नेपाल में एक बार फिर अचानक आई बाढ़ और लैंडस्लाइड से जान-माल का नुकसान हुआ है। 11 अक्टूबर 2026 को नेपाल के गोरखा जिले में बुढ़ी गंडक में आई बाढ़ से कई घरों, पुलों और बिजली से जुड़े ढांचे तबाह हो गए। शुरुआती रिपोर्टों में पांच लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले अगस्त 2026 में इसी नदी तंत्र के पास अचानक बाढ़ आई, जिसने भयानक तबाही मचाई थी।
नेपाल में बार-बार क्यों मच रही तबाही? ढहते ग्लेशियर, बाढ़ और भूस्खलन के पीछे क्या है बड़ी वजह
नेपाल में एक बार फिर आई अचानक बाढ़ ने बड़ी तबाही है। बूढ़ी गंडक नदी में आई बाढ़ में घर, पुल और सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही पांच लोग लापता बताए जा रहे हैं। इससे पहले अगस्त में आई अचानक आई बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई थी।
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रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2000 के बाद ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और पहाड़ों पर जमी बर्फ तेजी से कम हो रही है। ग्लेशियर पिघलने से नदियों में पानी बढ़ सकता है। साथ ही एक और खतरा पैदा होता है। ग्लेशियर के पास जमा पानी से बड़ी झीलें बन सकती हैं। अगर झीलों की प्राकृतिक दीवार टूट जाती है, तो बहुत कम समय में भारी मात्रा में पानी नीचे की तरफ बह सकता है। हालांकि, झील कितनी बड़ी है, खतरा इस पर निर्भर है।
कैसे ग्लेशियर के पास बनी झीले बनती हैं खतरा?
ग्लेशियर पिघलने पर उसका पानी जमा होता है। कई स्थानों पर पत्थरों और ग्लेशियर से आए मलबे की प्राकृतिक दीवार के पीछे रुक जाते हैं, जिन्हें ग्लेशियल झील कहा जाता है। लैंडस्लाइड से चट्टानें गिरने या बर्फ का बड़ा भाग झील में टूटकर गिरने से पानी में तेज लहर पैदा होती है, जिससे झील की दीवार टूट जाती है। इसके बाद पानी और मलबा तेजी से नीचे आता है। इस घटना को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है।
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नेपाल में बारिश भी बन रही तबाही की वजह
नेपाल में जून से सितंबर के बीच मॉनसून सक्रिय होता है। मॉनसून की बारिश खेती और नदियों के लिए जरूरी है। लेकिन कम समय में बहुत अधिक बारिश होती है, तो पानी लैंडस्लाइड और बाढ़ की वजह बनता है। नेपाल के मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारी बारिश की वजह से बाढ़ और लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है।
8 अक्तूबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 से 29 सितंबर 2024 के बीच भारी बारिश हुई थी, जिसमें कई इलाकों में कई इलाकों में बाढ़ और लैंडस्लाइड खतरा बढ़ गया। 24 घंटे में बारिश का नया रिकाॅर्ड स्थापित हुआ था। जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम पैटर्न में बदलाव हुआ है। हालांकि, बाढ़ की सिर्फ जलवायु परिवर्तन का नतीजा बताने के लिए वैज्ञानिक जांच की आवश्यकता है।
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ICIMOD का कहना है कि हिंदू कुश हिमालय का तापमान औसतन हर 10 साल में 0.28 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है। इसके कारण इस इलाके में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और नई झीलों के बनने से बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन ही हर आपदा की अकेली वजह नहीं है।