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Biz Updates: पीएलआई के तहत छह माह में ₹1596 करोड़ प्रोत्साहन; ई-कॉमर्स कंपनियों को बनना होगा अधिक जवाबदेह
Tue, 21 Jan 2025 05:45 AM IST
शुभम कुमार
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 21 Jan 2025 05:45 AM IST
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बिजनेस अपडेट
- फोटो : अमर उजाला
सरकार ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-सितंबर अवधि में इलेक्ट्रॉनिक और औषधि सहित छह क्षेत्रों में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के तहत 1,596 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 964 करोड़ रुपये इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र को दिया गया है। एक अधिकारी ने बताया, फार्मा क्षेत्र को 604 करोड़, खाद्य उत्पाद को 11 करोड़, दूरसंचार को 9 करोड़, थोक दवाओं को 6 करोड़ और ड्रोन विनिर्माण क्षेत्र को दो करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है। अधिकारी ने बताया, 2023-24 तक पीएलआई योजना के तहत 9,721 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई थी। इस योजना का सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। सरकार ने 2021 में दूरसंचार, एसी व एलईडी लाइट के विनिर्माण जैसे 14 क्षेत्रों के लिए 1.97 लाख करोड़ के खर्च के साथ पीएलआई की घोषणा की थी।
ग्राहक सुरक्षा के लिए ई-कॉमर्स कंपनियों को बनना होगा अधिक जवाबदेह
ग्राहकों की सुरक्षा के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए मसौदा नियम जारी किया है। इसमें ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए स्व-नियामक उपायों को अनिवार्य किया गया है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की देखरेख में भारतीय मानक ब्यूरो ने मसौदा तैयार किया है। इस पर 15 फरवरी तक विभिन्न पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं। मसौदे में कहा गया है, उपभोक्ता संरक्षण और विश्वास के मामले में ई-कॉमर्स में स्व-शासन के लिए स्पष्ट व प्रभावी नियमों और मानदंडों पर जोर देने की जरूरत है। यह ढांचा ई-कॉमर्स संचालन के लिए लेनदेन से पहले, अनुबंध और लेनदेन के बाद के चरणों को शामिल करते हुए तीन स्तरीय सिद्धांत पेश करता है। लेनदेन से पहले के चरण के तहत मंच को व्यावसायिक भागीदारों, विशेष रूप से थर्ड पार्टी का गहन केवाईसी करना चाहिए। अनुबंध के दौरान मंच को ग्राहक की सहमति दर्ज करनी चाहिए। नकली उत्पादों के लिए अतिरिक्त प्रावधानों के साथ ही धन वापसी, सामान वापसी या बदलने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करनी चाहिए।
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ग्राहक सुरक्षा के लिए ई-कॉमर्स कंपनियों को बनना होगा अधिक जवाबदेह
ग्राहकों की सुरक्षा के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए मसौदा नियम जारी किया है। इसमें ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए स्व-नियामक उपायों को अनिवार्य किया गया है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की देखरेख में भारतीय मानक ब्यूरो ने मसौदा तैयार किया है। इस पर 15 फरवरी तक विभिन्न पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं। मसौदे में कहा गया है, उपभोक्ता संरक्षण और विश्वास के मामले में ई-कॉमर्स में स्व-शासन के लिए स्पष्ट व प्रभावी नियमों और मानदंडों पर जोर देने की जरूरत है। यह ढांचा ई-कॉमर्स संचालन के लिए लेनदेन से पहले, अनुबंध और लेनदेन के बाद के चरणों को शामिल करते हुए तीन स्तरीय सिद्धांत पेश करता है। लेनदेन से पहले के चरण के तहत मंच को व्यावसायिक भागीदारों, विशेष रूप से थर्ड पार्टी का गहन केवाईसी करना चाहिए। अनुबंध के दौरान मंच को ग्राहक की सहमति दर्ज करनी चाहिए। नकली उत्पादों के लिए अतिरिक्त प्रावधानों के साथ ही धन वापसी, सामान वापसी या बदलने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करनी चाहिए।
