22 महीने बीते, 15 उद्यमियों को नहीं मिली जमीन, 65 में से सिर्फ 11 इकाइयों में ही उत्पादन शुरू हो सका
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फरवरी, 2018 में शहर के 65 उद्यमियों ने 1841 करोड़ रुपये की औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रदेश सरकार के साथ एमओयू साइन किया था। इतनी कवायद के बाद सिर्फ 38 उद्यमी ही अपने काम को आगे बढ़ा सके। इन इकाइयों में करीब 625 करोड़ रुपये का निवेश है।
शेष उद्यमियों के करीब 1200 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर कोई बात आगे नहीं बढ़ी। करीब 900 करोड़ का निवेश करने वाले उद्यमी जमीन की तलाश में हैं। निराश करने वाली बात यह है कि 300 करोड़ रुपये निवेश करने वाले दो उद्यमियों ने हाथ खींच लिए थे। विभाग इन्हें मना नहीं सका।
100 करोड़ रुपये निवेश करने वाले तीन उद्यमियों से उद्योग विभाग का संपर्क नहीं हुआ। उद्योग विभाग के अफसरों का कहना है कि ये शहर से बाहर रहते हैं। इसके अलावा पांच उद्यमी ऐसे हैं जिनकी ऋ ण की जरूरत पूरी नहीं हुई या कानूनी समस्याओं के कारण कार्य शुरू नहीं कर सके। शहर में औद्योगिक निवेश को यह बड़ा झटका है।
65 एमओयू में से करीब एक दर्जन औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन शुरू हो गया है। 27 इकाइयों में काम चल रहा है। दो से चार महीने में कुछ और इकाइयों में उत्पादन शुरू होगा। चूंकि बड़ी इकाई स्थापित करने में थोड़ा वक्त लगता है। निर्माण से लेकर प्लांट एवं मशीनरी में काफी खर्च भी आता है। 12 उद्यमियों को लघु औद्योगिक आस्थानों में जमीन दी गई है। जिन 15 लोगों को जमीन नहीं मिली, वे शहरी क्षेत्र में ही जमीन चाहते हैं। इसके लिए यूपीसीडा के साथ मिलकर जमीन की तलाश की जा रही है।
सर्वेश्वर शुक्ल, संयुक्त आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग