फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   two girls fraud by her mother again and again

ये हैं वो दो बेटियां, जिन्हें हर कदम पर धोखा देती रही मां

Tue, 19 May 2015 08:34 AM IST
Updated Tue, 19 May 2015 08:34 AM IST
विज्ञापन
two girls fraud by her mother again and again

कितना डरावना होता है ऐसे बच्चों से मिलना जो अपनी माँ से नफ़रत करते हों। पटना की दो बच्चियों को भी अपनी माँ से नफ़रत है। सामान्य दिखने वाली इन लड़कियों के दिलो दिमाग में ढेरों उलझने हैं। रिमझिम और अंजलि के जीवन की दुश्वारियां अमिताभ बच्चन की मदद के बाद भी ख़त्म नहीं हुईं।

विज्ञापन


ये सिलसिला शुरू होता है अक्तूबर 2006 से। मुजफ्फरपुर की शिखा पांडे ने अपनी दोनों बेटियों का दाखिला पटना के कदमकुआं स्थित स्कूल शांति निकेतन में कराया। स्कूल में हॉस्टल भी था और बच्चियों को वहीं रखा गया।
विज्ञापन


स्कूल के प्रिंसिपल अवनिश्वर सिंह बताते हैं, “सब कुछ सामान्य बच्चों के दाखिले की तरह ही था। शिखा आईं, फीस भरी और जल्द आने की बात कहकर चली गईं। लेकिन एक साल बीत गया, वो दोबारा अपनी बच्चियों से मिलने नहीं आईं।”

विज्ञापन
विज्ञापन

अमिताभ बच्चन की दी मदद भी डकार गई मां

two girls fraud by her mother again and again

परेशान स्कूल प्रशासन ने अख़बार वालों को इस बारे में बताया। ख़बर छपी, लेकिन बच्चियों को देखने कोई नहीं आया। इस बीच एक टीवी चैनल ने इन दोनों बहनों की ख़बर को प्रमुखता से प्रसारित किया। जब ये ख़बर आई तो माँ शिखा पांडे सामने आईं। उन्होंने कहा कि ठेकेदार पति अशोक पांडे के जेल चले जाने के कारण वो सामने नहीं आ रही थीं।

जनवरी 2008 में बाराबंकी में अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन के नाम पर कॉलेज खोलने के समारोह में अमिताभ बच्चन, जया प्रदा, ऐश्वर्या राय, अमर सिंह जुटे। रिमझिम रिमझिम को अपनी मां से सिर्फ शिकायतें ही हैं।

अवनिश्वर सिंह बताते हैं, “इसी समारोह में अमिताभ बच्चन ने सवा–सवा लाख का चेक दोनों बहनों के लिए माँ शिखा पांडे को दिया और घोषणा की कि वो 10 लाख रुपए पढ़ाई के लिए भविष्य में देंगें। चेक लेने के बाद शिखा वापस नहीं आईं..."

पंद्रह साल की रिमझिम बताती हैं, “माँ जब साथ में बाराबंकी गईं तो एक जगह मुझे बाथरूम जाना था। मैने उनसे कहा तो उन्होंने डांटते हुए कहा चुप रहो वर्ना चप्पल से मारेंगे।” इस बीच रिमझिम को मिर्गी के दौरे आने लगे। बच्चियों की बढ़ती जिम्मेदारियों से परेशान अवनिश्वर ने सितंबर 2013 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दरवाजा खटखटाया। वहां से भी महज 12,000 रुपए की मदद मिली।

'छुट्टियों में, त्योहार में मदद मांगते हैं'

two girls fraud by her mother again and again

माता-पिता की बेरुखी के बाद अंजलि अपने भविष्य को लेकर पूरी तरह निराश है। मदद के लिए दरवाजा खटखटाते-खटखटाते ये बच्चियाँ भी थक चुकी हैं। तेरह साल की अंजलि कहती हैं, “हम बस मदद मांगते रहते हैं।

छुट्टियों में, त्यौहार में सब बच्चे माँ पापा के साथ घर चले जाते हैं और हम यहीं अंकल आंटी के पास रह जाते हैं।” अंजलि कहती हैं, “मैं अपनी माँ के साथ नहीं जाऊंगी, वो मुझे फिर से छोड़ देंगी।”

शांति निकेतन में आठवीं तक ही पढ़ाई होती है। रिमझिम और अंजलि अभी चौथी कक्षा में पढ़ती हैं। ऐसे में उनकी पढ़ाई और आगे की ज़िंदगी की चिंता स्कूल प्रशासन को परेशान करती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed