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भारत का अनोखा गांव, जहां रहते हैं सिर्फ 6 लोग, जानिए इससे जुड़ी रोचक बातें
Tue, 29 Sep 2026 05:46 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह
Updated Tue, 29 Sep 2026 05:46 PM IST
सार
भारत में कई ऐसे गांव और जगहें हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी होती है। भारत में एक ऐसा ही गांव है, जहां सिर्फ 6 लोग रहते हैं। आइए जानते हैं कि इस गांव की खास बातें...
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भारत का अनोखा गांव, जहां रहते हैं सिर्फ 6 लोग
- फोटो : AI
विस्तार
भारत को गांवों का देश कहा जाता है, क्योंकि बड़ी आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। खेती, पशुपालन, डेयरी और छोटे कारोबार से लाखों लोग जुड़े हुए हैं और अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। लेकिन देश में एक ऐसा गांव हैं, जहां सिर्फ 6 लोग रहते हैं। एक घर में ही पूरा गांव बसा है। यह अनोखा गांव हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में है, जिसका नाम काकती गांव है। ऊंची पहाड़ी पर बसा गांव अपने बेहद कम आबादी और अनोखी जीवन शैली की वजह से खास है।
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गांव में रहते हैं सिर्फ 6 लोग
काकती गांव में करीब 100 साल पुराना मिट्टी का घर है, जिसमें एक ही परिवार की कई पीढ़ियां रहती आ रही हैं। परिवार से दो भाई जुड़े हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे भाई कलजंग टाकपा लामा परिवार की परंपरा के मुताबिक बौद्ध भिक्षु(लामा) बन गए हैं और काजा स्थित एक बौद्ध गोंपा में अपनी सेवाएं देते हैं।
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कलजंग टाकपा के बड़े भाई छेरिंग नामगयल अपनी पत्नी रिंगजिन यूडन के साथ गांव में निवास करते हैं। छेरिंग के बड़े बेटे सोनम छोपेल भी लामा हैं, जो चौंतड़ा बौद्ध मंदिर में शिक्षा ले रहे हैं। यह मंदिर कांगड़ा और मंडी जिले की सीमा के पास स्थित है। उनका दूसरा बेटा नवांग ज्ञालसन विशेष बच्चा है, तो वहीं तीसरा बेटा नवांग कुंगा टैक्सी चलाता है।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह परिवार अपने वंश की पांचवीं पीढ़ी है। यह परिवार अभी अपने पुश्तैनी मिट्टी के घर और करीब 15 बीघा जमीन से जुड़ा है। जमीन पर खेती करते परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करता है। पहाड़ों के बीच सादा जीव जी रहा है।
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गांव की पहचान है 300 साल पुराना घर
काकती गांव में स्थित करीब 300 साल पुराना पारंपरिक मड हाउस उसकी पहचान है। इस घर का मिट्टी और पत्थरों से निर्माण किया गया है। यह घर रहने की जगह नहीं है, बल्कि उनके पूर्वजों की विरासत भी है। हिमालयी क्षेत्रों में ऐसे घरों का निर्माण मौसम को ध्यान में रखकर किया जाता था।