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...तो इसलिए राज्यों को पसंद है शराब..15% तक कमाई, लॉकडाउन में 679 करोड़ का नुकसान

Sat, 09 May 2020 05:56 AM IST
संदीप भट्ट बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Sat, 09 May 2020 05:56 AM IST
सार

  • 12 राज्य गटक जाते हैं 75 फीसदी शराब 
  • हर भारतीय पीता है सालाना  5.7 लीटर शराब 

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Why liquor sales matter to states

विस्तार

लॉकडाउन से कमाई के मोर्चे पर नुकसान झेल रहे राज्यों ने शराब बिक्री शुरू कर दी है। राज्यों ने यह कदम इसलिए उठाया है, क्योंकि उनके कुल राजस्व का करीब 15% हिस्सा शराब पर लगे कर से आता है। मौजूदा हालात में यही उनकी कमाई का इकलौता जरिया है। इस बीच, शुक्रवार को आई क्रिसिल की रिपोेर्ट के मुताबिक, देशभर में जितनी शराब की खपत होती है, उसमें करीब आधी (45%) पांच दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना व कर्नाटक पी जाते हैं। भरपाई के लिए कुछ राज्यों में शराब पर टैक्स बढ़ा है। दिल्ली ने तो अधिकतम खुदरा मूल्य पर 70% ‘विशेष कोविड-19 उपकर’ लगा दिया है।

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12 राज्य गटक जाते हैं 75 फीसदी शराब 

देश के कुल शराब खपत में 12 राज्यों का हिस्सा 75% है। इनमें दक्षिण भारत के पांच राज्यों के अलावा दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं। तमिलनाडु में खपत सबसे अधिक 13%, कर्नाटक में 12%, महाराष्ट्र में 8%और दिल्ली में 4% है। उधर, महाराष्ट्र में शराब पर कर अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे अधिक है। 

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हर दिन 679 करोड़ का नुकसान

लॉकडाउन के पहले और दूसरे चरण में 40 दिनों के दौरान राज्यों को शराब से औसतन करीब 27 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस दौरान राज्यों को एक दिन में औसतन करीब 679 करोड़ रुपये की चपत लगी है।

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राज्य ऐसे जुुटाते हैं राजस्व

पीआरएस लेजिस्लेटिव की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों की कमाई का मुख्य जरिया एसजीएसटी (43%), भूमि राजस्व, वैट और सेल्स टैक्स (23%), एक्साइज ड्यूटी (13%) व अन्य टैक्स हैं। इनकी कुल कमाई में एक्साइज ड्यूटी का बड़ा हिस्सा होता है, जो सबसे ज्यादा शराब पर लगती है। गुजरात-बिहार को छोड़कर सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की आय में शराब से होने वाली कमाई का बड़ा योगदान है। तमिलनाडु में शराब पर वैट के साथ आयातित शराब पर विशेष शुल्क, परिवहन शुल्क, लेबल और ब्रांड पंजीकरण शुल्क लगता है। 

हर भारतीय पीता है सालाना  5.7 लीटर शराब 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में प्रति व्यक्ति (15 साल से ऊपर) शराब की सालाना खपत 2005 में 2.4 लीटर थी। यह 2016 में बढ़कर 5.7 लीटर हो गई। 2010 में पुरुष सालाना 7.1 लीटर और महिलाएं 1.3 लीटर खराब पीती थीं। 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर क्रमश: 9.4 लीटर और 1.7 लीटर हो गई।

राज्यों की सालाना आय

  • 2019-20 में 2.48 लाख करोड़ की कमाई हुई
  • 2018-19 में 2.17 लाख करोड़ की आय मिली 
  • 2017-18 में 1.19 लाख करोड़ राजस्व जुटाया 

 

शराब से राजस्व

तमिलनाडु

15

केरल

15

दिल्ली

12

आंध्र प्रदेश

11

कर्नाटक

11

तेलंगाना

10

उत्तर प्रदेश

8.04

महाराष्ट्र

8


 

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