ये हैं वो दो बेटियां, जिन्हें हर कदम पर धोखा देती रही मां
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कितना डरावना होता है ऐसे बच्चों से मिलना जो अपनी माँ से नफ़रत करते हों। पटना की दो बच्चियों को भी अपनी माँ से नफ़रत है। सामान्य दिखने वाली इन लड़कियों के दिलो दिमाग में ढेरों उलझने हैं। रिमझिम और अंजलि के जीवन की दुश्वारियां अमिताभ बच्चन की मदद के बाद भी ख़त्म नहीं हुईं।
ये सिलसिला शुरू होता है अक्तूबर 2006 से। मुजफ्फरपुर की शिखा पांडे ने अपनी दोनों बेटियों का दाखिला पटना के कदमकुआं स्थित स्कूल शांति निकेतन में कराया। स्कूल में हॉस्टल भी था और बच्चियों को वहीं रखा गया।
स्कूल के प्रिंसिपल अवनिश्वर सिंह बताते हैं, “सब कुछ सामान्य बच्चों के दाखिले की तरह ही था। शिखा आईं, फीस भरी और जल्द आने की बात कहकर चली गईं। लेकिन एक साल बीत गया, वो दोबारा अपनी बच्चियों से मिलने नहीं आईं।”
अमिताभ बच्चन की दी मदद भी डकार गई मां
परेशान स्कूल प्रशासन ने अख़बार वालों को इस बारे में बताया। ख़बर छपी, लेकिन बच्चियों को देखने कोई नहीं आया। इस बीच एक टीवी चैनल ने इन दोनों बहनों की ख़बर को प्रमुखता से प्रसारित किया। जब ये ख़बर आई तो माँ शिखा पांडे सामने आईं। उन्होंने कहा कि ठेकेदार पति अशोक पांडे के जेल चले जाने के कारण वो सामने नहीं आ रही थीं।
जनवरी 2008 में बाराबंकी में अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन के नाम पर कॉलेज खोलने के समारोह में अमिताभ बच्चन, जया प्रदा, ऐश्वर्या राय, अमर सिंह जुटे। रिमझिम रिमझिम को अपनी मां से सिर्फ शिकायतें ही हैं।
अवनिश्वर सिंह बताते हैं, “इसी समारोह में अमिताभ बच्चन ने सवा–सवा लाख का चेक दोनों बहनों के लिए माँ शिखा पांडे को दिया और घोषणा की कि वो 10 लाख रुपए पढ़ाई के लिए भविष्य में देंगें। चेक लेने के बाद शिखा वापस नहीं आईं..."
पंद्रह साल की रिमझिम बताती हैं, “माँ जब साथ में बाराबंकी गईं तो एक जगह मुझे बाथरूम जाना था। मैने उनसे कहा तो उन्होंने डांटते हुए कहा चुप रहो वर्ना चप्पल से मारेंगे।” इस बीच रिमझिम को मिर्गी के दौरे आने लगे। बच्चियों की बढ़ती जिम्मेदारियों से परेशान अवनिश्वर ने सितंबर 2013 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दरवाजा खटखटाया। वहां से भी महज 12,000 रुपए की मदद मिली।
'छुट्टियों में, त्योहार में मदद मांगते हैं'
माता-पिता की बेरुखी के बाद अंजलि अपने भविष्य को लेकर पूरी तरह निराश है। मदद के लिए दरवाजा खटखटाते-खटखटाते ये बच्चियाँ भी थक चुकी हैं। तेरह साल की अंजलि कहती हैं, “हम बस मदद मांगते रहते हैं।
छुट्टियों में, त्यौहार में सब बच्चे माँ पापा के साथ घर चले जाते हैं और हम यहीं अंकल आंटी के पास रह जाते हैं।” अंजलि कहती हैं, “मैं अपनी माँ के साथ नहीं जाऊंगी, वो मुझे फिर से छोड़ देंगी।”
शांति निकेतन में आठवीं तक ही पढ़ाई होती है। रिमझिम और अंजलि अभी चौथी कक्षा में पढ़ती हैं। ऐसे में उनकी पढ़ाई और आगे की ज़िंदगी की चिंता स्कूल प्रशासन को परेशान करती है।