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Bihar: भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके सीएस कार्यालय पर निगरानी का एक्शन, 20 हजार लेते ही पकड़ा गया लिपिक
Fri, 22 May 2026 05:35 PM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतास
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 05:35 PM IST
सार
Bihar: रोहतास के सासाराम स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में निगरानी विभाग ने छापेमारी कर लिपिक सतीश कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। वह ट्रांसफर कराने के नाम पर घूस मांग रहा था। कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
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निगरानी की गिरफ्त में लिपिक सतीश कुमार
विस्तार
रोहतास जिले से शुक्रवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। जिला मुख्यालय सासाराम स्थित सदर अस्पताल के सिविल सर्जन कार्यालय में निगरानी विभाग की टीम ने अचानक छापेमारी कर एक लिपिक को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। सीएस कार्यालय में हुई इस कार्रवाई से पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और अन्य कर्मचारी भी सकते में आ गए।
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ट्रांसफर के नाम पर मांगी थी रिश्वत
मामले में निगरानी डीएसपी विकास कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि लिपिक सतीश कुमार संझौली प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात प्रखंड लेखा प्रबंधक सुनीता कुमारी से उनके ट्रांसफर के एवज में रिश्वत की मांग कर रहा था। परिवादी सुनीता कुमारी ने इस संबंध में निगरानी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने पहले उसका सत्यापन किया और फिर कार्रवाई की योजना बनाई। उन्होंने बताया कि सौदेबाजी के बाद शुक्रवार को जैसे ही सुनीता कुमारी ने लिपिक सतीश कुमार को 20 हजार रुपये दिए, पहले से जाल बिछाकर बैठी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
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सीएस कार्यालय में पहले भी हो चुकी हैं कई कार्रवाई
दरअसल, रोहतास जिले का सिविल सर्जन कार्यालय लगातार भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। जानकारी के मुताबिक, सीएस कार्यालय में अब तक लगभग आठ बार निगरानी विभाग की कार्रवाई हो चुकी है और कई कर्मचारी व अधिकारी निगरानी के हत्थे चढ़ चुके हैं। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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पटना ले जाकर होगी आगे की पूछताछ
फिलहाल निगरानी विभाग की टीम गिरफ्तार लिपिक सतीश कुमार को अपने साथ पटना ले गई है, जहां उससे आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि सतीश कुमार के खिलाफ लंबे समय से भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन उच्च अधिकारियों तक पहुंच होने के कारण वह हर बार कार्रवाई से बच जाता था।