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Unique Village in India: भारत के इस गांव में चमगादड़ों की होती है पूजा, जानिए आखिर क्या है अजीबोगरीब वजह
Sun, 24 Aug 2025 07:51 PM IST
धर्मेंद्र सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Sun, 24 Aug 2025 07:51 PM IST
सार
Viral Video: बिहार के वैशाली जिले के सरसई गांव में हजारों की संख्या में चमगादड़ों का बसेरा है। चमगादड़ों के वजह से ही यह गांव काफी मशहूर हो चुका है। यहां के लोगों का मानना है कि चमगादड़ उनके पूरे गांव की रक्षा करते हैं।
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भारत के इस गांव में चमगादड़ों की होती है पूजा
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
Unique Village in India: दुनियाभर में चमगादड़ों की तुलना निशाचर यानी वैम्पायर से की जाती है और इन्हें अशुभ माना जाता है। केरल में चमगादड़ों से निपाह वायरस फैला था, जिससे कई लोगों की जान चली गई थी। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के फैलने की वजह भी चमगादड़ को ही माना जाता है। लेकिन आपको ये जानकर होगी कि हमारे देश में ही कुछ ऐसे गांव हैं, जहां लोग चमगादड़ों की पूजा करते हैं।
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चमगादड़ का नाम सुनते ही मन में कई तरह की अशुभ आशंकाएं उभरने लगती हैं। लेकिन बिहार के वैशाली जिले में एक ऐसा मंदिर हैं, जहां चमगादड़ों को ग्राम देवता के तौर पर पूजा की जाती है। यहां के लोगों का मानना है कि चमगादड़ संपन्नता के प्रतीक हैं और ये जहां निवास करते हैं, वहां कभी भी धन की कमी नहीं होती है।
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बिहार के वैशाली जिले के सरसई गांव में हजारों की संख्या में चमगादड़ों का बसेरा है। चमगादड़ों के वजह से ही यह गांव काफी मशहूर हो चुका है। यहां के लोगों का मानना है कि चमगादड़ उनके पूरे गांव की रक्षा करते हैं। इतना ही नहीं चमगादड़ों को देखने के लिए इस गांव में काफी संख्या में पर्यटक भी आते हैं। सरसई गांव के लोगों का मानना है कि चमगादड़ जब से आए हैं, इस गांव में हमेशा खुशियां रहती हैं। गांव के लोग कोई भी शुभ कार्य करने से पहले चमगादड़ों की पूजा करते हैं।
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गांव की पहरेदारी करते हैं चमगादड़
सरसई गांव के लोगों का कहना है कि इन चमगादड़ों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं, लेकिन ये चमगादड़ कुछ नहीं कहते हैं। वहीं रात में अगर कोई गांव से बाहर का व्यक्ति आ जाए, तो ये चमगादड़ शोर मचाने लगते हैं। जबकि गांव के लोगों के आने पर कुछ नहीं कहते हैं।
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सरसई गांव में जिस तालाब के किनारे पीपल और अन्य पेड़ों पर इन चमगादड़ों का बसेरा है, उस तालाब का निर्माण वर्ष 1402 में राजा शिव सिंह ने करवाया था। यहां एक शिवालय भी है। तालाब और पेड़-पौधों की हरियाली से सराबोर यह एरिया 50 एकड़ में फैला है। गांव वाले ना केवल चमगादड़ों की पूजा करते हैं, बल्कि इनके सुरक्षा का भी ध्यान रखते हैं।