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बेटे का शव ले जाने के लिए नहीं मिली एंबुलेंस तो पालीथिन में भरकर घर लाया परिवार

Wed, 28 Sep 2016 01:06 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 28 Sep 2016 01:06 PM IST
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Three people carry dead body of relative in plastic bag
- फोटो : ANI

पत्नी के शव को कंधे पर ढोते दाना मांझी और बेटे के शव को लेकर कानपुर के सरकारी अस्पताल में धक्के खाते पिता की तस्वीरें अभी आपके जेहन से उतरी भी नहीं होंगी की ऐसी ही हृदयविदारक तस्वीरें सामने आई हैं बिहार के कटिहार से। 

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जहां एक व्यक्ति की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने एंबुलेंस देने में हाथ खड़े कर दिए। जबकि कई दिनों से पानी में डूबा रहने के कारण शव बुरी तरह गल चुका था नतीजतन पीड़ित परिवार को पालीथिन में समेटकर उसके शव को घर ले जाना पड़ा जहां उसका अंतिम संस्कार किया गया।
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जानकारी के अनुसार मामला बिहार के कटिहार जिले का है, जहां दो हफ्ते पहले एक व्यक्ति की गंगा में डूबने से मौत हो गई थी।

अस्पताल ने बिना पोस्टमार्टम के ही लौटा दिया शव

Three people carry dead body of relative in plastic bag

उसके रिश्तेदारों ने बताया कि हम शव का पोस्टमार्टम कराना चाहते ‌थे इसलिए उसे कटिहार हॉस्पिटल ले गए। शुरू में अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि उसका पोस्टमार्टम यहीं हो जाएगा लेकिन 24 घंटे बीतने के बाद भी उन्होंने पोस्टमार्टम नहीं किया। 

पूछने पर उन्होंने कहा इसे भागलपुर के सरकारी अस्पताल ले जाओ। हमने उनसे कहा कि हमारे पास एंबुलेंस के लिए पैसे नहीं हैं। हमने उनसे ही एंबुलेंस देने की गुहार लगाई लेकिन अस्पताल कर्मियों ने हमारी एक नहीं सुनी। 

मृतक के दादा ने कहा हम गरीब आदमी हैं हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि उसे एंबुलेंस से भागलपुर ले जा पाते। इसलिए उसके शव को पालीथिन में भरकर ही वापस घर ले आए। जहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

विधवा बेटियों के पास नहीं ‌थे पैसे, छत की लकड़ियों से किया मां का अंतिम संस्कार

Three people carry dead body of relative in plastic bag
body - फोटो : ANI

ओडिशा से भी एक ऐसा ही मामला सामने आ रहा है जहां पैसे न होने के कारण विधवा बेटियों का मां का अंतिम संस्कार करने के लिए घर की छत तोड़कर लकड़ियां निकाली पड़ी। इसके बाद ही मां का अंतिम संस्कार किया जा सका। 

जानकारी के अनुसार मामला ओडिसा के कालाहांडी के डोकरीपाड़ा गांव का है, यहां सतपथी नाम की 80 वर्षीया वृद्धा इधर उधर मांगकर अपना गुजारा करती थी। बताया जाता है कि शुक्रवार रात वृद्धा की मौत हो गई। उनकी विधवा बेटियों ने मां के अंतिम संस्कार के लिए गांव वालों से मदद की गुहार लगाई लेकिन किसी ने उनकी फरियाद नहीं सुनी।

मां की लाश घर में पड़ी थी और बेटियों के पास कोई सहारा नहीं था नतीजतन बेबस बेटियों ने अपने कच्चे मकान की छत तोड़ी और उसमें से लकड़ियां निकालकर शव के अंतिम संस्कार का इंतजाम किया। हैरत की बात ये रही कि इस दौरान शव को कांधा देने भी कोई सामने नहीं आया। इसके बाद तीनों बेटियां मां के शव को चारपाई पर रखकर ही शमशान घाट के लिए ले चल दीं और श्‍ाव का अंतिम संस्कार किया।

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