500 साल पुराना वो गांव, जहां दो देशों के बीच 'दुनिया' का हुआ था बंटवारा!
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एक जमाना था जब दुनिया के एक बड़े हिस्से पर अंग्रेजों का राज था। कहा जाता था कि ब्रिटिश साम्राज्य में सूरज नहीं अस्त होता। मगर, उस दौर में भी दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऐसा था, जहां अंग्रेजों का नहीं, दूसरे यूरोपीय देशों का राज था। मध्यकाल में यूरोपीय देश स्पेन का दुनिया के एक बड़े हिस्से पर राज हुआ करता था। खास तौर से अमेरिकी महाद्वीपों पर।
आज के अमेरिका और कनाडा को छोड़ दें तो, बाकी अमेरिकी महाद्वीप पर स्पेन का ही राज था। कमोबेश पूरे के पूरे दक्षिण अमेरिका में स्पेनिश ही बोली जाती है, सिवा एक देश के और इस देश का नाम है ब्राजील। सवाल ये है कि ऐसा क्यों था? जब पूरा का पूरा दक्षिण अमेरिका स्पेनिश बोलता है, तो ब्राजील में पुर्तगाली क्यों बोली जाती है?
लैटिन अमेरिका में ब्राजील ऐसा देश है, जो पुर्तगाल का उपनिवेश था। बाकी दक्षिणी अमेरिका, स्पेन के साम्राज्य का हिस्सा था। ब्राजील और बाकी अमेरिका की किस्मत का फैसला एक छोटे से गांव में हुआ था। ये गांव आज के स्पेन के वलाडोलिड सूबे में पड़ता है।
इस गांव का नाम है टॉर्डेसियास। यहीं पर 1494 में स्पेन और पुर्तगाल के बीच समझौता हुआ था। जिसके तहत दोनों देशों ने नई दुनिया को आपस में बांटा था। ये नई दुनिया आज के अमेरिकी महाद्वीप थे। इनकी तलाश इटली के नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस ने की थी। हालांकि कोलंबस, भारत की तलाश में स्पेन के खर्च पर रवाना हुए थे, मगर वो पहुंच गए अमेरिका।
स्पेन का दक्षिण अमेरिका से नाता
टॉर्डेसियास आज गांव नहीं बल्कि छोटा सा शहर बन गया है। ये डुएरो नदी के किनारे स्थित है। बेहद औसत दर्जे का ये शहर नई और पुरानी विरासतों का मेल है। यहां पुराने जमाने की कई इमारतें हैं। भले ही स्पेन में इस शहर को लोग न जानते हों, मगर लैटिन अमेरिका में बहुत से लोगों को इस शहर के बारे में पता है।
इतिहासकार बताते हैं कि ये शहर मध्य काल में छोटा सा गांव था। इसके आस-पास से कई अहम रास्ते गुजरते थे, इसी वजह से पुर्तगाल और स्पेन के राजाओं ने इस जगह को इतने अहम समझौते के लिए चुना। यहां पर पुराने राजमहल और दूसरी शानदार इमारतें भी थीं। ये भी समझौते के लिए इस कस्बे को चुनने की बड़ी वजह थी।
पंद्रहवीं सदी के आखिर में आज का स्पेन किंगडम ऑफ कस्टील के नाम से जाना जाता था। इसके एक हिस्से पर अरागॉन सल्तनत थी। वहीं पड़ोस में पुर्तगाल स्थित था। जब कोलंबस अमेरिका का पहला सफर करके लौट रहे थे, तो समुद्री तूफान की वजह से कोलंबस को अपने जहाज पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में रोकने पड़े। मजबूरन कोलंबस को नई दुनिया की अपनी खोज के बारे में पुर्तगाल के राजा जॉन द्वितीय को बताना पड़ा।
