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सेबी ने जारी किए दिशानिर्देश, इस तारीख से लागू होंगी अपफ्रंट मार्जिन की गाइडलाइन
Tue, 21 Jul 2020 02:04 PM IST
डिंपल अलवधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Tue, 21 Jul 2020 02:04 PM IST
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सेबी
- फोटो : PTI
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पूंजी बाजार नियामक सेबी ने नकद और वायदा एवं विकल्प कारोबार श्रेणी में ग्राहकों से शुरुआत में ही मार्जिन संग्रह की पुष्टि के लिए नियम जारी किए हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा है कि यह नई व्यवस्था 1 दिसंबर 2020 से अमल में आ जाएगी।
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ये है नियम
नियामक ने इस बात को दोहराया है कि शुरुआती मार्जिन को ग्राहक से कारोबार से पहले ही ले लिया जाएगा। सेबी ने कहा कि क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन इस मामले में प्रत्येक ग्राहक के हिसाब से मार्जिन जरूरत के कम से कम चार स्नेपशॉट कारोबारी सदस्यों (टीएम) या फिर क्लीयरिंग सदस्यों (सीएम) को भेजेगा ताकि उन्हें प्रत्येक वर्ग में प्रत्येक ग्राहक की दिन की मार्जिन जरूरत की जानकारी हो।
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जिंस वायदा कारोबार के मामले में सेबी ने कहा कि जिंसों के वायदा कारोबार का आखिरी स्नेपशॉट शाम पांच बजे जारी किया जाएगा। कारोबारी और क्लीयरिंग सदस्यों को क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन द्वारा प्रत्येक ग्राहक के हिसाब से मार्जिन की फाइल उपलब्ध कराई जाएगी उसमें दिन के अंत में ग्राहक की मार्जिन जरूरत का उल्लेख होगा।
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इसके साथ ही दिन के प्रत्येक स्नैपशॉट के साथ ग्राहक की सबसे ऊंची मार्जिन आवश्यकता को भी दर्शाया जाएगा। वहीं सदस्यों को भी प्रत्येक ग्राहक से जुटाए गए मार्जिन की भी जानकारी देनी होगी। इसमें दिन के दौरान जुटाए गए शीर्ष मार्जिन और दिन की समाप्ति पर मार्जिन की जानकारी देनी होगी। यह जानकारी नियामक द्वारा बताए गए तरीके से ही देनी होगी।
सेबी ने सख्त किए भेदिया कारोबार के खुलासा नियम
बाजार नियामक सेबी ने भेदिया कारोबार के खुलासा नियमों को सख्त बना दिया है। कंपनियों को आंकड़े डिजिटली सुरक्षित रखने होंगे। सेबी ने कहा, इकाइयां अनपब्लिस्ट प्राइस सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन को डिजिटल रूप में संरक्षित रखेंगी।
उन्हें यह भी बताना होगा कि इन आंकड़ों की जानकारी किसी कंपनी को कौन देता है। साथ ही किसी भी भुगतान के आंकड़े को 8 साल तक सुरक्षित रखना होगा। सेबी ने 17 जुलाई से नए नियम लागू किए हैं।
उन्हें यह भी बताना होगा कि इन आंकड़ों की जानकारी किसी कंपनी को कौन देता है। साथ ही किसी भी भुगतान के आंकड़े को 8 साल तक सुरक्षित रखना होगा। सेबी ने 17 जुलाई से नए नियम लागू किए हैं।