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बिहार: चुनाव आयोग पर दीपंकर भट्टाचार्य का हमला, बोले- SIR पर तत्काल रोक लगे, इसके बाद हुए चुनाव फिर कराए जाएं

Sun, 27 Sep 2026 02:48 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Sun, 27 Sep 2026 02:48 PM IST
सार

SIR पर बिहार में सियासी घमासान जारी है। भाकपा माले ने पटना में प्रेस वार्ता कर साधा चुनाव आयोग पर हमला बोला। साथ ही SIR पर रोक लगाने की बात कही। आइये जानते हैं पूरा मामला... 

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SIR Row: Dipankar Bhattacharya Says Decisive Movement Against Election Commission Is Ahead
दीपाकंर भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग पर बोला हमला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पटना में रविवार को भाकपा माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष लंबे समय से चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ मिलकर काम करने के आरोप लगाता रहा है। अब आयोग के भीतर से सामने आए तथ्यों ने इन आरोपों को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए इसे कई सवालों का जवाब देने वाला दस्तावेज बताया। हालांकि, चुनाव आयोग ने अपनी ओर से SIR से जुड़े सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिया गया बताया है।

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दीपंकर भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग की हालिया प्रेस विज्ञप्ति में बैठकों का एजेंडा पहले से प्रसारित करने और बैठक की कार्यवाही के मिनट्स जारी करने के फैसले का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि अगर अब से ऐसा किया जाएगा तो पहले इसकी जरूरत क्यों नहीं समझी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बीच जारी यह विज्ञप्ति कई सवाल खड़े करती है। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद कहा था कि भविष्य में सभी बैठकों के एजेंडे पहले प्रसारित किए जाएंगे और मिनट्स जारी किए जाएंगे।
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पश्चिम बंगाल के मतदाताओं का भी उठाया मुद्दा
माले महासचिव ने पश्चिम बंगाल का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि करीब 16 लाख लोगों को पहले योग्य मतदाता माना गया था, लेकिन बाद में उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए चुनाव आयोग ने ट्रिब्यूनल में अपील की। उन्होंने सवाल किया कि यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी के कारण लोगों के नाम प्रभावित हुए हैं तो उन्हें दोबारा फॉर्म-6 भरने की जरूरत क्यों पड़े। उन्होंने इस पूरे मामले पर आयोग से जवाब मांगा। दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना चाहिए। उन्होंने SIR पर तत्काल रोक लगाने और SIR के बाद हुए चुनावों को दोबारा कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की भी मांग रखी। चुनाव आयोग का कहना है कि 24 जून 2025 को जारी राष्ट्रव्यापी SIR आदेश को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी और इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
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सम्राट चौधरी भी मैदान में: SIR पर मुख्यमंत्री ने रिकॉर्ड के साथ किया सवाल- नाम कटने वाले लोग कितने सामने आए?

'जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली'
माले महासचिव ने कहा कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। उनके मुताबिक, इसके बजाय उन्हें करीब 40-50 किलोमीटर दूर ले जाकर अलग-अलग थानों में रखा गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई में राजनीतिक दलों के साथ आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी अब निर्णायक आंदोलन की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से शुरू होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जाएगा।

एक अक्तूबर को जनसुनवाई का एलान
दीपांकर भट्टाचार्य ने सीएम सम्राट चौधरी के उस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि SIR में किसी को वोट के अधिकार से वंचित किए जाने का मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने एक अक्तूबर को जनसुनवाई आयोजित करने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि बिहार की 10 विधानसभा क्षेत्रों से ऐसे लोगों को जनसुनवाई में लाया जाएगा, जो उनके मुताबिक जीवित हैं, बिहार में रह रहे हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में मतदान के अधिकार से वंचित हुए।


जमुई की घटना को लेकर भी सरकार पर हमला
भाकपा माले महासचिव ने बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने जमुई की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना ने पूरे देश में बिहार को शर्मसार किया है। उन्होंने राज्य सरकार से कानून-व्यवस्था को लेकर जवाब देने की मांग की।

मीना तिवारी ने महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया
प्रेस वार्ता में ऐपवा महासचिव मीना तिवारी ने भी महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार समेत पूरे देश में महिलाओं और लड़कियों पर हमले की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उनका आरोप था कि अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय कई मामलों में लड़कियों को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है। मीना तिवारी ने बिहार की मंत्री श्रेयसी सिंह के नैतिक पहरेदारी संबंधी बयान का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि लड़कियों पर हमले होने के बावजूद पाबंदियां उन्हीं पर क्यों लगाई जाती हैं। उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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