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Bihar News: नेपाल से आए हाथियों ने बरपाया कहर, किसानों की फसलें बर्बाद कीं, ठोस कार्रवाई की मांग
Mon, 30 Dec 2024 04:54 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंज
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Mon, 30 Dec 2024 04:54 PM IST
सार
Kishanganj News: डोरिया और आसपास के गांवों के किसानों ने बताया कि नेपाल से हाथियों का इस तरह घुसना हर साल की समस्या बन चुकी है। इन हाथियों ने पहले भी कई बार जान-माल को नुकसान पहुंचाया है। पढ़ें पूरी खबर...।
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हाथियों ने बर्बाद की दो एकड़ की फसल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
किशनगंज जिले के सीमावर्ती गांवों में नेपाल से आए जंगली हाथियों के झुंड ने किसानों की फसलों पर कहर बरपाया है। दिघलबैंक प्रखंड के डोरिया गांव में घुसे हाथियों ने बीते रात आलू और मकई की फसलों को बर्बाद कर दिया। इस घटना से स्थानीय किसान आक्रोशित और परेशान हैं।
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रातभर खेतों में मचाया उत्पात, भारी क्षति
जानकारी के मुताबिक, डोरिया गांव में 11 जंगली हाथियों का झुंड देर रात नेपाल के जंगलों से सीमा पार कर घुस आया। हाथियों ने लगभग दो एकड़ में लगी आलू की फसल और कई अन्य खेतों में मकई की फसलों को रौंद दिया। किसानों के मुताबिक यह झुंड रात भर खेतों में उत्पात मचाता रहा और सुबह नेपाल की ओर लौट गया। स्थानीय किसान भीम प्रसाद गणेश ने बताया कि हाथियों ने हमारी मेहनत पर पानी फेर दिया। आलू की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि नेपाल के घेराबाड़ी इलाके के लोगों ने सुबह हाथियों के झुंड को वापस लौटते देखा और इसकी सूचना दी।
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हर साल की समस्या, प्रशासन उदासीन
डोरिया और आसपास के गांवों के किसानों ने बताया कि नेपाल से हाथियों का इस तरह घुसना हर साल की समस्या बन चुकी है। इन हाथियों ने पहले भी कई बार जान-माल को नुकसान पहुंचाया है। एक अन्य किसान ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हाथियों के हमलों के कारण कई जानें जा चुकी हैं। हर साल फसलों को नुकसान होता है, लेकिन प्रशासन की ओर से इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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किसानों ने ठोस पहल की उठाई मांग
किसानों का कहना है कि जंगली हाथियों को रोकने और फसल की सुरक्षा के लिए सीमा पर ठोस और दीर्घकालिक उपाय किए जाने चाहिए। उनका सुझाव है कि सीमा पर बाड़ लगाई जाए ताकि हाथियों का प्रवेश रोका जा सके। हाथियों को भगाने के लिए विशेष दल का गठन किया जाए। साथ ही फसलों के नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
घटना के बाद किसानों ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को सूचना दी है। हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि बार-बार हो रही इस समस्या का समाधान जल्द निकाला जाएगा।
किशनगंज के सीमावर्ती क्षेत्रों में जंगली हाथियों का यह कहर केवल फसलों की बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जान-माल के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। अब यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए क्या कार्रवाई करता है।