गैस चोरी से मिलेगी निजात जल्द आ रहे पारदर्शी एलपीजी सिलेंडर
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पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि सरकार इसी साल प्लास्टिक के पारदर्शी सिलेंडरों को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। उनका कहना है कि देश में ही इसके उत्पादक मिल गए हैं इसलिए कोशिश है कि इसी साल इसे देश के कुछ हिस्सों में परीक्षण शुरू हो जाए।
केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले दिनों अमर उजाला से बातचीत में बताया था कि वर्ष 2016 एलपीजी उपभोक्ताओं का वर्ष घोषित किया गया है। इस साल वैसे सभी कदम उठाए जाएंगे, जिससे ग्राहकों को फायदा हो। इसमें प्लस्टिक के पारदर्शी सिलेंडरों को बाजार में उतारना भी शामिल है।
मंत्रालय के वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इस पर काम चल रहा है। पहले यहां प्लास्टिक के पारदर्शी सिलेंडर बनाने वाले नहीं मिल रहे थे, लेकिन अब मंत्रालय के संपर्क में दो कंपनियां हैं जो कि इसे भारत में ही बना सकती हैं। उनका कहना है कि यही प्लास्टिक के सिलेंडरों को बाजार में उतारने का सही वर्ष है क्योंकि अभी कच्चा तेल का दाम पिछले 13 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर है।
गौरतलब है कि प्लास्टिक बनाने में मुख्य कच्चा माल प्लास्टिक दाना है जो कि कच्चे तेल से ही बनता है। उन्होंने बताया कि अभी तो प्लस्टिक वाले सिलेंडरों का मूल्य पारंपरिक लोहे वाले सिलेंडरों के मुकाबले दुगुना बताया गया जा रहा है। लेकिन एक बार जब यहां भारी संख्या में बनना शुरू हो जाएगा तो दाम नीचे आने की पूरी संभावना है।
गैस चोरी की घटनाओं पर लगेगी लगाम
ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन -एआईपीएमए- के अध्यक्ष आरके अग्रवाल का कहना है कि प्लास्टिक के जिस सिलेंडर की बात चल रही है, उसे देश में ही बनाने की पूरी क्षमता है।
एसोसिएशन के ही दो सदस्यों ने इस बारे में पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के समक्ष प्रजेंटेशन भी दिया है। जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलेगी, यहां निर्माण शुरू हो जाएगा। सिलेंडरों की लागत के बारे में पूछने पर बताया कि कच्चे तेल के सस्ता होने की वजह से यह भी सस्ता हुआ है, लेकिन कम मात्रा में बनाने पर इसकी लागत ज्यादा आएगी।
एक बार इसका बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू हो जाए तो दाम खुद ब खुद नीचे आ जाएगा। उल्लेखनीय है कि गैस सिलेंडरों में गैस निकालने की घटना आम हो गई है। हालांकि सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने इसके लिए डिलीवरीमैन को स्प्रिंग बैलेंस पर आधारित वजन मापने की मशीन उपलब्ध करायी है। लेकिन डिलीवरीमैन उसमें भी कुछ ऐसा जुगाड़ भिड़ाता है कि एक-दो किलो गैस का पता ही नहीं चल पाता है।