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बकाया वसूली के सभी उपायों के बाद ही कर्जदारों से हो समझौता
आरबीआई ने संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों (एआरसी) को बकाया वसूली के सभी संभावित तरीके आजमाने के बाद ही कर्जदारों से समझौता करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा, प्रत्येक एआरसी को उधारकर्ताओं के बकाये के निपटान के लिए निदेशक मंडल से अनुमोदन प्राप्त नीति बनानी चाहिए।
केंद्रीय बैंक ने जारी संशोधित निर्देश में कहा, अन्य बातों के अलावा एकमुश्त निपटान पात्रता के लिए कट-ऑफ तिथि, निपटान राशि पर पहुंचने के दौरान जोखिम की विभिन्न श्रेणियों के लिए स्वीकृत नुकसान और गारंटी वाले उत्पाद के वास्तविक मूल्य पर पहुंचने के तरीकों जैसे पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, निपटान राशि का भुगतान एकमुश्त किया जाना चाहिए। समझौते में अगर एक किस्त में सहमत पूरी राशि के भुगतान की बात नहीं की गई है, वहां प्रस्ताव स्वीकार्य व्यवसाय योजना (जहां लागू हो), उधारकर्ता की अनुमानित आय और नकदी प्रवाह के अनुरूप होना चाहिए।
आरबीआई ने संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों (एआरसी) को बकाया वसूली के सभी संभावित तरीके आजमाने के बाद ही कर्जदारों से समझौता करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा, प्रत्येक एआरसी को उधारकर्ताओं के बकाये के निपटान के लिए निदेशक मंडल से अनुमोदन प्राप्त नीति बनानी चाहिए।
केंद्रीय बैंक ने जारी संशोधित निर्देश में कहा, अन्य बातों के अलावा एकमुश्त निपटान पात्रता के लिए कट-ऑफ तिथि, निपटान राशि पर पहुंचने के दौरान जोखिम की विभिन्न श्रेणियों के लिए स्वीकृत नुकसान और गारंटी वाले उत्पाद के वास्तविक मूल्य पर पहुंचने के तरीकों जैसे पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, निपटान राशि का भुगतान एकमुश्त किया जाना चाहिए। समझौते में अगर एक किस्त में सहमत पूरी राशि के भुगतान की बात नहीं की गई है, वहां प्रस्ताव स्वीकार्य व्यवसाय योजना (जहां लागू हो), उधारकर्ता की अनुमानित आय और नकदी प्रवाह के अनुरूप होना चाहिए।
एनपीए घटने से IDBI, सेंट्रल व इंडियन ओवरसीज बैंक का बढ़ा मुनाफा
बुरे फंसे कर्ज (एनपीए) में कमी से आईडीबीआई, सेंट्रल और इंडियन ओवरसीज बैंक का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 33 फीसदी तक बढ़ गया है। आईडीबीआई बैंक ने सोमवार को बताया, कम प्रोविजनिंग और बेहतर ब्याज आय की वजह से तीसरी तिमाही में शुद्ध मुनाफा 31 फीसदी बढ़कर 1,908 करोड़ पहुंच गया। ब्याज आय 6,541 करोड़ से बढ़कर 7,816 करोड़ रुपये पहुंच गई। सकल एनपीए 4.69 फीसदी से घटकर 3.57 फीसदी रह गया।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का लाभ 33 फीसदी बढ़कर 959 करोड़ रुपये पहुंच गया। कुल आय भी 9,139 करोड़ से बढ़कर 9,739 करोड़ पहुंच गई। सकल एनपीए 4.50 फीसदी से कम होकर 3.86 फीसदी रह गया। इंडियन ओवरसीज बैंक का शुद्ध लाभ 21 फीसदी बढ़कर 874 करोड़ रुपये पहुंच गया। बैंक का सकल बुरा फंसा कर्ज 3.90 फीसदी से घटकर 2.55 फीसदी रह गया।
