तीन साल से वेतन को तरस रहे शिक्षक

पटना/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 30 Oct 2012 04:11 PM IST
teachers did not get salary from 2009
लगभग तीन सालों से वेतन का इंतजार कर रहे कॉलेजों के शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों का इंतजार खत्म होता नजर नहीं आता। उनकी समस्या पहले जैसी ही बनी हुई है। चतुर्थ चरण के नव अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों के वेतन का भुगतान व समंजन पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जबकि शिक्षा विभाग ने सभी 28 नव अंगीभूत कॉलेजों के एक-एक कर्मी की नियुक्त का रिकॉर्ड पिछली मई में मंगाया था।

विभाग ने इन कॉलेजों के करीब 400 शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों का वेतन वर्ष 2009 से बंद कर दिया है। जबकि, ये कर्मी 25 वर्षों से कार्यरत हैं। मगध विवि में आठ, बीएन मंडल विवि में दो, तिलकामांझी विवि में पांच, वीर कुंवर सिंह विवि में तीन, बीआरए विवि में चार व एलएनएम विवि में छह नवअंगीभूत कॉलेज हैं।

कॉलेज व विभाग के पदाधिकारियों के समक्ष सभी रिकॉर्ड की जांच होने के बाद भी फैसला नहीं दिया गया है। जांच में हेरफेर से बचने के लिए जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई थी। रिकॉर्ड में किस कर्मी की नियुक्ति कब हुई, कितने दिनों तक उन्हें वेतन मिला, किसकी नियुक्ति स्वीकृत पदों पर हुई थी, जस्टिस अग्रवाल कमीशन ने किन्हें किस कोटि में रखा था आदि जानकारियां शामिल हैं। विभाग ने इस रिकॉर्ड की समीक्षा कर अंतिम निर्णय लेने की बात कही थी। लेकिन, अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। इस संबंध में विभाग के पदाधिकारी कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं।

जस्टिस एससी अग्रवाल कमीशन ने चतुर्थ चरण के कॉलेजों के शिक्षकों व कर्मियों को चार कोटियों में बांटा है - एस, आर-वन, आर-टू व एनआर। कमीशन ने 30 अप्रैल, 1986 को कट ऑफ डेट माना था। इस तिथि के बाद रिकमेंडेंट पद को ‘आर-2’ व बिना रिकमेंडेंट पद को ‘एनआर’ कोटि माना। इन दोनों कोटि के शिक्षकों व कर्मियों का वेतन बंद हुआ था। आर-वन व ‘एस’ कोटि के पद को सही माना था।

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