{"_id":"668676c53313d50c46061538","slug":"gopalganj-58-schools-did-not-start-attendance-through-app-dpo-says-salary-paid-only-on-basis-online-attendance-2024-07-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gopalganj: 58 स्कूल शुरू नहीं किए एप से हाजिरी भरना, DPO बोले- ऑनलाइन अटेंडेंस के आधार पर ही होगा वेतन भुगतान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gopalganj: 58 स्कूल शुरू नहीं किए एप से हाजिरी भरना, DPO बोले- ऑनलाइन अटेंडेंस के आधार पर ही होगा वेतन भुगतान
Thu, 04 Jul 2024 03:47 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
Published by: अरविंद कुमार
Updated Thu, 04 Jul 2024 03:47 PM IST
सार
शिक्षा विभाग की सख्ती के बाद ई-शिक्षा कोष एप से शिक्षकों के द्वारा उपस्थिति दर्ज करने के ग्राफ में वृद्धि हुई है। 75 प्रतिशत से अधिक शिक्षक अब ऑनलाइन हाजिरी भर रहे हैं।
विज्ञापन
उच्च मध्य विद्यालय नेहरुआ कला के शिक्षक
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोपालगंज जिले में सरकारी स्कूलों की संख्या 1,917 है। इन सभी विद्यालयों में शिक्षकों के द्वारा ऑनलाइन हाजिरी बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 15 हजार 604 है। इनमें से 11 हजार 673 शिक्षकों की ओर से ऑनलाइन हाजिरी बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
विज्ञापन
डीपीओ स्थापना जमालुद्दीन ने बताया कि अन्य सभी शिक्षक भी एप के माध्यम से हाजिरी बनाने का काम शुरू कर दें। क्योंकि इसी उपस्थिति के आधार पर शिक्षकों के वेतन का भुगतान भी होना है। जिन शिक्षकों को एप से हाजिरी बनाने में दिक्कत है, उनके लिए प्रखंडों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी है। ई-शिक्षा कोष एप से ऑनलाइन हाजिरी बनाने की प्रक्रिया 25 जून से शुरू हुई थी। लगातार शिक्षकों की उपस्थिति बढ़ रही है। बुधवार को 1,859 स्कूलों में ही इस नयी व्यवस्था से शिक्षकों की हाजिरी बन पायी। वहीं, 10 हजार 935 शिक्षकों ने सेल्फ अटेंडेंस बनाया। 738 का मार्क ऑन ड्यूटी जबकि 3931 का अटेंडेंस नॉट मार्क्ड पाया गया है।
विज्ञापन
वहीं, शिक्षकों का कहना है कि ऑनलाइन हाजिरी बनाने में अभी भी परेशानी बनी हुई है। कई शिक्षकों के पास एंड्रॉयड मोबाइल अभी है ही नहीं। बहुत सारे ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें मोबाइल है भी तो इस एप को ऑपरेट करने नहीं आता है। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षक ऑनलाइन सिस्टम में सीएल या एसएल कैसे भरेंगे, इसको लेकर ऊहापोह है। विभागीय अधिकारियों को इन दिक्कतों को दूर करने के लिए आवश्यक पहल की दरकार है।
विज्ञापन
अभी जिले में आकस्मिक अवकाश और विशेषावकास को लेकर शिक्षकों को काफी परेशानियां हो रही है। छुट्टी में भी है, लेकिन ई-शिक्षा कोष में उन्हें अनुपस्थित दिखाया जा रहा है। क्योंकि एप के माध्यम से छुट्टी ग्रांट करना अभी शिक्षक जान नहीं पाए हैं। एप की विधिवत जानकारी के लिए शिक्षकों को अपने संकुल संसाधन केंद्र में मास्टर ट्रेनर के सहयोग से प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। ताकि एप को सुगमतापूर्वक चला सके।