{"_id":"22cf07e82c4e218fce10acbdcfd39bc3","slug":"rjd-fight-for-cheif","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजद में छिड़ सकती है नेतृत्व की जंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजद में छिड़ सकती है नेतृत्व की जंग
हिमांशु मिश्र/दिल्ली
Updated Mon, 07 Oct 2013 08:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तेजस्वी यादव को समाजवाद के साथ-साथ राजनीति का ककहरा सिखाने का दायित्व वरिष्ठ सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह के जिम्मे है।
विज्ञापन
चारा घोटाला मामले में जेल जाने से पहले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने खुद यह जिम्मा अपने सबसे भरोसेमंद नेता को सौंपा है।
मंझे समाजवादी राजनीतिज्ञ रघुवंश की रणनीति लालू की विरासत की छाया में पार्टी को आगे बढ़ाने की है। मगर समस्या लालू के परिवार के अन्य सदस्यों की बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षा है।
नई राजनीतिक परिस्थितियों में लालू के परिवार के अन्य सदस्यों मसलन उनकी पुत्री मीसा भारती के साथ-साथ दूसरे पुत्र तेज प्रताप यादव की भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाग उठी है।
विज्ञापन
मीसा जल्द ही राजद की सदस्यता लेने वाली हैं, जबकि तेज प्रताप पहले से ही राजद के सक्रिय सदस्य हैं। इसके अलावा पार्टी से बाहर चले गए लालू के साले साधु यादव और सुभाष यादव भी पार्टी में नए सिरे से अपनी संभावना तलाशने में जुटे हैं।
विज्ञापन
दरअसल लालू को चारा घोटाला मामले में अपने राजनीतिक करियर पर पूर्ण विराम लगने का अंदेशा हो चुका था। यही कारण है कि सीबीआई अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने से एक दिन पूर्व 29 सितंबर की रात लालू ने अपने सर्वाधिक विश्वस्त रघुवंश से तीन घंटे तक बात की थी।
इस दौरान दोनों नेताओं के साथ महज तेजस्वी ही थे। बातचीत में लालू ने रघुवंश से तेजस्वी को आगे बढ़ाने का अनुरोध करने के साथ ही अपने पुत्र को मुश्किल परिस्थितियों में रघुवंश से ही सलाह लेने का सुझाव दिया था।
सूत्रों के मुताबिक तब यह रणनीति बनी कि मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखने के लिए रघुवंश तेजस्वी को पार्टी का नया चेहरा बनाएंगे।
मगर पार्टी चलाने के लिए एक कोरग्रुप का गठन होगा। दरअसल लालू शुरू से ही तेजस्वी को ही अपनी राजनीतिक विरासत सौंपना चाहते थे।
यही कारण है कि बीते विधानसभा चुनाव के दौरान खुदलालू ने अपने इस क्रिकेटर बेटे का जनसभाओं में लोगों से परिचय कराया।
फिर राजद के वर्तमान सभी नेताओं में अकेले रघुवंश ही ऐसे गैर यादव नेता हैं जिन्होंने मुश्किल भरे दौर में भी लालू का साथ नहीं छोड़ा।
हालांकि लालू के जेल जाने के सप्ताह भर बीतने के बाद ही यह रणनीति परवान चढ़ती नहीं दिख रही। सूत्रों का कहना है कि खुद लालू के परिवार में उनकी विरासत पर दावा करने वालों की संख्या बढ़ने वाली है।
बेटी में भी जागी आकंक्षा
अब तक राजनीति से दूर ही रहे लालू के दूसरे पुत्र तेज प्रताप की भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढ़ी है तो दूसरी ओर उनकी पुत्री मीसा भारती भी विरासत संभालने की होड़ में शामिल हो सकती हैं।
इसके अलावा लालू के दोनों साले साधु और सुभाष यादव भी पार्टी में नए सिरे से अपनी सक्रियता बढ़ाने की संभावना तलाशने में जुट गए हैं।
पार्टी चलाने के लिए कोरग्रुप गठन से पूर्व ही राबड़ी के सोनिया और राहुल गांधी की तरह ही खुद तथा तेजस्वी के सहारे पार्टी चलाने के बयान से रघुवंश आहत हैं।
यही कारण है कि जिस दिन सीबीआई की विशेष अदालत लालू को सजा सुना रही थी उस दिन रघुवंश संसदीय समिति की बैठक में हिस्सा लेने के बहाने दिल्ली में मौजूद थे।
पार्टी सूत्र बताते हैं कि नई परिस्थितियों में परिवार के सदस्यों का हस्तक्षेप बढ़ने से प्रभुनाथ सिंह, जगदानंद सिंह जैसे वरिष्ठ नेता भी नाराज हैं।