पुर्तगाल और स्पेन के बीच 1479 में पोप की मध्यस्थता से एक समझौता हुआ था। इसके तहत जॉन द्वितीय को लगा कि नई दुनिया जिसे कोलंबस ने खोजा है, वो उसके अधिकार क्षेत्र में आती है। उसने फौरन उसे अपना इलाका घोषित कर दिया। इसी दौरान कोलंबस के साथ गए नाविक मार्टिन अलोंसो पिन्जोन ने नई दुनिया की खोज की खबर स्पेन तक पहुंचा दी। इसके बाद स्पेन के राजा फर्डीनेंड और महारानी इजाबेला ने अपने हरकारे पोप के पास दौड़ाए। पोप ने अपने आदेश के तहत अटलांटिक के आर-पार एक लाइन खींची और कहा कि इसके पूरब का हिस्सा पुर्तगाल का होगा और पश्चिमी हिस्से पर स्पेन का राज होगा।
असल में पोप अलेक्जेंडर षष्ठम, स्पेन के ही रहने वाले थे। इसीलिए उन्होंने स्पेन के हक में ये फरमान जारी कर दिया। इससे नाराज पुर्तगाल ने स्पेन के खिलाफ जंग की तैयारी शुरू कर दी। पुर्तगालियों को अपने अफ्रीकी उपनिवेशों और अटलांटिक महासागर स्थित अपने जजीरों की फिक्र थी। लेकिन जिस तरह पोप ने अटलांटिक महासागर में लाइन खींचकर बंटवारा किया था, उससे तो पुर्तगाल के अफ्रीका जाने के रास्ते भी मुश्किल में पड़ते दिख रहे थे। इसीलिए पुर्तगाल ने स्पेन के खिलाफ जंग की तैयारी शुरू कर दी।
उस वक्त स्पेन को मालूम था कि वो समुद्री जंग में पुर्तगाल से नहीं जीत सकता। इसीलिए उसने सुलह का रास्ता अपनाया। इसी दौरान कोलंबस अमेरिका के अपने दूसरे सफर पर रवाना हो गए। वहां उन्होंने दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप की खोज की, लेकिन उसका गलत नक्शा बनाकर स्पेन और पुर्तगाल को खबर की। कोलंबस को नहीं मालूम था कि जॉन ने पोप के नए फरमान को कमोबेश मान लिया था। इसीलिए कोलंबस ने स्पेन को फायदा पहुंचाने की नीयत से नई दुनिया के नक्शे में झूठे हेर-फेर करके खबर की। नतीजा ये हुआ कि ब्राजील का पूर्वी तट पुर्तगाल के हिस्से में आया।
स्पेन के राजा फर्डिनेंड और महारानी इजाबेला भी इस बात पर राजी हो गए, क्योंकि उन्हें मालूम ही नहीं था कि जिस लाइन को वो पुर्तगाल के साथ मान रहे हैं, उसके पार भी कोई जमीन है। इसी गलत नक्शे की बुनियाद पर पुर्तगाल और स्पेन के बीच सन 1494 में टॉर्डेसियास का समझौता हुआ। लेकिन सन 1500 में पुर्तगाली नाविक पेड्रो अल्वारेज ब्राजील के तट पर जा पहुंचे। उन्होंने इस पर अपने देश के राजा का हक बताया। बाद के कुछ बरसों के भीतर पुर्तगाल ने दक्षिण अमेरिका के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। पुर्तगाल के हिस्से वाला हिस्सा कमोबेश आज का ब्राजील है।
यही वजह है कि जहां ज्यादातर दक्षिण अमेरिकी देशों में स्पेनिश बोली जाती है, वहीं ब्राजील में पुर्तगाली जबान बोली जाती है। और इसकी एतिहासिक वजह स्पेन का टॉर्डेसियास शहर है, जो आज से पांच सौ साल पहले एक गांव हुआ करता था और इसी गांव में पुर्तगाल और स्पेन के बीच नई दुनिया का बंटवारा हुआ था।