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कोरोना: लॉकडाउन के चलते शहरों से गांव में आने वाले पैसों में 80 फीसदी की गिरावट
Sun, 05 Apr 2020 10:54 PM IST
श्रीधर मिश्रा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Sun, 05 Apr 2020 10:54 PM IST
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labour
- फोटो : labour
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। जरूरी कामों को छोड़ कर सभी तरह के व्यापार ठप्प हो चुके हैं। ऐसे में अब इस लॉकडाउन का असर 'डोमेस्टिक रेमिटेंस' पर भी देखने को मिल रहा है। 'डोमेस्टिक रेमिटेंस' को सीधी और आसान भाषा में समझा जाए, तो यह वो राशि है, जिसे बड़े या मध्यम शहर में काम करने गए लोग, छोटे शहर में रह रहे अपने परिवार को वापस भेजते हैं। उदाहरण के रूप में, जैसे आप देश के किसी भी छोटे गांव या शहर से दिल्ली या मुंबई कमाने गए हैं। यहां महीने की सैलरी आने के बाद आप जो राशि अपने परिवार वालों को भेजते हैं उसी को 'डोमेस्टिक रेमिटेंस' कहते हैं।
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लॉकडाउन के कारण 'डोमेस्टिक रेमिटेंस' में करीब 80 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इसका बड़ा कारण प्रवासी मजदूरों और आम कर्मचारियों का वापस से अपने शहर या गांव में लौटना है। बता दें कि डोमेस्टिक रेमिटेंस का बड़ा हिस्सा इन-फॉर्मल सेक्टर से आता है। ऐसे में लॉकडाउन के चलते इन-फॉर्मल सेक्टर का कारोबार पूरी तरह बंद है, जिसकी वजह से मजदूर अपने घर को वापस चले गए हैं।
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इको इंडिया फाइनेंशियल सर्विस, स्पाइस डिजिटल और फीनो पेमेंट्स बैंक का इस मामले पर कहना है कि भारत में डोमेस्टिक रेमिटेंस का साल भर में 2 लाख करोड़ रुपये का कारोबार है। यह भी बताया गया गया है कि पहले इनकी तरफ से एक महीने में 5 हजार करोड़ का रेमिटेंस भेजा जाता था, लॉकडाउन के कारण अब इसमें 80 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है।
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मालूम हो कि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया है, जिससे लगभग सभी प्रकार के कारोबार ठप्प हो चुके हैं।