पेटीएम का घाटा कम होकर 208.5 करोड़
पेटीएम ब्रांड की मालिकाना हक वाली कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस का चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में एकीकृत घाटा कम होकर 208.5 करोड़ रुपये हो गया। भुगतान प्रसंस्करण शुल्क व कर्मचारी लागत पर खर्च में कमी से यह नुकसान हुआ है। जोमैटो का एकीकृत शुद्ध लाभ 57.2 फीसदी घटकर 59 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, एकीकृत परिचालन आय बढ़कर 5,405 करोड़ पहुंच गई।
बुरे फंसे कर्ज (एनपीए) में कमी से आईडीबीआई, सेंट्रल और इंडियन ओवरसीज बैंक का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 33 फीसदी तक बढ़ गया है। आईडीबीआई बैंक ने सोमवार को बताया, कम प्रोविजनिंग और बेहतर ब्याज आय की वजह से तीसरी तिमाही में शुद्ध मुनाफा 31 फीसदी बढ़कर 1,908 करोड़ पहुंच गया। ब्याज आय 6,541 करोड़ से बढ़कर 7,816 करोड़ रुपये पहुंच गई। सकल एनपीए 4.69 फीसदी से घटकर 3.57 फीसदी रह गया।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का लाभ 33 फीसदी बढ़कर 959 करोड़ रुपये पहुंच गया। कुल आय भी 9,139 करोड़ से बढ़कर 9,739 करोड़ पहुंच गई। सकल एनपीए 4.50 फीसदी से कम होकर 3.86 फीसदी रह गया। इंडियन ओवरसीज बैंक का शुद्ध लाभ 21 फीसदी बढ़कर 874 करोड़ रुपये पहुंच गया। बैंक का सकल बुरा फंसा कर्ज 3.90 फीसदी से घटकर 2.55 फीसदी रह गया।
पेटीएम का घाटा कम होकर 208.5 करोड़
पेटीएम ब्रांड की मालिकाना हक वाली कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस का चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में एकीकृत घाटा कम होकर 208.5 करोड़ रुपये हो गया। भुगतान प्रसंस्करण शुल्क व कर्मचारी लागत पर खर्च में कमी से यह नुकसान हुआ है। जोमैटो का एकीकृत शुद्ध लाभ 57.2 फीसदी घटकर 59 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, एकीकृत परिचालन आय बढ़कर 5,405 करोड़ पहुंच गई।
बजट में एक लाख करोड़ डॉलर के पूंजीगत खर्च की घोषणा संभव : वेंपति
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की ओर से हाल ही में जारी जीडीपी के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं। आरबीआई ने भी एक रिपोर्ट में वृद्धि दर में तेजी आने की उम्मीद जताई है। अर्थशास्त्री संदीप वेंपति का कहना है कि इन आंकड़ों को देखने से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2025-26 का बजट विकसित भारत के विजन को साकार करने की पृष्ठभूमि में पेश किया जाएगा। उम्मीद है कि बजट में सरकार वित्त वर्ष 2028-29 तक की अवधि के लिए एक लाख करोड़ डॉलर के पूंजीगत खर्च की घोषणा कर सकती है। साथ ही, राजकोषीय घाटे के इस प्रकार निर्धारित किया जाएगा कि केंद्र सरकार का कर्ज जीडीपी के प्रतिशत के रूप में घटता रहेगा।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की ओर से हाल ही में जारी जीडीपी के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं। आरबीआई ने भी एक रिपोर्ट में वृद्धि दर में तेजी आने की उम्मीद जताई है। अर्थशास्त्री संदीप वेंपति का कहना है कि इन आंकड़ों को देखने से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2025-26 का बजट विकसित भारत के विजन को साकार करने की पृष्ठभूमि में पेश किया जाएगा। उम्मीद है कि बजट में सरकार वित्त वर्ष 2028-29 तक की अवधि के लिए एक लाख करोड़ डॉलर के पूंजीगत खर्च की घोषणा कर सकती है। साथ ही, राजकोषीय घाटे के इस प्रकार निर्धारित किया जाएगा कि केंद्र सरकार का कर्ज जीडीपी के प्रतिशत के रूप में घटता रहेगा।
