{"_id":"6a5b57a20b9d48ae9505f688","slug":"neet-achiever-amar-prayant-emotional-after-securing-air-1938-wish-i-was-a-doctor-in-2020-to-save-my-father-purnea-news-c-1-1-noi1375-4515026-2026-07-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bihar News: NEET में अमर्त्य प्रियांश ने बढ़ाया मान, बोले- काश! 2020 में डॉक्टर होता तो पिता को बचा लेता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bihar News: NEET में अमर्त्य प्रियांश ने बढ़ाया मान, बोले- काश! 2020 में डॉक्टर होता तो पिता को बचा लेता
Sat, 18 Jul 2026 08:04 PM IST
पूर्णिया ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
Published by: पूर्णिया ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 08:04 PM IST
सार
पूर्णिया के धमदाहा मध्य पंचायत के छात्र अमर्त्य प्रियांश ने NEET में अखिल भारतीय स्तर पर 1938वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। इस बड़ी सफलता के बाद भी वह अपने दिवंगत पिता को याद कर भावुक हो गए और कहा कि काश वह 2020 में डॉक्टर होते तो कोरोना काल में अपने पिता की जान बचा सकते।
विज्ञापन
अमर्त्य प्रियांश
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में अखिल भारतीय स्तर पर 1938वीं रैंक हासिल कर पूर्णिया जिले के धमदाहा मध्य पंचायत के होनहार छात्र अमर्त्य प्रियांश ने जिले का नाम रोशन किया है। देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित करने वाले अमर्त्य की सफलता पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस बड़ी उपलब्धि के बाद भी अमर्त्य भावुक नजर आए। उन्होंने अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए कहा, "काश! मैं साल 2020 में ही डॉक्टर होता, तो कोरोना काल में अपने पिता की जान बचा लेता।"
कोरोना काल में पिता का निधन, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
अमर्त्य प्रियांश की सफलता के पीछे संघर्ष और दर्द की लंबी कहानी है। वह धमदाहा के सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी स्वर्गीय भवनाथ ठाकुर के पौत्र तथा स्वर्गीय डॉ. शेखर झा उर्फ पूर्णेंदु शेखर और पूनम शेखर के पुत्र हैं। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली में उनके पिता का असामयिक निधन हो गया था। पिता के जाने से परिवार पूरी तरह टूट गया, लेकिन अमर्त्य ने इसी दर्द को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया और उनके अधूरे सपने को पूरा करने का संकल्प लिया।
ये भी पढ़ें - BPSC 72वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा स्थगित, 26 जुलाई को नहीं होगा एग्जाम; जल्द जारी होगी नई तारीख
विज्ञापन
दादा-दादी बने सबसे बड़ा सहारा
पिता के निधन के बाद अमर्त्य के बुजुर्ग दादा-दादी ने पूरे परिवार को संभाला। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद दिल्ली में रहकर अमर्त्य की पढ़ाई जारी रखी। परिवार का कहना है कि अगर दादा-दादी उस मुश्किल समय में साथ नहीं खड़े होते, तो यह सफलता हासिल करना आसान नहीं होता।
कड़ी मेहनत से हासिल की बड़ी सफलता
अमर्त्य बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने दिल्ली के आकाश कोचिंग संस्थान से NEET की तैयारी की। पिता को खोने का दर्द, दादा-दादी का त्याग और अपनी मेहनत को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। लगातार कठिन परिश्रम और मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की।
घर पर बधाई देने वालों का लगा तांता
अमर्त्य की सफलता के बाद उनके घर पर बधाई देने वालों का सिलसिला लगातार जारी है। परिजनों का कहना है कि यह उपलब्धि मां के आशीर्वाद, दादा-दादी के त्याग और अमर्त्य की दिन-रात की मेहनत का परिणाम है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी इसे पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बताया है। उनका कहना है कि अमर्त्य की कहानी यह साबित करती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अगर हौसला और मेहनत बनी रहे, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।
विज्ञापन
कोरोना काल में पिता का निधन, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
अमर्त्य प्रियांश की सफलता के पीछे संघर्ष और दर्द की लंबी कहानी है। वह धमदाहा के सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी स्वर्गीय भवनाथ ठाकुर के पौत्र तथा स्वर्गीय डॉ. शेखर झा उर्फ पूर्णेंदु शेखर और पूनम शेखर के पुत्र हैं। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली में उनके पिता का असामयिक निधन हो गया था। पिता के जाने से परिवार पूरी तरह टूट गया, लेकिन अमर्त्य ने इसी दर्द को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया और उनके अधूरे सपने को पूरा करने का संकल्प लिया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - BPSC 72वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा स्थगित, 26 जुलाई को नहीं होगा एग्जाम; जल्द जारी होगी नई तारीख
विज्ञापन
दादा-दादी बने सबसे बड़ा सहारा
पिता के निधन के बाद अमर्त्य के बुजुर्ग दादा-दादी ने पूरे परिवार को संभाला। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद दिल्ली में रहकर अमर्त्य की पढ़ाई जारी रखी। परिवार का कहना है कि अगर दादा-दादी उस मुश्किल समय में साथ नहीं खड़े होते, तो यह सफलता हासिल करना आसान नहीं होता।
कड़ी मेहनत से हासिल की बड़ी सफलता
अमर्त्य बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने दिल्ली के आकाश कोचिंग संस्थान से NEET की तैयारी की। पिता को खोने का दर्द, दादा-दादी का त्याग और अपनी मेहनत को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। लगातार कठिन परिश्रम और मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की।
घर पर बधाई देने वालों का लगा तांता
अमर्त्य की सफलता के बाद उनके घर पर बधाई देने वालों का सिलसिला लगातार जारी है। परिजनों का कहना है कि यह उपलब्धि मां के आशीर्वाद, दादा-दादी के त्याग और अमर्त्य की दिन-रात की मेहनत का परिणाम है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी इसे पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बताया है। उनका कहना है कि अमर्त्य की कहानी यह साबित करती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अगर हौसला और मेहनत बनी रहे, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।