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Shardiya Navratri: बिहार के इस मंदिर में नौ दिन महिलाओं का प्रवेश वर्जित, नौवीं शताब्दी से चली आ रही परंपरा

Mon, 22 Sep 2025 10:57 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा Published by: आदित्य आनंद Updated Mon, 22 Sep 2025 10:57 AM IST
सार

Bihar News नवरात्रि के नौ दिनों में यहां विशेष तांत्रिक अनुष्ठान होते हैं, जिनके चलते यह निर्णय लिया गया था। इस दौरान केवल तीन पुजारियों को ही गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति रहती है। महिलाओं के प्रवेश पर पूर्णरूप से रोक रहता है।

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Shardiya Navratri 2025: Women are prohibited from entering the Ashapuri temple in Nalanda, Bihar Durga Puja
मां आशापूरी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। जगह-जगह माता रानी के जयकारे गूंज रहे हैं और भक्तगण पूजा-अर्चना में लीन हैं। लेकिन नालंदा जिले के प्रसिद्ध मां आशापुरी मंदिर में आज भी एक अनूठी और सदियों पुरानी परंपरा का पालन किया जा रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों तक महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित रहता है। गिरियक प्रखंड के घोसरावां गांव स्थित इस मंदिर में नवरात्रि के दौरान महिलाओं को मंदिर परिसर में भी प्रवेश की अनुमति नहीं होती। यही नहीं, पुरुष श्रद्धालुओं के लिए भी इन नौ दिनों में गर्भगृह के दर्शन वर्जित रहते हैं। मंदिर के पुजारी जनार्दन उपाध्याय के मुताबिक, यह परंपरा पूर्वजों के समय से चली आ रही है।
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तांत्रिक अनुष्ठानों के कारण होता है ऐसा
पुजारियों का कहना है कि नवरात्रि में होने वाली साधनाएं तंत्र-मंत्र पर आधारित होती हैं, जिनके प्रभाव से नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान यदि महिलाएं उपस्थित हों तो उन पर इन शक्तियों का असर हो सकता है और पूजन विधि में विघ्न उत्पन्न हो सकता है। नवरात्रि के अंतिम दिन विशेष हवन के आयोजन के बाद ही मंदिर को आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। तब जाकर महिलाओं और पुरुषों को गर्भगृह के दर्शन का अवसर मिलता है। इस हवन का उद्देश्य मंदिर की ऊर्जा को शुद्ध करना होता है।
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Shardiya Navratri 2025: Women are prohibited from entering the Ashapuri temple in Nalanda, Bihar Durga Puja
मां आशापूरी का मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
नौवीं शताब्दी से चली आ रही परंपरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि दशकों से यह परंपरा चली आ रही है। यहां शारदीय नवरात्र में महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। जानकार बतातें हैं कि आशापूरी मंदिर में महिलाओं का नवरात्र में प्रवेश पर रोक पहली बार नौवीं शताब्दी में लगाई गई थी। उस समय यह क्षेत्र विश्व के प्रमुख बौद्ध साधना केंद्रों में से एक था। बौद्ध भिक्षु और तांत्रिक साधक यहां आकर गहन साधना किया करते थे। नवरात्रि के दौरान तांत्रिक अनुष्ठान की परंपरा तब से ही बनी हुई है। माना जाता है कि मां आशापुरी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, इसी कारण इस मंदिर को 'आशापुरी' कहा जाता है। बिहार ही नहीं, बंगाल, झारखंड और ओडिशा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।

नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा का विधान
बता दें कि आदिशक्ति की उपासना का पावन पर्व नवरात्रि आज यानी 22  सितंबर से आरंभ हो गया है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा का विधान है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां दुर्गा की साधना भक्तों को शक्ति और आत्मबल प्रदान करती हैं। मां शैलपुत्री की आराधना करने से सांसारिक सुख और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और साधक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
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