आत्मनिर्भर भारत : 1,561 करोड़ के 47 टैंक खरीदेगी सेना, एचवीएफ से करार
रक्षा मंत्रालय ने 47 टी-72 ब्रिज लेइंग टैंक खरीदने के लिए मंगलवार को हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। सेना के लिए इन टैंकों की खरीद पर सरकार 1,561 करोड़ रुपये खर्च करेगी। हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (एचवीएफ) आर्म्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (एवीएनएल) की एक इकाई है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हैवी व्हीकल फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। ब्रिज लेइंग टैंक (बीएलटी) एक बेहद अहम उपकरण है, जिसका इस्तेमाल आक्रामक अभियानों के दौरान सेना पुलों का निर्माण करने के लिए करती है। यह टैंक और बख्तरबंद वाहनों के बेड़े को अभिन्न पुल बनाने की क्षमता प्रदान करता है। समझौते के अंतर्गत खरीद होने से रक्षा में मेक-इन-इंडिया पहल को बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना समग्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और देश में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में भी अहम साबित होगी।
रक्षा मंत्रालय ने 47 टी-72 ब्रिज लेइंग टैंक खरीदने के लिए मंगलवार को हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। सेना के लिए इन टैंकों की खरीद पर सरकार 1,561 करोड़ रुपये खर्च करेगी। हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (एचवीएफ) आर्म्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (एवीएनएल) की एक इकाई है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हैवी व्हीकल फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। ब्रिज लेइंग टैंक (बीएलटी) एक बेहद अहम उपकरण है, जिसका इस्तेमाल आक्रामक अभियानों के दौरान सेना पुलों का निर्माण करने के लिए करती है। यह टैंक और बख्तरबंद वाहनों के बेड़े को अभिन्न पुल बनाने की क्षमता प्रदान करता है। समझौते के अंतर्गत खरीद होने से रक्षा में मेक-इन-इंडिया पहल को बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना समग्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और देश में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में भी अहम साबित होगी।
एअर इंडिया एक्स. की एशिया व सिंगापुर उड़ानों में अब बैगेज 30 किलो
एअर इंडिया एक्सप्रेस ने मिडिल ईस्ट और सिंगापुर की अपनी उड़ानों में यात्रियों के लिए चेक-इन बैगेज की अनुमति 20 किलो से बढ़ाकर 30 किलोग्राम कर दी है। एयरलाइन शिशुओं के साथ यात्रा करने वाले परिवारों के लिए 10 किलोग्राम का अतिरिक्त चेक-इन बैगेज की अनुमति भी दे दी है। मंगलवार को जारी बयान में एअर इंडिया एक्सप्रेस ने कहा, यात्री अब 30 किलोग्राम चेक-इन बैगेज का आनंद ले सकते हैं। यह पश्चिम एशिया के साथ-साथ सिंगापुर के बीच एयर इंडिया एक्सप्रेस की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागू होगा।
एअर इंडिया एक्सप्रेस ने मिडिल ईस्ट और सिंगापुर की अपनी उड़ानों में यात्रियों के लिए चेक-इन बैगेज की अनुमति 20 किलो से बढ़ाकर 30 किलोग्राम कर दी है। एयरलाइन शिशुओं के साथ यात्रा करने वाले परिवारों के लिए 10 किलोग्राम का अतिरिक्त चेक-इन बैगेज की अनुमति भी दे दी है। मंगलवार को जारी बयान में एअर इंडिया एक्सप्रेस ने कहा, यात्री अब 30 किलोग्राम चेक-इन बैगेज का आनंद ले सकते हैं। यह पश्चिम एशिया के साथ-साथ सिंगापुर के बीच एयर इंडिया एक्सप्रेस की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागू होगा।