Amit Shah Bihar Visit : किशनगंज में SSB की पांच चौकियों का उद्घाटन, शाह ने की सीमा सुरक्षा की समीक्षा
माना जा रहा है कि वरिष्ठ भाजपा नेता 2024 के आम चुनाव की तैयारियों के लिए सीमांचल जैसे संवेदनशील इलाके के दौरे पर हैं। आज किशनगंज के प्रसिद्ध बूढ़ी काली मंदिर में पूजा से दिन की शुरुआत की।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने दो दिनी बिहार दौरे के दूसरे दिन किशनगंज में कई कार्यक्रमों में शिरकत की। शाह ने दिन की शुरुआत शहर में सांप्रदायिक सौहार्द के लिए प्रसिद्ध ‘बूढ़ी काली मंदिर‘ में पूजा से की। इसके बाद वे भाजपा नेताओं की बैठक में शामिल हुए। एसएसबी की पांच सीमा रक्षा चौकियों का उद्धाटन किया और फिर एसएसबी, बीएसएफ व आईटीबीपी के महानिदेशकों की बैठक में सीमा के हालात की समीक्षा की। शाह ने चौकियों के उद्घाटन कार्यक्रम में नेपाल-भूटान से सटी खुली सीमा के खतरे बताए।
शाह ने सीमा सशस्त्र बल के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में बैठकर कोई सोचता है कि आपका सबसे आसान काम है, हमारे दोनों देशों नेपाल और भूटान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। लेकिन जब कोई सीमा पर आता है तो उसे पता चलता है कि आपकी सबसे कठिन ड्यूटी है। यह एक खुली सीमा है। उन्होंने कहा कि खुली सीमा हो तो जिम्मेदारी बढ़ जाती है। रिश्ते कितने भी दोस्ताना हों, भले ही पड़ोसी देशों के इरादे गलत न हों, लेकिन समाज में कुछ ऐसे तत्व हैं जो अनधिकृत कमाई के लिए खुली सीमाओं का इस्तेमाल करते हैं। चाहे वह तस्करी, पशु तस्करी या घुसपैठ हो।
Sitting in Delhi, one thinks you've the easiest duty as we've friendly relations with both nations (Nepal & Bhutan). But when one comes to the border, he realises that you hav toughest duty as it's an open border: HM at inauguration of 5 border chowkis of SSB, in Kishanganj,Bihar pic.twitter.com/GBt2wYRWHN
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) September 24, 2022
बिहार व झारखंड में नक्सवाद खत्म: शाह
शाह ने कहा कि एसएसबी के जवानों ने पूर्वोत्तर में नक्सलवाद के खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ी है। इसके कारण बिहार और झारखंड क्षेत्रों में नक्सलवाद समाप्त होने के कगार पर है। हम यह भी कह सकते हैं कि यह यहां समाप्त हो गया है।
Bihar | Union Home Minister Amit Shah reviewing the border security with DGs of SSB, BSF and ITBP in Kishanganj pic.twitter.com/OFsktUM9U4
— ANI (@ANI) September 24, 2022
माना जा रहा है कि वरिष्ठ भाजपा नेता शाह 2024 के आम चुनाव की तैयारियों के लिए सीमांचल जैसे संवेदनशील इलाके के दौरे पर हैं। शाह ने किशनगंज के प्रसिद्ध बूढ़ी काली मंदिर में पूजा से दिन की शुरुआत की। बूढ़ी काली मंदिर लंबे समय से हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता रहा है। किशनगंज में 50 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। शाह ने शुक्रवार रात यहीं बिताई थी।
नवाब ने दान की थी मंदिर की जमीन
भाजपा की बिहार इकाई ने शाह का मंदिर में आरती करते हुए और पुजारियों से आशीर्वाद लेते हुए एक वीडियो साझा किया है। इसके बारे में कहा जाता है कि यह 100 साल से अधिक पुराना है और एक मुस्लिम नवाब द्वारा दान की गई भूमि पर बनाया गया है। गृह मंत्री शाह दो दिनी बिहार यात्रा पर शुक्रवार दोपहर पूर्णिया जिले में पहुंचे थे। उन्होंने भाजपा की रैली के साथ यात्रा शुरू की थी और शाम को किशनगंज पहुंचे और राज्य के विधायकों, सांसदों और अन्य पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठक की।
Bihar | Union Home Minister Amit Shah offers prayers at a temple in Kishanganj pic.twitter.com/3hvEzWc4G1
— ANI (@ANI) September 24, 2022
नीतीश और लालू पर बोला था हमला
इससे पहले कल अमित शाह ने पूर्णिया में लालू यादव व नीतीश कुमार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने लालू यादव को नसीहत दी कि कहीं नीतीश कुमार फिर से पाला न बदल लें। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिहार में जंगलराज वापस लौट आया है, आने वाले चुनाव में बिहार में भाजपा की सरकार बनेगी।
...जब नाराज हुए गिरिराज, नेताओं ने की मान मनौव्वल
गृह मंत्री शाह ने शुक्रवार को किशनगंज में भाजपा नेताओं के साथ बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को सुरक्षा कारणों से वहां जाने से रोक दिया। इससे वे खफा हो गए। बैठक के लिए सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी की गई थी। अंदर सिर्फ उन्हीं लोगों को जाने दिया जा रहा था, जिन्हें पास उपलब्ध कराया गया था। इस बैठक में शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी पहुंचे, लेकिन बैठक का पास न होने के कारण सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया। इसके बाद वे भड़क गए और वापस सर्किट हाउस चले गए। सिंह इतने नाराज हो गए कि उन्होंने बैठक में आने से ही मना कर दिया। इसके बाद भाजपा के बड़े नेताओं में प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल, पूर्व डिप्टी सीएम ताराकिशोर प्रसाद समेत अन्य नेताओं ने उनसे मान-मनौव्वल की, तब जाकर गिरिराज सिंह माने और बैठक में शामिल हुए।