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Amit Shah: 'हमने सीईसी चुनाव के लिए पैनल को बहुसदस्यीय बनाया', विपक्ष के सवालों पर शाह का लोकसभा में जवाब

Wed, 10 Dec 2025 06:58 PM IST
कुमार विवेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 10 Dec 2025 06:58 PM IST
सार

Amit Shah in Lok Sabha: लोकसभा में चुनाव आयोग और EVM पर विपक्ष के सवालों का अमित शाह ने बुधवार को करारा जवाब दिया। शाह ने कहा- 55 साल तक पीएम ही करते थे नियुक्ति। पढ़ें पूरी खबर।

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Amit Shah in Parliament Amit Shah Reply on Elections Commission Vote Chori and other issues in Loksabha
अमित शाह - फोटो : amarujala.com

विस्तार

लोकसभा में चुनाव सुधार और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। इस दौरान विपक्ष के वॉकआउट से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने इतिहास और तथ्यों का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। चुनाव आयोग पर मंगलवार को मनीष तिवारी की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब देने के लिए बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाला। 

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शाह ने कहा, "मैंने आज चुनाव आयोग को लेकर जांच करवाई। मैंने पूछा कि चुनाव सुधार के लिए आपको कितने आवेदन, किस पार्टी से मिले। क्योंकि चुनाव सुधार करना है तो अलग-अलग राजनीतिक दलों से चर्चा कर के चुनाव आयोग विधि मंत्रालय को भेजता है और मंत्रालय इसे संसद के पास भेजता है। मुझे मालूम पड़ा कि मई 2014 से आज तक चुनाव सुधार का एक भी सुझाव चुनाव आयोग को कांग्रेस पार्टी की तरफ से नहीं भेजा गया।"
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उन्होंने आगे कहा, "नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद आज तक कांग्रेस ने चुनाव आयोग को चुनाव सुधार के लिए एक भी सुझाव नहीं भेजा। यह मिलने गए हैं चुनाव आयोग में। चुनाव सुधार जो होता है, वह चुनाव के नियम जो तय होते हैं उसके लिए राजनीतिक दलों को बुलाया जाता है।"

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कांग्रेस के सवालों पर अमित शाह ने क्या जवाब दिए?

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, "कल विपक्ष के नेता ने तीन सवाल पूछे थे और चार सुझाव दिए थे। पहले सवाल के जवाब में मैं बताना चाहता हूं कि 73 वर्ष तक देश में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का कोई कानून ही नहीं था। नियुक्ति प्रधानमंत्री सीधे कर देते थे।"


शाह ने सदन को बताया, "मैं आज पूरे देश को बताना चाहता हूं कि कुल अब तक जितने चुनाव आयुक्त बने और जितने मुख्य चुनाव आयुक्त हुए। ये सभी इसी प्रकार से आए। 1950 से 1989 तक चुनाव आयोग एक सदस्यीय था। कोई कानून नहीं था। प्रधानमंत्री जी फाइल भेजते थे राष्ट्रपति जी को और वो फाइल अप्रूव हो जाती थी। पूरे 55 साल प्रधानमंत्री जी ने चुनाव आयुक्त को नियुक्त किया। तब कोई सवाल नहीं था। लेकिन पीएम मोदी कुछ करते हैं तो उन पर सवाल। हम तो ऐसा करते भी नहीं हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "हमने तो चुनाव आयुक्त के चुनाव के लिए पैनल को बहुसदस्यीय बनाया। कांग्रेस पार्टी ने पुरानी परंपरा बनाई थी। लेकिन अब आरोप लगा रहे हैं कि वोट चोरी कर लिया, चुनाव चोरी कर लिया। 1950 से 2023 तक कोई कानून नहीं था और 2023 में एक मुकदमा हुआ। इसमें सुझाव आया कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में पारदर्शिता होनी चाहिए। हमारे सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इसमें थोड़ा समय लगेगा। हमें इस पर चर्चा करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक कानून नहीं बनता तब तक चीफ जस्टिस की अध्यक्ष में समिति बने, इसमें प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता हों।"

'रिसर्च नहीं करते भाषण तैयार करने वाले'

चयन समिति में विपक्ष की भूमिका पर शाह ने कहा, "2012 में जब सीईसी की नियुक्ति होनी थी तब आडवाणी जी ने पत्र लिखकर कहा था कि एक प्रणाली बनाई जाए, लेकिन कोई प्रणाली नहीं बनी। आप कहते हैं कि वहां (सीईसी) के चुनाव में हमारी बात सिर्फ 33 फीसदी होती है। जनता तय करती है कि 66 फीसदी कौन होगा। आप जीतिए और आप भी 66 फीसदी में जगह बनाइए। लेकिन आपने तो 100 फीसदी रखा था उनकी नियुक्ति में। हमने तो इसमें आपको जगह दी।" शाह ने विपक्ष की तैयारी पर तंज कसते हुए कहा, "इनका जो भाषण तैयार करते हैं वे रिसर्च नहीं करते।"

सीसीटीवी और इम्युनिटी पर स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर शाह ने स्पष्ट किया, "चुनाव आयोग ने कहा कि सीसीटीवी तक सामान्य व्यक्ति की पहुंच होनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति उच्च न्यायालय जाकर 45 दिन के अंदर सीसीटीवी फुटेज निकलवा सकता है। राजनीतिक दलों को अगर चुनाव प्रक्रिया पर शक है तो वे चैलेंज करें, सीसीटीवी फुटेज हासिल कर सकें। राजनीतिक एजेंट्स भी इसे लेकर याचिका लगा सकते हैं, लेकिन करता कोई नहीं है। आप सिर्फ आरोप लगाते हैं। अब अगर सीसीटीवी फुटेज को लेकर हर कोई सीसीटीवी फुटेज की मांग करेगा तो कैसे चलेगा।"

अधिकारियों की सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा, "इस देश को, लोकतंत्र को आप धूमिल नहीं कर सकते हैं। ढंग से भाषण तैयार करने सीखने चाहिए। एक उन्होंने कहा कि सीईसी को 2003 में कानून बनाकर इम्युनिटी दी। रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट, 1950 में ही चुनाव आयोग के अधिकारियों को जो कुछ मिला है, उसमें हमने बदलाव नहीं किया है। हमने उसे सिर्फ आगे बढ़ाया है। चुनाव आयोग के कोई भी अधिकारी जिसके आयुक्त भी आते हैं उन पर चुनाव प्रक्रिया के लिए कोई मुकदमा नहीं चल सकता। हमने इसे देश के कानून में संगठित किया है।" अंत में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "इतने सारे कानून के जानकारों को राज्यसभा में रखा है, पता नहीं क्या करते रहते हैं।"

मनीष तिवारी ने कहा था- देश में निष्पक्ष चुनाव समय की मांग

सदन में चुनाव सुधार पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा था कि "देश में निष्पक्ष चुनाव कराए जाने समय की मांग हैं।" उन्होंने संविधान के तहत चुनाव आयोग को मिले अधिकारों का जिक्र करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल को याद किया। तिवारी ने कहा कि "1988 में कांग्रेस सरकार ने इतिहास का सबसे बड़ा सुधार कराया।" चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तिवारी ने आरोप लगाया कि आज चुनाव आयोग केंद्र के निर्देश पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग को पूरे राज्यों में एसआईआर नहीं कराए जा सकते।" ईवीएम के मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए मनीष तिवारी ने सदन में कहा, "ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं, इन मशीनों का सोर्स कोड किसी और कंपनी के पास होना चिंताजनक है।"

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