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बिहार: नवरात्र में आधी रात तक गूंज रहे मां अंबिका के जयकारे, मन्नत पूरी होने पर भक्त करा रहे विशेष शृंगार

Sun, 18 Oct 2026 07:57 AM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Sun, 18 Oct 2026 07:57 AM IST
सार

शारदीय नवरात्र में बिहार के सारण जिले स्थित आमी के मां अंबिका भवानी मंदिर में भक्ति का अनूठा माहौल है। सुबह चार बजे की आरती से लेकर आधी रात तक मां के जयकारे गूंज रहे हैं। कोई परिवार की खुशहाली की कामना लेकर पहुंच रहा है, तो कोई मनोकामना पूरी होने पर मां का विशेष शृंगार करा रहा है। नवरात्र के दौरान सिद्धपीठ में श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी हुई है।
 

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The court of Mother Ambika Bhavani became lively during Sharadiya Navratri:
शक्तिपीठ अंबिका भवानी की पूजा अर्चना करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोर के चार बजते ही मां की आरती, घंटियों की गूंज, धूप-दीप की सुगंध और मां के जयकारों से गूंजता परिसर, शारदीय नवरात्र में आमी स्थित सिद्धपीठ मां अंबिका भवानी का दरबार पूरी तरह भक्तिमय हो उठा है। आस्था का आलम यह है कि सुबह की पहली आरती से लेकर देर रात मां के विशेष शृंगार और आरती तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। कोई परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर पहुंच रहा है, तो कोई मन्नत पूरी होने पर मां के चरणों में कृतज्ञता अर्पित कर रहा है। स्थानीय श्रद्धालुओं से लेकर दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले भक्तों तक, हर कोई मां के दर्शन और देवी पाठ में लीन नजर आ रहा है। नवरात्र के अवसर पर मां के दरबार में उमड़ रही भीड़ और गूंजते जयकारे क्षेत्र की गहरी धार्मिक आस्था का जीवंत प्रमाण बन गए हैं।

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देर रात तक विशेष शृंगार और आरती के दर्शन
मां अंबिका भवानी के दरबार में देर रात होने वाला विशेष शृंगार और आरती भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मां के शृंगार के दर्शन के लिए रात में भी भक्त मंदिर परिसर में मौजूद रहते हैं। फूलों, आभूषणों और आकर्षक अंगवस्त्रों से सुसज्जित मां के स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य मानते हैं। आरती के दौरान भक्तों के सामूहिक जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठता है। नवरात्र में सुबह से रात तक चलने वाली पूजा-अर्चना मंदिर की धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को प्रदर्शित करती है।
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मन्नत पूरी होने पर मां का कराते हैं विशेष शृंगार
आमी मंदिर के पुजारी राजेश उर्फ विट्ठल तिवारी ने बताया कि मां अंबिका भवानी के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर मां के दरबार में पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना कराते हैं। कई श्रद्धालु खुशबूदार फूलों, आभूषणों और अंगवस्त्रों से मां का विशेष शृंगार कराते हैं। यह मां के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा प्रकट करने का एक माध्यम है। नवरात्र के अवसर पर ऐसे भक्तों की मौजूदगी मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल बनाती है।
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उन्होंने बताया कि नवरात्र के दौरान मां के दर्शन और पूजा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में काफी उत्साह रहता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-पाठ करते हैं और मां से अपने परिवार के मंगल की कामना करते हैं। मंदिर परिसर में सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जबकि विशेष आरती और शृंगार के समय भी भक्तों की उपस्थिति बनी रहती है।

श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करें मां की आराधना
मंदिर के दूसरे पुजारी गणेश उर्फ चुनचुन तिवारी ने कहा कि नवरात्र देवी उपासना, आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण अवसर है। श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक क्षमता, स्वास्थ्य और सामर्थ्य के अनुरूप व्रत रखकर मां की आराधना करनी चाहिए। देवी पाठ और पूजा-अर्चना के माध्यम से लोग अपने जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता की कामना करते हैं।

उन्होंने कहा कि भक्ति का मूल भाव श्रद्धा और समर्पण है। इसलिए हर व्यक्ति को अपनी परिस्थितियों के अनुसार मां की उपासना करनी चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से नवरात्र के दौरान संयम, सद्भाव और धार्मिक आस्था के साथ पूजा करने की अपील की। मां के दरबार में पहुंचने वाले भक्त जीवन की बाधाओं और समस्याओं से मुक्ति, परिवार की खुशहाली तथा भविष्य में उन्नति की कामना करते हैं।

आमी का सिद्धपीठ है आस्था का प्रमुख केंद्र
सारण जिले के दिघवारा प्रखंड के अंतर्गत आमी गांव स्थित मां अंबिका भवानी का मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ मंदिर की धार्मिक महत्ता और जनआस्था को दर्शाती है। दूर-दराज से आने वाले भक्त मां के दर्शन, पूजा-पाठ और आरती में शामिल होकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।


शारदीय नवरात्र के साथ ही मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल है। मां के जयकारों के बीच श्रद्धालु आस्था, विश्वास और मनोकामना पूरी होने की उम्मीद लेकर लगातार दरबार में पहुंच रहे हैं।

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