डेलॉय सीईओ बोले : महामारी से निपट ले तो भारत के नाम होगी सदी, 10 साल में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
डेलॉय सीईओ ने कहा कि भारत को विदेशी निवेश के लिहाज से आकर्षक स्थान होने के माहौल को बनाए रखना चाहिए। सुनिश्चित करना चाहिए कि कोरोना के खिलाफ उसकी लड़ाई में उसे सफलता मिले।
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भारत महामारी से निपट ले तो यह सदी उसके नाम होगी क्योंकि आर्थिक लय उसके पक्ष में है। डेलॉय के वैश्विक सीईओ पुनित रंजन ने कहा, भारत 2022 में यानी इस साल तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होगी। इसकी वृद्धि दर 8-9% रहने की संभावना है। हालांकि, संक्रमण से तत्काल निजात पाने की जरूरत है क्योंकि यह आर्थिक विकास के रास्ते में रोड़ा है।
डेलॉय सीईओ ने कहा कि भारत को विदेशी निवेश के लिहाज से आकर्षक स्थान होने के माहौल को बनाए रखना चाहिए। सुनिश्चित करना चाहिए कि कोरोना के खिलाफ उसकी लड़ाई में उसे सफलता मिले। उन्होंने कहा, भारत अगर कोरोना से निपट ले तो मुझे भरोसा है कि वह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के विकास के मामले में दूसरों का नेतृत्व करेगा। खास बात है कि अगले 10 वर्षों में 6-7 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। आकार के मामले में यह दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा।
एफडीआई के लिए बेहतर माहौल जरूरी
पुनीत ने कहा, इन सबके के लिए पहली चीज जो हमें करने की जरूरत है, वह यह सुनिश्चित करना है कि हम वायरस पर विजय प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि आर्थिक लय पक्ष में होने की वजह से भारत को उसका लाभ उठाना चाहिए। साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विभिन्न उद्योगों के लिए एक आकर्षक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार जिस तरह से ध्यान दे रही है, उसकी गति को बनाए रखने की जरूरत है।
2022-23 में 7.6% रहेगी विकास दर : इंडिया रेटिंग्स
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 2022-23 में 7.6 फीसदी रहेगी। करीब दो साल के अंतराल के बाद जीडीपी में अर्थपूर्ण विस्तार होगा। अगले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी के 2019-20 (महामारी पूर्व स्तर) से 9.1 फीसदी अधिक रहने का अनुमान है।
- हालांकि, इस दौरान अर्थव्यवस्था का आकार जीडीपी के ट्रेंड वैल्यू से 10.2 फीसदी कम रहेगा। इसकी प्रमुख वजह निजी खपत और निवेश में गिरावट है। कुल गिरावट में निजी खपत का हिस्सा 43.4 फीसदी और निवेश मांग का 21 फीसदी रहेगा।
- इंडिया रेटिंग्स के प्रमुख अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सरकार राजकोषीय मजबूती को लेकर हड़बड़ी में नहीं है। इसका मतलब है कि 2022-23 में भी राजकोषीय घाटा ऊंचा यानी 5.8 से 6 फीसदी के बीच रहेगा।