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क्या चींटियों को खाने से बढ़ जाती है इंसान की उम्र? जानिए सच्चाई

Fri, 02 Oct 2026 11:25 AM IST
सोनिया चौहान फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: सोनिया चौहान Updated Fri, 02 Oct 2026 11:25 AM IST
सार

दुनिया के कई देशों में लोग चींटियां खाते हैं। अब इसकी पहचान स्थानीय व्यंजन की जगह पौष्टिक खाने के तौर हो चुकी है। कई लोग दावा करते हैं कि चीटियों के खाने से उम्र बढ़ती है। आइए जानते हैं कि आखिर यह कितना सच है। 

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Can eating ants increase our age find out how much truth there is to this
चींटियां खाने से बढ़ती है उम्र? - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

चींटियां खाने से बढ़ती है उम्र? कोलंबिया के एंडीज पहाड़ों पर बसे औपनिवेशिक शहर बारिचरा में साल का सबसे अहम दिन क्रिसमस, नया साल या ईस्टर का नहीं होता। यहां साल के सबसे अहम दिन को स्थानीय लोग 'ला सैलिडा' कहते हैं, जिसका अर्थ होता है बाहर निकलना। इस दिन बारिचरा की गलियों में कुछ होने की आशा बढ़ जाती है। गलियां बुहारने वाले और घरों में साफ-सफाई करने वाले लोग अपना काम बंद कर देते हैं। बच्चे स्कूल से बाहर निकल आते हैं और दुकानदार दुकान छोड़कर गायब हो जाते हैं। ये सभी लोग बेशकीमती "होर्मिगस कुलोनस" या "बड़ी चींटी" की तलाश में रहते हैं जिनको उत्तर-मध्य कोलंबिया के सांटेंडर इलाके में कैवियार (मछली के बेशकीमती अंडे) समझा जाता है।

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हर साल वसंत में आसपास के देहाती इलाकों से ऐसी लाखों चींटियां पकड़ी जाती हैं। मनोवैज्ञानिक से शेफ बनी मार्गेरिटा हिगुएरा 2000 से बारिचरा में रह रही हैं। वह कहती हैं, "इसमें पहले आओ पहले पाओ चलता है। अगर आपने किसी चींटी के घोंसले के ऊपर अपनी बाल्टी रख दी तो वह आपका हुआ, भले ही जमीन आपकी हो या न हो।"

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हर साल मार्च या अप्रैल में यह उत्सव तब होता है, जब भारी बारिश के बाद तेज धूप निकली हो और रात में चांदनी बिखरी हो। ला सैलिडा से चींटियों का सालाना प्रजनन मौसम शुरू होता है जो दो महीने तक जारी रह सकता है। इसी दौरान स्थानीय लोग ज्यादा से ज्यादा रानी चींटियों को पकड़ने के लिए छीना-छपटी करते हैं। अंडों से भरी हुई और प्रजनन के लिए तैयार भूरी, कॉकरोच के आकार की रानी चींटियां किसी ट्रॉफी की तरह होती हैं। उनका पिछला हिस्सा फूलकर मटर के दाने जैसा होता है। इसे नमक मिलाकर भूनने से यह मूंगफली, पॉपकॉर्न या खस्ते बेकन जैसा लजीज हो जाता है। 

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रानी चींटियों को लजीज पकवान की तरह खाया जाता है। सड़क किनारे की कुछ दुकानों में उनको तैयार किया जाता है। कामकाजी परिवारों की रसोइयों में उनको भूना जाता है और वे पूरे कोलंबिया के महंगे रेस्तरां के मेन्यू में भी शामिल हैं। एक किलो रानी चींटियों के बदले तीन लाख पेसो (65 पाउंड) मिल सकते हैं। इस तरह ये कोलंबिया के मशहूर कॉफी से भी महंगे हैं। लेकिन यह मुश्किल काम है। चींटियां रानी चींटी को आसानी से ले जाने नहीं देतीं।

स्थानीय लोगों के लिए ये कमाई के अच्छे स्रोत हैं।  यह काम टखने की ऊंचाई तक के रबर बूट और लंबी आस्तीन पहनकर किया जाता है। काम तेजी से निपटाना पड़ता है वरना रानी की सुरक्षा के लिए तैनात कॉलोनी की सैनिक चीटिंयां हमला कर देती हैं। उनके काटने से तीखा दर्द होता है और खून बाहर आ सकता है। गांव वाले खेतों में फैल जाते हैं और उनके पास जो भी हो- थैला, मग, बरतन या बोरा, उसमें रानी चींटियों को जमा करते जाते हैं। यह काम दिन में होता है, जबकि उनका लजीज पकवान रात के भोजन में खाया जाता है।



हाल के वर्षों में, चींटियों के खाने की लोकप्रियता बढ़ी है। इनकी पहचान अब स्थानीय व्यंजन की जगह पौष्टिक खाने की हो गई है। ग्राहकों की मांग पूरी करने के लिए हर साल ट्रकों में भरकर रानी चींटिंयां पूरे कोलंबिया में भेजी जाती हैं। राजधानी बगोटा के महंगे रेस्तरां के सीजनल मेन्यू में भी उनको शामिल किया गया है। जैसे- मिनी-माल, जिसमें चींटियों को अमेजॉन की पिरारुकु मछली के साथ परोसा जाता है या भुने हुए बीफ के साथ काली मिर्च और चींटियों की चटनी दी जाती है। शेफ एडुआर्डो मार्टिनेज कहते हैं, "चींटियां कोलंबिया के खानपान का अहम हिस्सा हैं।"

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एटा लाविगाटा प्रजाति की चींटियां दक्षिण अमरीका की लीफकटर चींटिंयों के नाम से भी जानी जाती हैं। उनमें भरपूर प्रोटीन होता है, साथ ही ये अनसैचुरेटेड फैटी एसिड से भरी होती हैं जो कोलेस्ट्रोल को बढ़ने नहीं देता। "फ्रंटियर्स इन न्यूट्रिशन" जर्नल में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि चींटियों में एंटी-ऑक्सीडेंट होता है और उनको नियमित रूप से खाने से कैंसर रोकने में मदद मिल सकती है। "यही वजह है कि बारिचरा के लोग लंबी और सेहतमंद जिंदगी जीते हैं"। 

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