Bihar: सोनपुर में सेटेलाइट सिटी परियोजना का विरोध तेज, किसानों ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ खोला मोर्चा
सारण के सोनपुर में प्रस्तावित सेटेलाइट सिटी परियोजना के विरोध में किसानों ने जनसभा कर भूमि अधिग्रहण का विरोध किया। किसानों ने बिना सहमति, उचित मुआवजे और पुनर्वास के जमीन नहीं देने का संकल्प लिया तथा जबरन अधिग्रहण होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
सारण के सोनपुर में प्रस्तावित सेटेलाइट सिटी परियोजना के विरोध में किसानों ने जनसभा कर भूमि अधिग्रहण का विरोध किया। किसानों ने बिना सहमति, उचित मुआवजे और पुनर्वास के जमीन नहीं देने का संकल्प लिया तथा जबरन अधिग्रहण होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
विस्तार
बिहार सरकार की प्रस्तावित सेटेलाइट सिटी परियोजना को लेकर सारण जिले के सोनपुर क्षेत्र में विरोध तेज हो गया है। बुधवार को सोनपुर प्रखंड के सिताबगंज बाजार परिसर में आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण और स्थानीय लोग शामिल हुए। सभा में किसानों ने प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध करते हुए संकल्प लिया कि वे किसी भी परिस्थिति में अपनी कृषि योग्य भूमि अधिग्रहण के लिए नहीं देंगे और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार सेटेलाइट सिटी और अन्य विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है। उनका कहना था कि इस क्षेत्र के अधिकांश परिवार खेती पर निर्भर हैं और कृषि भूमि ही उनके जीवन का आधार है। ऐसे में किसानों की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उद्योग लगाइए, किसानों की जमीन नहीं छीनिए
सभा में भरत सिंह, नितेश कुमार और चंदेश्वर राय समेत अन्य वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में क्षेत्र के विकास और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो केवल भूमि अधिग्रहण के बजाय उद्योग, फैक्ट्रियां और रोजगारपरक परियोजनाएं स्थापित करे। उनका कहना था कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, पलायन रुकेगा और क्षेत्र का आर्थिक विकास भी होगा। वक्ताओं ने कहा कि विकास के नाम पर किसानों को उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल करना उचित नहीं है। जनसभा के दौरान वक्ताओं ने महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का भी जिक्र करते हुए राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की। उनका आरोप था कि सरकार किसानों की भावनाओं और आम जनता की समस्याओं की अनदेखी कर रही है, जबकि क्षेत्र के युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं।
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जबरन अधिग्रहण हुआ तो आंदोलन होगा तेज
सभा के अंत में किसानों और ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि जब तक किसानों के हितों की सुरक्षा, उचित मुआवजा, पुनर्वास और उनकी सहमति सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक वे अपनी जमीन अधिग्रहण के लिए नहीं देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जबरन भूमि अधिग्रहण का प्रयास किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।
जनसभा में बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार प्रस्तावित सेटेलाइट सिटी परियोजना को क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण बता रही है, जबकि प्रभावित क्षेत्र के किसानों का विरोध अब संगठित रूप लेता दिख रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच संवाद तथा इस विवाद के समाधान पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।