कनाडा के सूबे न्यूफाउंडलैंड के दक्षिणी-पूर्वी किनारे पर ऊबड़-खाबड़ चट्टानों वाला एक इलाका है। इसे मिसटेकेन प्वाइंट कहते हैं, क्योंकि इस जगह को बहुत से जहाजों ने गलती से वो समझा, जो वो नहीं था और इन चट्टानों से टकरा कर डूब गए। अब न्यूफाउंडलैंड की ये जगह एक और बहस के केंद्र में है। सवाल ये है कि हमारी धरती पर पेचीदा जीवों की उत्पत्ति कब और कैसे हुई थी?
धरती की वो रहस्यमय जगह, जहां 60 करोड़ साल पहले रहते थे अजीबोगरीब जीव
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इस समुद्र तट पर टहलते हुए फ्रैंकी डुन कहते हैं कि अगर आप इन चट्टानों के आस-पास टहलते हैं, तो आप देखेंगे कि इन की सतह पर हजारों जीवाश्म मौजूद हैं। फ्रैंकी डुन, ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में जीवाश्म वैज्ञानिक हैं। चट्टानों पर जमा ये जीवाश्म आज से करीब 57 करोड़ साल पुराने हैं। उसे धरती का एडिकरन कल्प कहा जाता है। ये जीव उस दौर में हो रहे ज्वालामुखी विस्फोट में जल कर भस्म हो गए थे और इन चट्टानों पर जीवाश्म के तौर पर दर्ज हो गए। आज ये उस दौर के कुदरती दस्तावेज के तौर पर दर्ज हैं।
फ्रैंकी डुन कहते हैं कि इन चट्टानों के बीच चलते हुए आपको पॉम्पेई शहर में होने का अहसास होता है। इटली का पॉम्पेई शहर ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से भस्म हो गया था। लावा ने इतनी तेजी से शहर पर धावा बोला था कि लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिला था। जो जहां था, वहीं भस्मीभूत हो गया था। आज भी इस शहर में लोगों के जीवाश्म वैसी हालत में मिलते हैं, जिस हाल में लावे ने उन्हें लील लिया था।
न्यूफाउंडलैंड के तट पर मिलने वाले एडिकरन कल्प के जीवाश्म हमारी धरती के इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। इन जीवों से पहले के करीब चार अरब वर्षों तक समंदर में केवल एक कोशिका वाले जीव ही आबाद थे। एडिकरन कल्प में अचानक बहुकोशिकीय जीवों का उद्भव धरती पर हुआ था और ये बड़े विचित्र किस्म के जीव थे। आज इनके जैसा कोई जीव धरती पर नहीं दिखता। इनका आकार अजब तरह का है। कोई छोटी पत्तियों जैसे दिखते थे। कोई झाड़ी जैसे, तो कोई पत्ता गोभी के आकार का था। किसी की सूरत तकिए जैसी तो किसी की ऐसी की बताई ही न जा सके।
अमेरिका की वांडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के जीवाश्म वैज्ञानिक साइमन डैरोच कहते हैं, 'एडिकरन कल्प के ज्यादातर जीव केंचुओं या किसी अन्य चिपचिपे जीव जैसे थे। उस वक्त तक जीवों में कंकाल विकसित नहीं हुआ था।' इन जीवाश्मों के चलते, धरती पर जीवन के विकास की पहेली सुलझी भी है, तो उलझी भी है। साइमन डैरोच कहते हैं कि, 'एडिकरन कल्प के जीव आज से एकदम अलग थे।'