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चिंताजनक: भारत के 40% अमीर कर्ज में डूबे, 43% नहीं बचा पा रहे 20% आय; सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत

Fri, 06 Jun 2025 08:45 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 06 Jun 2025 08:45 AM IST
सार

इंडिया वेल्थ सर्वे-2025 के अनुसार, 40% अमीर भारतीय भारी कर्ज में हैं और 43% एचएनआई अपनी कमाई का 20% भी नहीं बचा पा रहे। सेवानिवृत्ति, शिक्षा जैसे लक्ष्यों में नाकामी की वजह सीमित बचत और वित्तीय योजना की कमी है। 30-45 आयु वर्ग में यह संकट और गंभीर है।

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40% of India's rich are in debt 43% are unable to save 20% of their income Shocking reality revealed in survey
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik.com

विस्तार

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों में उछाल के बावजूद बड़ी संख्या में देश के हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (एचएनआई) यानी बेहद अमीर भी वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम हो रहे हैं। इन वित्तीय लक्ष्यों में बच्चों की पढ़ाई से लेकर सेवानिवृत्ति फंड जुटाना शामिल है। चिंताजनक बात है कि कमाई में तेज वृद्धि के बावजूद ज्यादातर एचएनआई पर्याप्त बचत नहीं कर पा रहे हैं और इनमें से 40 फीसदी भारी कर्ज से जूझ रहे हैं।
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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) नियंत्रित मार्सेलस इन्वेस्टमेंट और डन एंड ब्रैडस्ट्रीट की इंडिया वेल्थ सर्वे-2025 रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमित बचत, भारी कर्ज और अमीरों के बीच वित्तीय योजना की कमी चिंताजनक तस्वीर पेश करती है। शेयर बाजार में रिकॉर्डतोड़ तेजी के बावजूद भारतीय एचएनआई अपनी सीमित आर्थिक प्रगति से असंतुष्ट और निराश महसूस कर रहे हैं।
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करीब 43 फीसदी एचएनआई टैक्स चुकाने के बाद अपनी कमाई का 20 फीसदी हिस्सा भी नहीं बचा पा रहे हैं। 30 से 45 साल के अमीरों में यह समस्या और गंभीर है। कर्ज के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि 30-45 साल के 50 फीसदी एचएनआई उधारी में डूबे हैं, जो उन्हें सेवानिवृत्ति फंड जुटाने, मकान खरीदने और बच्चों की शिक्षा जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्य बनाने से रोक रहा है।
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यह सर्वे देश के मेट्रो, टियर-1 और टियर-2 शहरों के 30 साल से अधिक उम्र के 465 लोगों पर किया गया है, जिनकी टैक्स चुकाने के बाद सालाना आय 20 लाख से ज्यादा है। एचएनआई का मतलब उस व्यक्ति से है, जिसके पास 5 करोड़ से अधिक की निवेश योग्य संपत्ति है।

महत्वाकांक्षाएं बड़ी, पर ठोस योजना का अभाव
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकतर एचएनआई की महत्वाकांक्षाएं बड़ी हैं। मसलन, 75 फीसदी अमीर अपने बच्चों की शिक्षा और शादी का खर्च उठाना चाहते हैं, जबकि 40 फीसदी की मकान खरीदने या व्यवसाय शुरू करने की योजना हैं। कई लोग जल्द सेवानिवृत्त होने का सपना भी देखते हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम अमीरों के पास कोई ठोस वित्तीय योजना है।

रियल एस्टेट सबसे पसंदीदा निवेश विकल्प
रियल एस्टेट अब भी सबसे पसंदीदा निवेश विकल्प है। आधे से ज्यादा एचएनआई ने अपनी संपत्ति का 20 फीसदी से अधिक हिस्सा रियल एस्टेट में लगाया है। सिर्फ एक तिहाई ने शेयर बाजार में इतना निवेश किया है। 25 फीसदी को वैश्विक निवेश की जानकारी ही नहीं है।


वित्तीय सलाहकारों से भी नहीं हैं संतुष्ट
87 फीसदी एचएनआई बाहरी वित्तीय सलाहकारों की मदद लेते हैं, इनमें से दो-तिहाई लोग इनसे नाखुश हैं। सलाहकार कमीशन वाले उत्पाद बेचते हैं और उनकी जरूरतों को समझकर सलाह नहीं देते। 82 फीसदी अमीर मानते हैं कि बेहतर योजना से वे वित्तीय लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं।

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सुझाव: समस्याओं से निजात के तीन समाधान
एचएनआई को इन परेशानियों से निजात दिलाने के लिए रिपोर्ट में तीन समाधान सुझाए गए हैं। इनमें निशुल्क व्यक्तिगत लक्ष्य नियोजन, परिसंपत्ति आवंटन व विविध पोर्टफोलियो (जिसमें वैश्विक शेयर शामिल हों) तक पहुंच व निवेश यात्रा के दौरान निरंतर समर्थन का प्रस्ताव शामिल हैं। रिपोर्ट से स्पष्ट संदेश मिलता है कि भारतीय अमीरों को ज्यादा बचत करनी होगी। सपनों को हकीकत में बदलने के लिए अपने निवेश को बेहतर तरीके से फैलाना होगा।
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