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इंदिरा आवास के लिए बहन को बनाया बीवी
पटना/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 07 Dec 2012 12:03 PM IST
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गरीबी रेखा के नीचे जीवन गुजर-बसर करने वाले लोगों को आशियाना उपलब्ध कराने की सरकार की महत्वाकांक्षी इंदिरा आवास योजना में अब रिश्तों के भी कोई मायने नहीं रहे। लोगों का नैतिक पतन इस कदर हो गया है कि सरकारी राशि को हजम करने में किसी भी स्तर पर गिरने को तैयार हैं।
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योजना में भगवानपुर प्रखंड के मझौली महम्मदपुर पंचायत में कागज पर बहन को बीवी बनाकर रुपये हड़प लेने का एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है। फर्जी नाम पर रुपये उठाने के मामले तो प्रकाश में आते रहते हैं लेकिन कागज पर बहन को बीवी बनाकर रुपये उठा लेने के मामले ने पूरी व्यवस्था को ही सोचने पर विवश कर दिया है। आखिर संबंधों को भी दरकिनार करके लाभुक लाभ पाने के लिए रिश्तों की लक्ष्मण रेखा को भी पार करने से परहेज नहीं कर रहे हैं। मझौली महम्मदपुर पंचायत में बहन को अपनी बीवी बनाकर इंदिरा आवास लेने का मामला प्रकाश में आया है।
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मझौली महम्मदपुर गांव के ही शिवचन्द्र पासवान ने अपनी सगी बहन को बीवी बनाकर विकास मित्र के मेल से इंदिरा आवास की राशि का उठाव कर लिया है। इसका खुलासा करते हुए पंचायत समिति सदस्या अनीता देवी ने बीडीओ को आवेदन देते हुए जांच कर दोषी पर कार्रवाई करने तथा सरकारी राशि के दुरूपयोग पर रोक लगाने की मांग की है। आवेदन में यह भी लिखा गया है कि यदि सही रूप से जांच की जाए तो पंचायत ही नहीं प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में इंदिरा आवास में बड़े पैमाने पर घोटाले पकड़े जाएंगे।
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इस बाबत पूछे जाने पर हालांकि आरोपी इस बात से साफ तौर पर इंकार करते हैं और इसे साजिश करार देते हैं। इस मामले में पंचायत के मुखिया धर्मेन्द्र भारती कहते हैं कि गलती हुई है लेकिन इसकी जानकारी उन्हें सबकुछ होने के बाद हुई है। वे कहते हैं कि इसकी जानकारी जैसे ही उन्हें हुई, उन्होंने तुरंत बीडीओ को सूचित किया है। इस बीच प्रखंड के बीडीओ से पूछने की कोशिश की गयी लेकिन साफ तौर पर उन्होंने कुछ कहने से इंकार करते हुए जांच की बात कहकर फिलहाल इस मामले को टाल दिया।
इस मामले में हालांकि सूत्र बताते हैं कि प्रखंड क्षेत्र में इंदिरा आवास आवंटन में व्यापक गड़बड़ी हुई है। जमकर रुपयों का लेन-देन चला है और नियमों को ताक पर रखकर आवासों का आवंटन किया गया है। पंचायत से लेकर प्रखंड तक पूरा नेटवर्क इस गड़बड़ी में संलिप्त है। कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं। हालांकि दावा यह है कि अगर पूरे प्रखंड क्षेत्र में इंदिरा आवास आवंटन की निष्पक्ष जांच करा ली जाए तो न सिर्फ दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा बल्कि सभी के दोहरे चरित्र की भी कलई खुल जाएगी।