बिहार में भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई: सासाराम सदर और जयनगर के अंचल अधिकारी हटाए गए; निगरानी टीम का बड़ा एक्शन
Monitoring Team Action: इस साल अब तक 27 लोक सेवकों को ट्रैप कार्रवाई के तहत घूस लेते हुए पकड़ा गया है। इसके अलावा, 4 पदाधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (डीए) के मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 3 के खिलाफ पद के दुरुपयोग को लेकर कार्रवाई की गई है।
विस्तार
जमीन के दाखिल-खारिज मामलों में रिश्वतखोरी के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दो अंचल अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया है। सासाराम सदर के अंचल अधिकारी सुधीर कुमार ओंकारा और मधुबनी जिले के जयनगर की अंचल अधिकारी कुमारी सुजाता को उनके वर्तमान पद से हटाकर पटना मुख्यालय में प्रतिनियुक्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई 24 मई को निगरानी विभाग द्वारा की गई गिरफ्तारी के बाद हुई है। उस दिन सासाराम सदर अंचल कार्यालय के डाटा एंट्री ऑपरेटर और जयनगर के अंचल निरीक्षक को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था।
निगरानी टीम की दो बड़ी कार्रवाईयां
शनिवार (24 मई) को पटना निगरानी विभाग की टीम ने सासाराम सदर अंचल कार्यालय में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर आकाश कुमार दास को एक लाख दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। शिकायत प्रतापगढ़ (सासाराम) निवासी पंकज कुमार ने की थी। पंकज ने आरोप लगाया था कि दाखिल-खारिज के एक मामले में डीसीएलआर का आदेश होने के बावजूद अंचल कार्यालय की ओर से प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही थी और एक लाख दस हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।
उसी दिन दूसरी कार्रवाई में मधुबनी जिले के जयनगर अंचल के अंचल निरीक्षक अजय मंडल को तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। आरोप है कि उन्होंने दो कट्ठा जमीन के दाखिल-खारिज के लिए जमीन मालिक से बीस लाख रुपये की घूस मांगी थी। निगरानी डीएसपी सुजीत सागर ने बताया कि इन मामलों में अकेले गिरफ्तार कर्मचारी ही नहीं, बल्कि अन्य राजस्व कर्मचारी और अधिकारी भी संलिप्त हो सकते हैं। इन सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।
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राज्य सरकार की सख्त नीति: भ्रष्टाचार नहीं बर्दाश्त
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, कि भ्रष्टाचार को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोनों अंचल अधिकारियों को उनके पद से हटाकर मामले की गहराई से जांच कराई जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” विभाग ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि हटाए गए अधिकारियों के स्थान पर नए अधिकारियों की त्वरित प्रतिनियुक्ति की जाए, जिससे प्रशासनिक कार्यों में कोई बाधा न आए।
हर 4-5 दिन में दबोचे जा रहे भ्रष्टाचारी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया जा रहा है। निगरानी ब्यूरो के स्तर पर इस वर्ष जनवरी से अब तक, यानी लगभग 150 दिनों में 34 भ्रष्ट लोक सेवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई है। यानी औसतन हर 4 से 5 दिन में किसी न किसी घूसखोर या पद का दुरुपयोग करने वाले अधिकारी या कर्मचारी को पकड़ा गया है। इनमें से 27 लोक सेवकों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोचा गया है, जिनके पास से कुल 12 लाख 46 हजार रुपये की अवैध राशि बरामद की गई है।
ट्रैप से पकड़े गए 27, DA और पद दुरुपयोग में 7 पर कार्रवाई
इस साल अब तक 27 लोक सेवकों को ट्रैप कार्रवाई के तहत घूस लेते हुए पकड़ा गया है। इसके अलावा, 4 पदाधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (डीए) के मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 3 के खिलाफ पद के दुरुपयोग को लेकर कार्रवाई की गई है। ट्रैप में पकड़े गए सभी आरोपियों को निगरानी कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया है।
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ट्रैप की कार्रवाई में सबसे अधिक सक्रियता
ट्रैप कार्रवाई की बात करें तो, 2020 में पूरे वर्ष सिर्फ 22 ट्रैप हुए थे, जबकि इस वर्ष अब तक 27 ट्रैप हो चुके हैं। यदि यही रफ्तार बनी रही, तो साल के अंत तक यह आंकड़ा दोगुना भी हो सकता है। अब तक पकड़े गए घूसखोरों में पुलिस विभाग के दारोगा से लेकर अन्य रैंक के अधिकारी, राजस्व कर्मचारी, कार्यपालक अभियंता और अन्य विभागों के कर्मी शामिल हैं।
इस वजह से बढ़ी कार्रवाई की गति
कार्रवाई की गति बढ़ने के पीछे मुख्य कारण यह है कि निगरानी ब्यूरो ने शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बना दिया है। अब लोग सीधे हेल्पलाइन नंबर या निगरानी ब्यूरो कार्यालय के मुख्य गेट पर लगे शिकायत बॉक्स में शिकायत दे सकते हैं। प्राप्त शिकायतों की जांच के बाद, संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की जाती है और आरोप सही पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। ब्यूरो उन लोकसेवकों पर भी नजर रखे हुए है, जिन्होंने भ्रष्टाचार के बल पर अकूत संपत्ति अर्जित की है। ऐसे कर्मियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच कर डीए केस दर्ज किए जा रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्ट लोक सेवकों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। किसी भी स्तर के अधिकारी या कर्मी के खिलाफ घूस की शिकायत मिलने पर तुरंत सत्यापन कर सख्त कार्रवाई की जाती है। जिन लोक सेवकों ने भ्रष्टाचार से अकूत संपत्ति बनाई है, उनके खिलाफ डीए केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
जितेंद्र सिंह गंगवार, महानिदेशक, निगरानी ब्यूरो