Biz Updates: भारत-नेपाल के बीच सीधे रेल कार्गो सेवा का शुभारंभ; US में मेटा के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया शुरू
भारत से नेपाल के पूर्वी सीमावर्ती शहर विराटनगर के लिए सीधी रेल मालगाड़ी सेवा शुरू हो गई है। सोमवार को कोलकाता पोर्ट से पहली मालगाड़ी 40 कंटेनर सरसों लेकर विराटनगर के बुढ़ानगर स्थित इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट पर पहुंची। तीन साल पहले शुरू हुई इस रेल कार्गो सेवा के तहत पहली बार कोलकाता से सीधे विराटनगर तक मालगाड़ी पहुंची है। द्विपक्षीय व्यापार और पारगमन समझौते के तहत भारत ने नेपाल को तीसरे देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अपने रेल, सड़क और जल नेटवर्क के इस्तेमाल की अनुमति दी है। इससे पहले केवल बीरगंज ही ऐसा सीमा बिंदु था, जहां तीसरे देशों से आयातित सामान रेल कार्गो से पहुंचता था।
कोलकाता पोर्ट से सीधे विराटनगर पहुंची पहली मालगाड़ी; अब समय और लागत में होगी बचत
सुरक्षित परिवहन के लिए कंटेनरों में इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है। यह सेवा नेपाली महावाणिज्य दूतावास (कोलकाता), कोलकाता सीमा शुल्क व पोर्ट और भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड (कॉनकॉर) के संयुक्त सहयोग से शुरू हुई है। इस विस्तार पर प्रतिक्रिया देते हुए विराटनगर स्थित मोरंग उद्योग संघ के अध्यक्ष नंदू राठी ने कहा कि इससे पूर्वी क्षेत्र के उद्योगपतियों और आयातकों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने बताया कि अब कोलकाता पोर्ट से मालगाड़ी 24 घंटे में विराटनगर पहुंच सकती है, जिससे परिवहन समय और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी।
इंस्टा की लत लगाने के आरोप में मेटा के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया शुरू
टेक दिग्गज मेटा पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम को कुछ इस तरह डिजाइन करने का आरोप लगा है, जिससे कि उसकी लत लग जाए। दावा है कि इससे किशोरों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इस मामले में अमेरिका के टेनेसी में मेटा के खिलाफ दर्ज मुकदमे के लिए सोमवार को जूरी चुनने की प्रक्रिया शुरू हुई। टेनेसी के अटॉर्नी जनरल जोनाथन स्क्रमेटी ने याचिका में दावा किया कि मेटा के पास ऐसे आंतरिक शोध मौजूद थे, जो इंस्टा से होने वाले नुकसान की पुष्टि करते थे। इसके बावजूद कंपनी ने फीचर्स नहीं बदले और लोगों को इसके खतरों से गुमराह किया।
बैंकों में 1.42 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, वसूली सिर्फ 6,389 करोड़ रुपये
भारतीय बैंकिंग प्रणाली की मजबूती के दावों के बीच, सरकार ने संसद में धोखाधड़ी के गंभीर आंकड़े पेश किए हैं। पिछले पांच वित्त वर्षों में बैंकों और वित्तीय संस्थानों में कुल 1.42 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी दर्ज हुई है। इस बड़ी रकम में से सिर्फ 6,389 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी, जो कुल धोखाधड़ी का आधे प्रतिशत से भी कम है।
सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि यह स्थिति देश की वित्तीय सुरक्षा के लिए चिंताजनक है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, धोखाधड़ी वाले मामलों में पैसे की वसूली लगातार जारी है। हालांकि, धोखाधड़ी का पता चलने के बाद पैसा वापस लाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 15,577 जानबूझकर चूक करने वालों के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं।