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दुनिया के सबसे पुराने जीव, जो लाखों साल से हैं जिंदा, वैज्ञानिक भी अब तक नहीं सुलझा सके इनका रहस्य
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Thu, 26 Dec 2019 04:19 PM IST
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क्या आपको मालूम है कि दुनिया में सबसे उम्रदराज जीव कौन सा है? अगर नहीं मालूम, तो चलिए आपके साथ हम भी इस सवाल का जवाब तलाशते हैं। वैसे तो जानवरों में कछुए सबसे ज्यादा उम्र तक जीने वाले माने जाते हैं। एक कछुआ ढाई सौ बरस की उम्र तक जिंदा रहा था। इसी तरह कुछ अमेरिकी केकड़े करीब 140 साल तक जिए। कुछ मूंगे हजारों साल तक जीते रहते हैं। एक घोंघा जिसका नाम मिंग था, वो पांच सौ सात बरस का था, जब वैज्ञानिकों ने गलती से उसकी जान ले ली। मगर, ये आंकड़े फीके लगेंगे, जब आप ये जानेंगे कि धरती पर ऐसे बहुत से जीव हैं जो लाखों बरस से जिंदा हैं।
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साइबेरिया, अंटार्कटिका और कनाडा के भयंकर सर्द माहौल में बर्फ की परतों के नीचे कई बैक्टीरिया हैं, जो दसियों लाख साल से वहीं, वैसे के वैसे पड़े हैं, बल्कि मजे में रह रहे हैं। ये कीटाणु, इतने सर्द माहौल में कैसे जी रहे हैं, ये बात अब तक किसी की समझ में नहीं आई। मगर, ये जरूर है कि अगर वो राज पता चल जाए, तो इंसान को भी अमर रहने की कुंजी मिल जाएगी।
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1979 में रूसी वैज्ञानिक सबित एबिजोव, अंटार्कटिका में रूसी स्टेशन वोस्टोक पर काम कर रहे थे। तब उन्होंने 3600 मीटर की गहराई में कुछ बैक्टीरिया, कुछ फफूंद और दूसरे छोटे जीव खोज निकाले थे। लाखों टन बर्फ के नीचे, इतनी गहराई में पड़े इन जीवों के बारे में एबिजोव ने अंदाजा लगाया कि ये हजारों साल से ऐसे ही जिंदा हैं। ये जीव, धरती की ऊपरी परत से तो वहां गए नहीं होंगे। इसलिए इनकी उम्र लाखों साल ही मानी जा रही है।
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2007 में ये रिकॉर्ड भी टूट गया। डेनमार्क की कोपेनहेगेन यूनिवर्सिटी की एक टीम और इसके अगवुएस्के विलरस्लेव पांच लाख साल पुराने जिंदा बैक्टीरिया को अंटार्कटिका, साइबेरिया और कनाडा के बेहद सर्द इलाकों से खोज निकाला। इसके दो साल बाद इससे भी पुराना एक जीवाणु मिला, करीब पैंतीस लाख साल की उम्र का। इसे रूसी वैज्ञानिक अनातोली ब्रोशकोव ने साइबेरिया में खोजा। ब्रोशकोव ने इस बैक्टीरिया को अपने शरीर में भी इंजेक्शन से डाल लिया। उन्हें लगा कि पैंतीस लाख साल से जिंदा ये बैक्टीरिया शायद उन्हें भी अमर बना दे। बाद में ब्रोशकोव ने दावा किया कि बैक्टीरिया का इंजेक्शन लेने के दो साल बाद तक उन्हें कभी ज़ुकाम-बुखार नहीं हुआ।
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सवाल ये उठता है कि वैज्ञानिक कैसे दावा करते हैं कि ये बैक्टीरिया लाखों साल से जिंदा हैं। ये पहले के कीटाणुओं की नई पीढ़ी भी तो हो सकते हैं। मगर, हकीकत ये है कि जहां बर्फीली परत में ये दबे मिले हैं, वहां इनके प्रजनन की कोई गुंजाइश नहीं। अगर किसी तरह इनके डीएनए नई कोशिकाएं बना भी लें, तो उनके लिए वहां जगह ही नहीं। इसीलिए कहा जाता है कि साइबेरिया या अंटार्कटिका में सैकड़ों मीटर बर्फ के नीचे दबे ये कीटाणु लाखों साल से ऐसे ही जिंदा वहां पड़े हैं।
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