए  का मानना है कि हीरा उद्योग की क्रेडिट प्रोफाइल निकट भविष्य में कमजोर बनी रह सकती है। 


 

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