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बिहार में निजी विश्वविद्यालय रोकेंगे छात्रों का पलायन
पटना/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 04 Apr 2013 10:52 AM IST
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बिहार में विश्वविद्यालयों की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों को खोलने यानी शिक्षा के निजीकरण का रास्ता साफ कर दिया है।
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राज्य विधानसभा में निजी विश्वविद्यालय खोलने का विधेयक बहुमत से पास हो गया है। अब दूसरे राज्यों में संचालित निजी विश्वविद्यालय भी अपनी शाखाएं बिहार में खोल सकेंगे।
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इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार यहां खुलने वाले निजी विश्वविद्यालय प्रदेश के 10 सरकारी विश्वविद्यालयों की तरह ही काम करेंगे। उनके द्वारा दिये गये प्रमाण पत्रों एवं पाठ्यक्रमों को भी वहीं मान्यता दी जायेगी।
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उधर विपक्ष ने सरकार के इस कदम को ग़रीबों के हितों के खिलाफ बताते हुए आरोप लगाया है कि सरकार मौजूदा विश्वविद्यालयों में कोई सुधार तो ला नहीं पाई उल्टे निजी क्षेत्र के इस दिशा में प्रवेश का रास्ता सुगम बना दिया।
विपक्ष का कहना है कि सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालय की हालत इतनी ख़राब है कि कोई वहां पढ़ना नहीं चाहता। अगर प्राइवेट विश्वविद्यालय आते है तो वहां आम आदमी चाह कर भी पढ़ नहीं पाएगा।
कारण है कि इन निजी विश्वविद्यालयों में शिक्षा इतनी महंगी होगी कि यह सभी के लिए संभव नहीं होगी।
वहीं, राज्य सरकार अपने इस कदम को क्रांतिकारी कदम बता रही है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक अन्य राज्यों से इस तरह अलग होगा कि इसमें राज्य के विद्यार्थियों के आर्थिक हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
निजी विश्वविद्यालयों के लिए मानक
हालांकि निजी विश्वविद्यालयों के लिए कुछ मानक तय किए गए है। इसके लिए पंजीकृत सोसाईटी/ट्रस्ट ही शिक्षा विभाग को आवेदन दे सकेंगे।
आवेदन के साथ शिक्षक, कोर्स, शोध कार्य, आधारभूत संरचना, खर्च एवं वित्त की जानकारी देनी होंगी। आवेदन में दी गई जानकारी की भौतिक जांच राज्य सरकार की कमिटी करेगी।
साथ ही यूजीसी के मानकों के अनुसार विद्यार्थियों को सुविधा भी देना होगा। जो कोर्स चलेंगे उनके लिए संबंधित अथॉरिटी से अनुमति लेनी होगी। पूर्णकालिक योग्य शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी।
विधेयक के अनुसार निजी विश्वविद्यालयों को भी राज्य की आरक्षण नीति का पालन करना होगा। सरकार का तर्क है कि निजी विश्वविद्यालय अधिनियम लाने का एक बहुत बड़ा मकसद राज्य के लोगों का पलायन रोकना है।
हर साल बिहार से हज़ारों छात्र शिक्षा प्राप्त करने दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। छात्रों का पलायन रुकने से जो राशि राज्य में ही रह जाएगी उससे राज्य के विकास में तेज़ी लाने में मदद मिलेगी।