Report: प्रदूषण की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे बच्चे, स्वास्थ्य बीमा में 43% दावे 10 साल से कम उम्र वालों के लिए
पॉलिसीबाजार की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य बीमा दावों में से 43 प्रतिशत 0 से 10 आयु वर्ग तक के थे। इसमें कहा गया है कि बच्चे किसी भी अन्य आयु वर्ग की तुलना में पांच गुना अधिक प्रभावित होते हैं। वहीं प्रदूषण से होने वाली बीमारियां अब अस्पताल में भर्ती होने वाले सभी दावो का 8 प्रतिशत हैं।
विस्तार
आज पूरा विश्व प्रदूषण की मार झेल रहा है। प्रदूषण का सबसे ज्यादा खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। पॉलिसीबाजार की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य बीमा दावों में से 43 प्रतिशत 0 से 10 आयु वर्ग तक के थे। इसमें कहा गया है कि बच्चे किसी भी अन्य आयु वर्ग की तुलना में पांच गुना अधिक प्रभावित होते हैं।
ये भी पढ़ें: Report: घरेलू बीमा और NPS ने शेयर बाजार में लगाया रिकॉर्ड 1.08 लाख करोड़, साल-दर-साल निवेश हुआ दोगुना
प्रदूषण संबंधी भर्तियां सभी दावो का 8 प्रतिशत है
प्रदूषण से होने वाली बीमारियां अब अस्पताल में भर्ती होने वाले सभी दावो का 8 प्रतिशत हैं। सांस और हृदय संबंधी मामले भी इस वृद्धि में बड़ा योगदान दे रहे हैं।
ऐसे बीमा दावों की संख्या के मामले में दिल्ली देश में सबसे आगे रहा है। वहीं बंगलूरू और हैदराबाद में दावों का अनुपात ज्यादा रहा। जयपुर, लखनऊ और इंदौर जैसे टियर-2 शहरों में भी मामलों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि वायु प्रदूषण का असर महानगरों से आगे भी फैल रहा है।
वायु प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल में बदल गया है
रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे वायु प्रदूषण एक पर्यावरणीय संकट से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल में बदल गया है। इसमें पाया गया है कि प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों में वृद्धि ने इलाज की लागत में भी 11 प्रतिशत की वृद्धि की है। वायु प्रदूषण से जुड़ा औसत स्वास्थ्य बीमा दावा 55,000 रुपये था। वहीं औसत अस्पताल खर्च 19,000 रुपये प्रतिदिन था। रिपोर्ट में
दिवाली के बाद प्रदूषण के स्तर में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई
रिपोर्ट में प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों, खासकर दिवाली के आसपास, के एक स्पष्ट मौसमी पैटर्न का भी खुलासा हुआ है। दिवाली के बाद के दावों में त्योहार से पहले के स्तर की तुलना में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो इस दौरान भारत में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर में आई तेज वृद्धि को दर्शाता है। अक्तूबर के अंत और दिसंबर की शुरुआत के बीच, देश के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर पराली जलाने, आतिशबाजी और सर्दियों की स्थिर हवा के कारण मध्यम से गंभीर तक पहुंच जाता है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
अकेले सितंबर 2025 में, अस्पताल में भर्ती होने के सभी दावों में से 9 प्रतिशत वायु प्रदूषण से संबंधित बीमारियों से जुड़े थे, जिनमें श्वसन संक्रमण और हृदय संबंधी जटिलताओं से लेकर त्वचा और आंखों की एलर्जी तक शामिल थीं। पिछले चार वर्षों में प्रदूषण से जुड़े दावे लगातार बढ़ रहे हैं, जो 2022 में दिवाली से पहले 6.4 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में दिवाली के बाद 9 प्रतिशत हो गए हैं, जो बढ़ते स्वास्थ्य बोझ का संकेत है। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि कई अंग प्रणालियों को प्रभावित करता है। आम दावा श्रेणियों में अस्थमा, सीओपीडी, अतालता, उच्च रक्तचाप, एक्जिमा, नेत्रश्लेष्मलाशोथ, गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं और साइनस संबंधी एलर्जी शामिल हैं।