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बिहार: लकड़ी की प्रतिमा, लेकिन जोड़ का नामोनिशान नहीं, छपरा की काठ वाली देवी की अनोखी मान्यता

Mon, 19 Oct 2026 09:49 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Mon, 19 Oct 2026 09:49 PM IST
सार

छपरा के कटरा मोहल्ले में स्थित मां काठ वाली देवी का मंदिर करीब 300 साल पुराना बताया जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, नीम की लकड़ी से बनी देवी की प्रतिमा में कहीं भी जोड़ दिखाई नहीं देता है।

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A wooden idol with no visible joints the unique legend surrounding the Wooden Goddess of Chhapra
काठ वाली देवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के छपरा शहर में आस्था और परंपरा से जुड़ा एक ऐसा देवी स्थल है, जिसकी प्रतिमा अपनी अनूठी बनावट के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखती है। कटरा मोहल्ले में स्थित मां काठ वाली देवी की प्रतिमा लकड़ी से बनी है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसकी खासियत यह है कि इसमें कहीं भी जोड़ दिखाई नहीं देता। करीब 300 साल पुराने इस मंदिर की स्थापना की कथा नीम के एक विशाल पेड़ से जुड़ी है।

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पुजारी के सपने से जुड़ी है प्रतिमा निर्माण की कथा
स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित कथा के अनुसार, करीब 300 वर्ष पहले उस स्थान पर नीम का एक विशाल पेड़ हुआ करता था, जहां आज मां काठ वाली देवी का मंदिर स्थित है। मान्यता है कि एक रात माता ने वहां रहने वाले पुजारी को सपने में दर्शन दिए और उसी नीम के पेड़ की लकड़ी से अपनी प्रतिमा बनवाने का निर्देश दिया। कहा जाता है कि इसके बाद पुजारी ने एक बढ़ई को बुलाया और नीम के पेड़ की लकड़ी से देवी की प्रतिमा का निर्माण कराया। इसी घटना को मां काठ वाली देवी की स्थापना से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इस कथा के ऐतिहासिक प्रमाणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता पीढ़ियों से प्रचलित है।
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प्रतिमा की अनूठी बनावट है आकर्षण का केंद्र
मां काठ वाली देवी की प्रतिमा की सबसे खास विशेषता इसका लकड़ी से निर्मित होना और इसमें जोड़ दिखाई नहीं देना बताया जाता है। आमतौर पर लकड़ी से बनी कलाकृतियों में अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर आकार दिया जाता है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि इस प्रतिमा में जोड़ का नामोनिशान नहीं है।

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प्रतिमा की बनावट और इसके निर्माण से जुड़ी कथा श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल पैदा करती है। यही विशेषता मां काठ वाली देवी को अलग पहचान देती है। यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि छपरा की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा और स्थानीय विरासत से भी जुड़ा हुआ है।


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तीन सदियों की परंपरा से जुड़ा है आस्था का केंद्र
छपरा के कटरा मोहल्ले में स्थित मां काठ वाली देवी का मंदिर स्थानीय धार्मिक परंपराओं की विरासत का हिस्सा है। करीब 300 साल पुरानी बताई जाने वाली स्थापना की कथा इस मंदिर को विशिष्ट बनाती है। नीम की लकड़ी से बनी प्रतिमा और उसकी बिना जोड़ वाली अनूठी बनावट इस धार्मिक स्थल की पहचान के प्रमुख पहलू हैं।

ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थलों का महत्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होता, बल्कि उनसे जुड़ी लोककथाएं और सांस्कृतिक स्मृतियां भी उनकी पहचान को जीवंत बनाए रखती हैं। मां काठ वाली देवी का मंदिर छपरा की धार्मिक विरासत का ऐसा ही एक उदाहरण है, जहां आस्था के साथ स्थानीय परंपराओं की कहानी भी पीढ़ियों से चली आ रही है।

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