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Bihar: किशनगंज के आदित्य झा ने UPSC में पाई बड़ी सफलता, 58वीं रैंक लाकर इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के लिए चयनित
Fri, 23 May 2025 03:41 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंज
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Fri, 23 May 2025 03:41 PM IST
सार
Kishanganj News: आदित्य झा ने बताया कि सीनियर इंजीनियर की नौकरी छोड़ने का निर्णय आसान नहीं था, लेकिन मन में कुछ बड़ा करने का संकल्प था। इस कठिन परीक्षा में उन्हें तीन बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन चौथे प्रयास में उन्होंने 58वीं रैंक हासिल कर IFS के लिए चयन प्राप्त किया।
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आदित्य झा का किया गया भव्य स्वागत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
किशनगंज जिले के छोटे से गांव खानाबाड़ी के निवासी आदित्य झा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 58वीं रैंक हासिल कर अपने जिले और राज्य का नाम रोशन किया है। आदित्य का चयन भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए हुआ है। उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
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गांव में हुआ आदित्य का भव्य स्वागत
आदित्य झा जब गुरुवार देर शाम बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचे, तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में लोग उनका स्वागत करने के लिए इकट्ठे हो गे थे। जिले भर से आए लोग, समाजसेवी, जनप्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने फूलों की माला और गुलदस्तों से उनका जोरदार स्वागत किया। इसके बाद जब वे पैतृक गांव खानाबाड़ी पहुंचे, तो पौआखाली नगर पंचायत में ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी और मिठाइयों के साथ भव्य जुलूस निकाला गया।
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शिक्षक परिवार से हैं आदित्य
आदित्य झा एक बेहद साधारण और शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता प्रो. विष्णुकांत झा सुशीला हरि महाविद्यालय तुलसिया में प्रोफेसर हैं, जबकि माता मधु झा ICDS विभाग में पर्यवेक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। आदित्य की शुरुआती पढ़ाई उर्सुलाइन कॉन्वेंट स्कूल पूर्णिया से हुई। फिर डीएवी स्कूल पूर्णिया और विजेंद्र पब्लिक स्कूल से इंटर तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने दो बार IIT प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त की और अंततः आईआईटी (आईएमएस धनबाद) से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया।
सैमसंग में सीनियर इंजीनियर की नौकरी छोड़ी, UPSC की राह चुनी
आदित्य ने बीटेक के बाद सैमसंग कंपनी में तीन वर्षों तक सीनियर इंजीनियर के पद पर काम किया। अच्छी तनख्वाह और सुविधाएं होने के बावजूद उन्होंने नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन मन में कुछ बड़ा करने का संकल्प था। इस कठिन परीक्षा में उन्हें तीन बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन चौथे प्रयास में उन्होंने 58वीं रैंक हासिल कर भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए चयन प्राप्त किया।
‘चुनौतियों के सामने कभी हार न मानें’
अमर उजाला से बातचीत में आदित्य झा ने अपनी सफलता के पीछे अपने माता-पिता, गुरुजनों और स्व-अनुशासन को जिम्मेदार बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि बाहर रहकर तैयारी करना, असफलताओं को झेलना, आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना करना आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि जो भी छात्र UPSC की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। असफलता आएगी, मन भी टूटेगा, लेकिन मेहनत न छोड़ें। हर प्रयास एक नई सीख देता है।
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युवाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित किया
आदित्य ने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि युवा पीढ़ी शिक्षा को प्राथमिकता दे और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे। उन्होंने किशनगंज जैसे सीमांत जिलों के युवाओं को संदेश दिया कि किसी भी क्षेत्र से हो, अगर मेहनत सच्ची हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।