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बिहार: सात की मौत और छह की पहचान, तबाह मकान और कई सवाल… सीवान ब्लास्ट में 10 साल पुराना कनेक्शन आया सामने

Sat, 24 Oct 2026 09:19 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Sat, 24 Oct 2026 09:19 AM IST
सार

बिहार के सीवान जिले के बड़हरिया प्रखंड के जामो थाना क्षेत्र स्थित अल्मापुर गांव में पटाखा बनाने के दौरान हुए भीषण विस्फोट में सात लोगों की मौत हो गई है। धमाका इतना तेज था कि मकान की छत उड़ गई और मृतकों के शरीर के टुकड़े दूर-दूर तक बिखर गए।

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siwan firecracker factory blast almapur village five deaths
पटाखा ब्लास्ट के बाद बिखरा पड़ा मकान का मलबा. - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के सीवान जिले में एक तरफ विधान परिषद की सीटों के लिए मतदान हो रहा था, वहीं दूसरी ओर पटाखा बनाने के दौरान हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। जिले के बड़हरिया प्रखंड के जामो थाना क्षेत्र स्थित अल्मापुर गांव में हुए इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई है, जिसमें अभी तक छह लोगों की पहचान हो सकी है। धमाका इतना तेज था कि मकान की छत उड़ गई और लोगों के शरीर के टुकड़े दूर-दूर तक बिखर गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, विस्फोट के बाद करीब दो घंटे तक रुक-रुककर धमाके होते रहे। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है।

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रिहायशी इलाके में बड़े पैमाने पर बनते थे पटाखे

अल्मापुर गांव रिहायशी इलाका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस घर में विस्फोट हुआ, वहां बड़े पैमाने पर पटाखे बनाए जाते थे। दीपावली और छठ पर्व को देखते हुए अधिक मात्रा में बारूद मंगवाकर जमा किए जाने की बात भी सामने आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, शादी-विवाह और त्योहारों के लिए लोग इसी जगह से पटाखे खरीदकर ले जाते थे।
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लोगों ने बताया कि अचानक तेज धमाके की आवाज सुनकर वे घटनास्थल की ओर दौड़े। वहां पहुंचने पर देखा कि मकान की छत उड़ चुकी थी और लोगों के शरीर के टुकड़े बाहर बिखरे पड़े थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किसी के पैर हिल रहे थे, तो किसी के सिर का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। लोग जब तक स्थिति को समझ पाते, तब तक एक और धमाका हो गया। इसके बाद मौके पर मौजूद लोग जान बचाकर भागने लगे। ग्रामीणों ने तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना दी।
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मकान में लगी भीषण आग, रुक-रुककर होते रहे धमाके

विस्फोट के बाद मकान में भीषण आग लग गई। कुछ-कुछ देर पर धमाके होते रहे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं, लेकिन आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। तब तक मकान का बड़ा हिस्सा और उसमें रखा सामान तबाह हो चुका था। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और डॉक्टरों की टीम लगातार मौके पर मौजूद रही। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए दर्जनों एंबुलेंस बुलाई गईं। दो-तीन लोगों को अस्पताल भेजे जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन उन्हें किस अस्पताल में भर्ती कराया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी प्रशासन की ओर से नहीं दी जा सकी।

रातभर चला बचाव अभियान, क्षत-विक्षत शवों की पहचान में लगी देर

विस्फोट इतना भयावह था कि मृतकों के शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए थे। शरीर के टुकड़े बिखरे होने के कारण मृतकों की पहचान करने में काफी समय लगा। विस्फोट में मरने वालों में एक ही परिवार के पांच सदस्य और दो मजदूर शामिल हैं। अब तक छह मृतकों की पहचान हो सकी है। इनमें अमरुद्दीन (62 वर्ष), उनकी पोतियां मुस्कान (22 वर्ष), खुशबू (21 वर्ष) और इशरत (18 वर्ष) शामिल हैं। इनके अलावा पड़ोसी फिरोज का बेटा अरशद (8 वर्ष) और मजदूर राजकुमार सिंह उर्फ भोला सिंह की पहचान हुई है। शवों के टुकड़ों को जोड़ने के बाद इन छह मृतकों की पहचान हो सकी। सातवें मृतक की पहचान नहीं हो पाने की स्थिति में डीएनए जांच कराई जाएगी।

कुछ ही मिनटों में उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार

इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को कुछ ही मिनटों में उजाड़ दिया। वर्षों की मेहनत से बनाया गया मकान चंद सेकेंड में तबाह हो गया। हादसे में परिवार के कई सदस्यों की मौत से गांव में मातम पसरा है। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने ऐसा भयावह मंजर पहले केवल फिल्मों में देखा था। विस्फोट के बाद से लोग दहशत में हैं।

10 साल पहले भी इसी घर से मिला था एक ट्रक पटाखा, प्रशासन पर उठे सवाल

इस घटना के बाद प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब 10 साल पहले भी इसी घर से एक ट्रक पटाखे मिले थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि रिहायशी इलाके में बड़े पैमाने पर पटाखा बनाने और बारूद जमा करने का काम कैसे चल रहा था।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पटाखा बनाने का काम बिना अनुमति के हो रहा था, तो समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं जुटाई गई और इसे बंद क्यों नहीं कराया गया? जब इलाके के लोगों को कथित तौर पर इस गतिविधि की जानकारी थी, तो पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? लोगों का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती, तो शायद इस बड़ी त्रासदी को रोका जा सकता था। फिलहाल, प्रशासन ने पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है। विस्फोट के कारणों, बारूद के भंडारण और पटाखा निर्माण से जुड़ी अनुमति के पहलुओं की जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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