फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Upendra Kushwaha reached Patna, said- NDA is united in Bihar and will remain

उपेंद्र कुशवाहा ने महाभोज से बनाई दूरी, अब बोले- बिहार में एनडीए एकजुट है और रहेगा

Fri, 08 Jun 2018 11:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Updated Fri, 08 Jun 2018 11:50 AM IST
विज्ञापन
 Upendra Kushwaha reached Patna, said- NDA is united  in Bihar and will remain
उपेंद्र कुशवाहा - फोटो : ANI
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा इन दिनों बिहार की राजनीति के 'हॉट केक' बन गए हैं। आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीटों के बंटवारे को लेकर सभी पार्टियों में मंथन चल रहा है। वहीं बृहस्पतिवार को एनडीए भोज में शामिल नहीं होने के कारण एक बार फिर चर्चा को गर्मा दिया है। 
विज्ञापन


आज तड़के पटना पहुंच कर उपेंद्र कुशवाहा ने उनके एनडीए गठबंधन से अलग होने की उठ रही अफवाहों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि कल फ्लाइट छूटने की वजह से वह भोज में शामिल नहीं हो पाए। लेकिन उनके भोज में शामिल नहीं होने को इतना बड़ा मामला क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोज में सिर्फ मैं ही नही बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अमित शाह भी शामिल नहीं हुए, उनसे कितने लोगों ने सवाल किया है।  यही नहीं कुशवाहा ने मीडिया के सवालों से बचने के लिए कहा कि बिहार में एनडीए एकजुट है और रहेगा। 
विज्ञापन


वैसे राजनीति के जानकार उपेंद्र कुशवाहा की पूरी राजनीति को कुर्सी की चाल मान रहे हैं। माना ये भी जा रहा है कि उपेंद्र अपने दोनों हाथों में लड्डू रखना चाहते हैं।  वहीं जानकार यह भी मान रहे हैं कि जबसे जदयू भाजपा के करीब हुई है कुशवाहा लालू यादव के करीब होते जा रहे हैं। माना ये भी जा रहा है कि लालू यादव जब एम्स में भर्ती थे तब उपेंद्र कुशवाहा उनसे मिलने गए थे और तभी लालू यादव ने उन्हें महागठबंधन सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाने का लालच दिया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


राजग में खटपट की गुत्थी सुलझाने के क्रम में शिवसेना को मनाने में जुटी भाजपा की राह बिहार में भी आसान नहीं नजर आ रही है। जिस तरह से जदयू  25:15 के पुराने फार्मूले का राग अलाप रही है उससे साफ नजर आ रहा है कि भाजपा के लिए 2019 का लोकसभा चुनाव किसी भी हाल में आसान नहीं होगा। भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि आगामी लोकसभा चुनाव में उसके पास जदयू को देने के लिए बहुत ज्यादा नहीं है। जबकि लोजपा और रालोसपा को डर है कि जदयू को साधने के चक्कर में भाजपा उनकी सीटों की संख्या घटा सकती है।
 
दरअसल बीते लोकसभा में जदयू राजग में नहीं थी। उस दौरान भाजपा 30, लोजपा 7 और रालोसपा 3 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। राजग को कुल 31 सीटें (भाजपा 22, लोजपा 6 और रालोसपा 3) हासिल हुई थी। भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि न तो वह खुद और न ही दोनों सहयोगी जीती सीटों से कम पर मानने केलिए तैयार हैं। पार्टी को ओर से दबाव बनाने से पहले लोजपा ने जहां 7 सीटों पर दावा जता दिया है तो वहीं रालोसपा ने संदेश दिया है कि इस बार वह तीन सीटों पर नहीं मानेगी। जाहिर तौर पर इस परिस्थिति में अगर तीनों दल अपनी जीती सीटों पर भी मान गए तो जदयू को लडने के लिए महज 9 सीटें मिलेंगी। इनमें से ज्यादातर ऐसी सीटें हैं जहां राजद का व्यापक प्रभाव है। 


इस मामले में बिहार में भाजपा दो धड़े में बंट गई है। डिप्टी सीएम सुशील मोदी खेमा लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के लिए जदयू के लिए त्याग करने की सलाह दे रहा है। जबकि मोदी विरोधी धड़े का कहना है कि नीतीश को ज्यादा भाव देना ठीक नहीं। मोदी विरोधी एक नेता ने कहा कि इस समय नीतीश के पास कोई चारा नहीं है। जदयू-राजद की दोस्ती असंभव है। फिर भी अगर नीतीश ने राजग से हटने का निर्णय लिया तो लड़ाई त्रिकोणात्मक होगी और इसका सबसे अधिक लाभ भाजपा को होगा। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed