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Hindi News ›   Bihar ›   Tejashwi Yadav raises demands in the interest of teachers; writes to the CM regarding MLC elections.

बिहार: तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी सरकार से अब क्या मांग कर दी? कहा- हजारों नियोजित शिक्षकों की सेवा पर संकट

Sun, 18 Oct 2026 09:41 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Sun, 18 Oct 2026 09:41 AM IST
सार

MLC Elections: बिहार विधान परिषद चुनाव में अन्य दलों के नेता के प्रचार-प्रसार करते तेजस्वी यादव नहीं दिख रहे हैं। लेकिन, मतदान से पहले उन्होंने शिक्षकों का मुद्दाकर मतदाताओं का ध्यान खींचने की कोशिश जरूर की है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। आइये जानते हैं तेजस्वी यादव ने क्या कहा?

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Tejashwi Yadav raises demands in the interest of teachers; writes to the CM regarding MLC elections.
सम्राट चौधरी और तेजस्वी यादव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब मुद्दों पर सियासत कर रहे हैं। विधान परिषद चुनाव की सरगर्मी के बीच उन्होंने शिक्षकों का मुद्दा उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर उन्होंने कहा कि हजारों नियोजित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अप्रशिक्षित शिक्षकों के साथ-साथ उर्दू एवं बांग्ला स्पेशल शिक्षकों के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। सरकार से मांग है कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कदम उठाएं। तेजस्वी यादव ने कहा कि हजारों शिक्षक परिवारों का भविष्य अनिश्चितता में है। ऐसे में राज्य सरकार को न्यायिक, मानवीय और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार करते हुए तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि लंबे समय से सरकारी विद्यालयों में बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं हो। इसलिए सरकार शिक्षकों की ओर से पुनर्विचार याचिका दाखिल करने, सेवा सुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और आवश्यक कानूनी कदम उठाए। 
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2014 की नियोजन प्रक्रिया के आधार पर संरक्षण देने की मांग
तेजस्वी यादव ने कहा कि  उर्दू एवं बांग्ला स्पेशल शिक्षकों का नियोजन किसी नई प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ था। उनकी नियुक्तियां वर्ष 2014 में शुरू हुई नियोजन प्रक्रिया की निरंतरता में न्यायिक आदेशों और विभागीय निर्देशों के अनुपालन में वर्ष 2015-16 में की गई थीं। ऐसे में केवल नियुक्ति की तारीख 31 मार्च 2015 के बाद होने के आधार पर इन शिक्षकों को सेवा समाप्ति के दायरे में रखना उचित नहीं होगा। मांग में कहा गया है कि संबंधित शिक्षकों में कई ऐसे हैं, जिन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है और सक्षमता परीक्षा भी उत्तीर्ण कर चुके हैं। इनमें कुछ शिक्षक वर्तमान में विशिष्ट शिक्षक, प्रधान शिक्षक अथवा विद्यालय अध्यापक के रूप में भी सेवा दे रहे हैं। ऐसे शिक्षकों के मामले में उनकी वर्तमान योग्यता और नियुक्ति की स्थिति को ध्यान में रखते हुए संरक्षण दें। 
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नियोजन अभिलेखों की कमी के लिए शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराना अनुचित
तेजस्वी यादव ने कहा कि वर्षों से सरकारी विद्यालयों में पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों के नियोजन अभिलेख या मेधा सूची से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में संबंधित नियोजन इकाइयों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही या दस्तावेजों के रखरखाव में कमी हुई है, तो इसकी सजा शिक्षकों और उनके परिवारों को देना न्यायसंगत नहीं होगा।

तेजस्वी यादव ने सरकार क्या प्रमुख मांग की है?
  • सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका: राज्य सरकार तत्काल पुनर्विचार याचिका दाखिल करे और बिहार की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रभावित शिक्षकों का पक्ष प्रभावी ढंग से रखे।
  • उर्दू-बांग्ला स्पेशल शिक्षकों को राहत: 2014 में शुरू हुई नियोजन प्रक्रिया की निरंतरता में नियुक्त इन शिक्षकों को प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पत्र के प्रभाव से अलग रखने और उनकी सेवा समाप्ति पर रोक लगाए। 
  • वर्तमान योग्यता के आधार पर संरक्षण: डीएलएड, सक्षमता परीक्षा या बीपीएससी के माध्यम से वर्तमान पदों पर नियुक्त हो चुके शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत दें।
  • अधिकारियों की जवाबदेही तय हो: नियोजन अभिलेख गायब होने या प्रशासनिक त्रुटियों के लिए जिम्मेदार पदाधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जाए, न कि शिक्षकों को दंडित करें। 
  • कार्रवाई पर तत्काल रोक: पुनर्विचार याचिका पर निर्णय होने तक वेतन रोकने, सेवा समाप्त करने और बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी करें। 
  • नियमावली में संशोधन: जरूरत पड़ने पर शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमावली में आवश्यक संशोधन या अन्य वैधानिक उपाय करें। 
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