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नीतीश कुमार के सारथी बने प्रशांत किशोर

Sun, 16 Sep 2018 02:56 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Sun, 16 Sep 2018 02:56 PM IST
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Prashant Kishor became chariot of Nitish Kumar
चुनाव प्रचार अभियान के जानकार प्रशांत किशोर बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल(यू) के नेता नीतीश कुमार के सारथी बन गए हैं। प्रशांत किशोर ने यह कदम नीतीश कुमार की सलाह को मानते हुए उठाया है। नीतीश कुमार की योजना प्रशांत किशोर को जद(यू) का सक्रिय सदस्य बनाकर उन्हें नेता के तौर पर राजनीति में उतारने की है।
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माना जा रहा है कि आने वाले समय में वह प्रशांत किशोर को राज्यसभा सदस्य बना सकते हैं। इससे पहले बिहार विधानसभा में महागठबंधन को सफलता मिलने और मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को राज्यमंत्री स्तर का दर्जा दिया था। इसे बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर को दिया गया ईनाम माना जा रहा था।
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प्रशांत किशोर के राजनीति में आने की वजह

2013-2014 का समय प्रशांत किशोर का स्वर्णिम काल था। तब वह गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के लिए काम कर रहे थे। किशोर ने 2011 में टीम मोदी को ज्वाइन किया था और राजनीति में ब्रांडिंग का अनूठा प्रयोग किया था। लेकिन, इस दौरान उनकी भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष और प्रधानमंत्री मोदी के करीबी अमित शाह से निभ नहीं पाई। केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के साथ ही प्रशांत किशोर को यहां से अपनी टीम के साथ हटना पड़ा।

Prashant Kishor became chariot of Nitish Kumar
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भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री मोदी के चुनाव प्रचार अभियान का काम करने वाले प्रशांत किशोर ने समय का रुख भांपकर बिहार की राजनीति को अपने करियर के हिसाब से अहम माना। उनकी यह रणनीति सफल रही। जद(यू) नेता पवन वर्मा समेत अन्य के सहयोग से वह नीतीश कुमार के करीब जाने में सफल रहे।

प्रशांत किशोर का हमेशा से मानना है कि राजनीति में चमकदार चेहरे पर दांव लगाकर परिणाम पाया जा सकता है। इस बार उनके केन्द्र में ईमानदार छवि के सुशासन बाबू नीतीश कुमार रहे। यह प्रयोग सफल रहा। सुशासन बाबू की छवि, राष्ट्रीय जनता दल का जनबल, सामाजिक समीकरण और कांग्रेस का साथ लेकर महागठबंधन को अवधारणा की रणनीति ने नतीजा दे दिया।

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बिहार चुनाव से प्रतिष्ठा बटोरकर आए प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी का विश्वास जीतने में भी सफलता पाई। गुजरात में टीम भाजपा में जाने के पहले वह अमेठी से सांसद का चुनाव लड़ने वाले राहुल गांधी के लिए ही काम कर रहे थे।

प्रशांत किशोर ने चमकदार व दमदार चेहरे की रणनीति पंजाब में अपनाने का दबाव बढ़ाया। यह पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए शुभ संकेत लेकर आया। तगड़ी राजनीतिक उठापटक में पंजाब में कांग्रेस का झंडा बुलंद हुआ, लेकिन उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में किन्ही कारणों से प्रशांत किशोर की रणनीति को झटका मिला। कुछ और कारण बने और प्रशांत किशोर को कांग्रेस से दूरी बनानी पड़ी।

Prashant Kishor became chariot of Nitish Kumar
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प्रशांत किशोर की जरूरत कांग्रेस (वाईएसआर) के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी को पड़ी और किशोर आंध्र प्रदेश में उनके लिए राजनीति की जमीन उर्वरा बनाने में जुट गए। मुद्दों, अभियान, जगन मोहन रेड्डी की छवि ने भी असर दिखाया, लेकिन प्रशांत किशोर के पास इसके बाद कोई बड़ी चुनौतीपूर्ण भूमिका नहीं है।

हालांकि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिल चुके हैं। रिश्ते काफी कुछ सामान्य होने की तरफ हैं, लेकिन इस बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी टीम को नतीजे देने वाली तथा काफी अच्छा बना लिया है। तमाम परिस्थितियों, विसंगतियों को देखते हुए प्रशांत किशोर ने राजनीति में भाग्य अजमाने का फैसला किया है।

भाजपा के साथ जद(यू)
प्रशांत किशोर की टीम के प्रमुख सूत्र के अनुसार पीके भाजपा के साथ बना समीकरण फिलहाल बनाए रखेंगे। वह जद(यू) के सक्रिय सदस्य के तौर पर अपनी राजनीतिक पारी खेलेंगे। इसी सूत्र के हवाले से पखवाड़ा भर पहले से प्रशांत किशोर के राजनीति में आने की खबरें मिल रही थीं।

प्रशांत किशोर की संस्था इंडियन-पॉलिटिकल एक्स कमेटी(आई-पीएसी) प्रशांत किशोर के मार्ग दर्शन में अपना काम करती रहेगी। इस संस्था ने हाल में देश के प्रधानमंत्री पद के चेहरे पर सर्वे कराया था। इसमें अपने नतीजे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तुलना में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि को तीन गुना तक अधिक चमकदार बताया गया था।
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