तिमाही नतीजे: 19 फीसदी कम हुआ बजाज फाइनेंस का लाभ, राहुल बजाज ने छोड़ा अध्यक्ष पद
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बजाज फाइनेंस ने जून तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 19.40 फीसदी कम हुआ है और यह 962.32 करोड़ रुपये रहा। जबकि पिछले साल की समान तिमाही में नेट प्रॉफिट 1,195.25 करोड़ रुपये था।
राहुल बजाज छोड़ेंगे गैर-कार्यकारी अध्यक्ष का पद
31 जुलाई 2020 को राहुल बजाज बजाज फाइनेंस के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के पद को छोड़ देंगे। वह कंपनी के गैर-कार्यकारी गैर-स्वतंत्र निदेशक बने रहेंगे। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को एक बयान में कहा कि संजीव बजाज, जो अभी बजाज फाइनेंस के वाइस चेयरमैन हैं, वे एक अगस्त से गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के पद को ग्रहण करेंगे। बजाज फाइनेंस ने कहा कि निदेशक मंडल ने आज आयोजित अपनी बैठक में संजीव बजाज की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।
वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन से कारोबार पर काफी असर पड़ा है। अप्रैल माह से लेकर जून 2020 तक ज्यादातर समय में लॉकडाउन की वजह से कारोबार लगभग बंद था।
साथ ही कंपनी ने बताया कि जून तिमाही में उसकी आमदनी 6,648.20 करोड़ रुपये रही। मालूम हो कि पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले यह आंकड़ा 14.52 फीसदी ज्यादा है।
कंसॉलिडेटेड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) की बात करें, तो साल-दर-साल आधार पर यह सात फीसदी बढ़कर जून तिमाही में 1,38,055 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने बताया कि जून तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड मोरेटोरियम बुक 15.7 फीसदी घटकर 21,705 करोड़ रुपये रहा। 30 अप्रैल को समाप्त तिमाही में यह 38,599 करोड़ रुपये था।
जून तिमाही में कोरोना वायरस महामारी के लिए बजाज फाइनेंस ने 1,450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। इसको मिलाकर 30 जून तक कुल कॉन्टिजेंसी प्रोविजन बढ़कर 2350 करोड़ रुपए हो गया है।
आइए जानते हैं राहुल बजाज के बारे में।
शेयर में गिरावट
तिमाही नतीजों का असर कंपनी के शेयर पर पड़ा। यह 4.00 फीसदी यानी 137.50 अंक गिरकर 3,304 के स्तर पर बंद हुआ। जबकि शुरुआती कारोबार में यह 3500 के स्तर पर खुला था और पिछले कारोबारी दिन यह 3441.50 के स्तर पर बंद हुआ था।
कौन हैं राहुल बजाज?
राहुल बजाज का जन्म 10 जून 1938 को एक मारवाड़ी परिवार में बंगाल प्रेसिडेंसी (आजादी से पहले का पश्चिम बंगाल) में हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और समाजसेवी जमनालाल बजाज के पोते हैं।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज से इकोनॉमिक ऑनर्स की है और इसके बाद उन्होंने तीन साल तक बजाज इलेक्ट्रिकल्स कंपनी में ट्रेनिंग ली थी।
साथ ही उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई भी की। उन्होंने 60 के दशक में अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए की डिग्री ली थी।
1968 में संभाला बजाज ऑटो के सीईओ का पद
साल 1968 में 30 वर्ष की उम्र में राहुल बजाज ने 'बजाज ऑटो लिमिटेड' के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष (सीईओ) का पद संभाला। तब यह कहा गया था कि ये मुकाम हासिल करने वाले वे सबसे युवा भारतीय हैं। मालूम हो कि जब उनके हाथों में कंपनी की कमान आई, तब देश में 'लाइसेंस राज' था। यानी बिना सरकार की मर्जी के उद्योगपति कुछ नहीं कर सकते थे।
कंपनी ने हासिल किया मुकाम
उन मुश्किल परिस्थितियों में भी राहुल बजाज ने कथित तौर पर निरंकुश तरीके से उत्पादन किया और स्वयं को देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बनाने में सफलता हासिल की। साल 1965 में 3 करोड़ रुपये के टर्नओवर से बजाज कंपनी 2008 में करीब 10,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच गई।