बिहार में नहीं अब दिखेंगे 'कोठे'
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बिहार के शहरों में अब देह व्यापार के अड्डे यानी कोठे नजर नहीं आएंगे। नीतीश सरकार देह व्यापार के धंधे में जुड़े घरों और मकानों को खाली कराने जा रही है।
देह व्यापार के धंधे पर रोकथाम के लिए पुलिस वैसे घरों या मकानों को खाली कराएगी जहां इस तरह के धंधे होने के प्रमाण मिले हैं। न सिर्फ उसे खाली कराया जाएगा बल्कि जरूरत पड़ी तो वहां तालेबंदी भी की जाएगी।
इसके साथ ही मानव व्यापार निरोध इकाई के नोडल पदाधिकारियों को देह व्यापार के धंधे में लिप्त लोगों की संपत्ति जब्त करने के लिए ईओयू को प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।
आईजी अरविंद पांडेय ने इस संबंध में 14 जिलों में कार्यरत मानव व्यापार निरोध इकाई के नोडल अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक एवं प्रभारी पुलिस निरीक्षकों के साथ मानव व्यापार के निवारण के लिए एक समीक्षा बैठक की है।
बैठक में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, पूर्णिया, सहरसा, सीतामढ़ी, मुंगेर, बेतिया, मोतिहारी, किशनगंज, अररिया, मधुबनी और कटिहार जिला के मानव व्यापार निरोध इकाई के नोडल पुलिस पदाधिकारी एवं प्रभारी पदाधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के क्रम में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे देह व्यापार के अड्डों को बंद कराने के लिए उचित कार्रवाई करें। उन जगहों पर, जहां देह व्यापार चलाए जाने के ठोस साक्ष्य हैं, उन्हें बंद या खाली कराने को लेकर जिलाधिकारियों को प्रस्ताव भेजें।
आईजी (कमजोर वर्ग) ने बताया कि जिलाधिकारी को आईटीपीएस एक्ट 1956 की धारा-18 के तहत यह अधिकार प्राप्त है कि वे उस मकान या फ्लैट को खाली या एक वर्ष तक के लिए बंद कर सकते हैं जहां वेश्यालय चलाए जाते हैं।
इसी के मद्देनजर नोडल पुलिस पदाधिकारियों को इससे संबंधित प्रस्ताव डीएम को भेजने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा देह व्यापार के धंधे में लिप्त लोगों की संपत्ति जब्त करने की भी पहल की जाएगी।