{"_id":"652b5f58b411119bb60ef576","slug":"shardiya-navratri-worship-of-maa-shailputri-today-bihar-immersed-in-devotion-to-shakti-patna-durga-puja-2023-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shardiya Navratri: आज मां शैलपुत्री की पूजा, शक्ति की आराधना कर रहे बिहारवासी; जानिए, कब है सर्वोत्तम मुहूर्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shardiya Navratri: आज मां शैलपुत्री की पूजा, शक्ति की आराधना कर रहे बिहारवासी; जानिए, कब है सर्वोत्तम मुहूर्त
Sun, 15 Oct 2023 09:11 AM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Sun, 15 Oct 2023 09:11 AM IST
सार
इस बार शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर पधारेंगी। यह एक शुभ संकेत है। इस वर्ष सर्वत्र संपन्नता रहेगी और देश में अच्छी वर्षा होने की भी सम्भावना है।
विज्ञापन
Shardiya Navratri 2023 Calendar
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आज से बिहारवासी मां शक्ति की भक्ति में रम गए हैं। पहले दिन कलश स्थापित कर श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करेंगे। इस साल अंग्रेजी की तिथि से पंचांग की तिथि मेल खा रही है। तिथियों की हानि नहीं होने पर इस बार नौ दिनों तक मां के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा होने वाली है। यानी नवरात्र 23 अक्टूबर तक रहेगा। 24 अक्टूबर को विजया दशमी होगी। आज पहले दिन श्रद्धालु मां शैलपुत्री की पूजा कर रहे हैं। कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा हो रही है।
विज्ञापन
जानिए, कितने से कितने बजे तक मुहूर्त
पंडितों के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 14 अक्तूबर, शनिवार की रात 11:26 मिनट से प्रारंभ होकर 15 अक्तूबर को देर रात 12:33 मिनट पर समाप्त हो रही है। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग हो तो उस समय कलश स्थापना नहीं की जा सकती, लेकिन शास्त्रों के अनुसार चित्रा नक्षत्र के तीसरे चरण से चौथे चरण तक कलश स्थापना की जा सकती है। पंडितों के अनुसार, कलश स्थापना रविवार को सूर्योदल के बाद से पूर दिन किया जा सकता है लेकिन आज पूजा के लिए सर्वोत्त मुहूर्त सुबह 11:36 से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक है।
विज्ञापन
हाथी पर सवार होकर आ रही हैं माता रानी
इस बार शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर पधारेंगी। यह एक शुभ संकेत है। इस वर्ष सर्वत्र संपन्नता रहेगी और देश में अच्छी वर्षा होने की भी सम्भावना है। देवी भागवत पुराण के अनुसार जिस वर्ष माता हाथी पर सवार होकर आती है, उस वर्ष सुख-समृद्धि और धन लाती हैं। उस साल अच्छी खेती के भी संकेत रहते हैं।
विज्ञापन
जानिए, कलश स्थापना की पूजा विधि
- नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- एक चौकी बिछाकर वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं।
- रोली और अक्षत से टीका करें और फिर वहां माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- विधि विधान से माता की पूजा करें।
- इस बात का ध्यान रखें कि कलश हमेशा उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में स्थापित करें।
- कलश के मुंह पर चारों तरफ अशोक के पत्ते लगाकर नारियल पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांध दें।
- अब मां दुर्गा का आह्वान करें और दीपक जलाकर पूजा करें।