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Bihar: सीवान में वित्तरहित कर्मियों की बड़ी बैठक, सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज करने का एलान

Fri, 18 Jul 2025 05:30 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान Published by: शबाहत हुसैन Updated Fri, 18 Jul 2025 05:30 PM IST
सार

Bihar: कर्मियों ने शिक्षक और स्नातक क्षेत्र से चुने गए विधान पार्षदों से आगामी सत्र  का बहिष्कार कर विधानमंडल के भीतर धरना देने की मांग की है। साथ ही यह भी तय किया गया कि विभिन्न संगठनों से तालमेल बनाकर गर्दनीबाग में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन का बहिष्कार कर सीधे मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।

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Bihar: Big meeting of unfunded employees announcement to intensify agitation against government policies
बैठक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्यभर के वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के कर्मियों ने बिहार सरकार की कथित तानाशाही नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिले के अनुदानित डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज और माध्यमिक विद्यालयों के कर्मियों ने शनिवार को दरोगा प्रसाद राय डिग्री कॉलेज परिसर में एक महत्वपूर्ण समीक्षा और संकल्प बैठक आयोजित कर आंदोलन को तेज करने की रणनीति बनाई।

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बैठक की अध्यक्षता प्रोफेसर मो. रज्जी अहमद ने की, जबकि संचालन प्रोफेसर बीरेंद्र कुमार यादव भोजपुरिया ने किया। बैठक में सैकड़ों कर्मियों की भागीदारी रही। उपस्थित कर्मियों ने "अनुदान नहीं, वेतनमान दो फोरम" के बैनर तले मुख्यमंत्री आवास घेराव और जेल भरो आंदोलन का ऐलान किया। यह आंदोलन तीन सूत्री मांगों के समर्थन में किया जा रहा है, जिसमें राज्यभर के वित्तरहित कर्मी शामिल होंगे।

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बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। इसमें जिला स्तर पर आंदोलन समितियों के गठन, सभी अनुदानित संस्थानों से जुड़े कर्मियों से संपर्क अभियान और “मिशन 25,000” के तहत पटना चलो अभियान शामिल है, जिसके तहत 25 हजार कर्मियों को राजधानी में जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा शिक्षा समिति की अनुशंसाओं को लागू कराने के लिए जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों का घेराव करने का निर्णय लिया गया।

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कर्मियों ने शिक्षक और स्नातक क्षेत्र से चुने गए विधान पार्षदों से आगामी सत्र का बहिष्कार कर विधानमंडल के भीतर धरना देने की मांग की है। साथ ही यह भी तय किया गया कि विभिन्न संगठनों से तालमेल बनाकर गर्दनीबाग में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन का बहिष्कार कर सीधे मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।

बैठक में यह भी चेतावनी दी गई कि जब तक शिक्षा समिति की अनुशंसाएं लागू नहीं की जातीं, तब तक संस्थानों की गवर्निंग बॉडी में शामिल सभी जनप्रतिनिधि तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दें। कर्मियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 15 अगस्त 2025 तक उनकी मांगों पर सरकार ने सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो राज्यव्यापी आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।

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