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बिहार में मानवता की मिसाल: वेतन नहीं मिला, लेकिन नहीं भूले इंसानियत; कार्यपालक सहायकों ने बांटी राहत सामग्री

Sat, 10 Oct 2026 06:15 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Sat, 10 Oct 2026 06:15 PM IST
सार

सारण में सात महीने से वेतन संकट झेल रहे कार्यपालक सहायकों ने आपसी सहयोग से बाढ़ पीड़ितों के बीच करीब एक हजार फूड पैकेट और जरूरी सामग्री बांटी। आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी इस पहल ने मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की।

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Salaries unpaid for seven months, yet hearts opened for flood victims; relief reached them:
राहत-वितरण के दौरान जुटी बाढ़ पीड़ितों की भीड़।

विस्तार

खुद आर्थिक तंगी झेल रहे कार्यपालक सहायकों ने आपसी सहयोग से राशि जुटाकर बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई। सारण में उनकी इस पहल ने वेतन संकट के बीच मानवीय संवेदना की एक अलग तस्वीर पेश की है। बिहार राज्य कार्यपालक सहायक सेवा संघ की सारण जिला इकाई के जिलाध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष नीलेश कुमार के नेतृत्व में परसा प्रखंड के मुजौना मुसहर टोली, महादलित बस्ती और मुजौना बाजार के समीप स्थित दलित बस्ती में राहत सामग्री का वितरण किया गया।

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प्रदेश अध्यक्ष नीलेश कुमार ने बताया कि इस अभियान के दौरान करीब एक हजार फूड पैकेट के साथ जरूरत की कई सामग्रियां बांटी गईं। राहत सामग्री में सैनिटरी नैपकिन, दूध के पैकेट, बिस्कुट, भुंजा, इलेक्ट्रॉल पाउडर और सेवलॉन समेत अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं।

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उद्देश्य था कि बाढ़ की मार झेल रहे जरूरतमंद परिवारों को संकट की घड़ी में कुछ राहत मिल सके। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए इन कार्यपालक सहायकों की पहल सराहनीय है, लेकिन उनका अपना वेतन संकट भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। दूसरों को राहत देने वाले कर्मी खुद महीनों से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राहत अभियान ने जहां सहयोग और संवेदना का संदेश दिया, वहीं लंबित वेतन के भुगतान की जरूरत को भी रेखांकित किया।

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दूसरों के दर्द पर भारी नहीं पड़ा अपना संकट
संघ के जिलाध्यक्ष नागमणि प्रसाद ने बताया कि आवास विभाग और मनरेगा में कार्यरत कार्यपालक सहायकों का सात महीने से वेतन लंबित है। वहीं, पीआरडी और सामाजिक सुरक्षा विभाग समेत अन्य विभागों के कार्यपालक सहायकों को भी तीन महीने से भुगतान नहीं मिला है।



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वेतन के अभाव में कार्यपालक सहायकों के सामने घरेलू खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती है। ऐसे में राहत सामग्री के लिए राशि जुटाना आसान नहीं था। फिर भी कर्मियों ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया। उनका यह कदम बताता है कि आर्थिक परेशानी के बीच भी सामाजिक जिम्मेदारी का भाव कायम रह सकता है। राहत वितरण के दौरान रितेश कुमार, सोनू कुमार, नीरज कुमार, अमिताभ कुमार, सुशील कुमार शर्मा और गणेश कुमार समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।

राहत वितरण के दौरान जुटी बाढ़ पीड़ितों की भीड़

राहत वितरण के दौरान जुटी बाढ़ पीड़ितों की भीड़

 

राहत वितरण के दौरान जुटी बाढ़ पीड़ितों की भीड़

राहत वितरण के दौरान जुटी बाढ़ पीड़ितों की भीड़

 

राहत वितरण के दौरान जुटी बाढ़ पीड़ितों की भीड़

राहत वितरण के दौरान जुटी बाढ़ पीड़ितों की भीड़

 

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