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बिहार: पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी में बनाएं करियर, नालंदा यूनिवर्सिटी दे रही सर्टिफिकेट कोर्स का मौका
Sun, 18 Oct 2026 08:25 AM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sun, 18 Oct 2026 08:25 AM IST
सार
पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में करियर बनाने या अपनी पेशेवर दक्षता बढ़ाने की योजना बना रहे लोगों के लिए नालंदा विश्वविद्यालय एक विशेष कोर्स लेकर आया है। दिसंबर में आयोजित होने वाले इस चार दिवसीय प्रशिक्षण में नेट-जीरो कैंपस, ऊर्जा दक्षता और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे विषयों को व्यावहारिक रूप से समझने का मौका मिलेगा।
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नालंदा विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बढ़ते जलवायु संकट और कार्बन उत्सर्जन की वैश्विक चुनौतियों के बीच नालंदा विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक एवं पर्यावरण-अनुकूल नेट-जीरो कैंपस में 25 से 28 दिसंबर 2026 तक चार दिवसीय विशेष एग्जीक्यूटिव सर्टिफिकेट कोर्स इन नेट-जीरो एंबेसडर एंड सस्टेनेबिलिटी लीडरशिप का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य कॉरपोरेट जगत के अधिकारियों, सस्टेनेबिलिटी प्रोफेशनल्स, शोधार्थियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को हरित भविष्य तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी की दिशा में नेतृत्व करने के लिए तैयार करना है। यह सर्टिफिकेट कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सहयोग तथा सेंटर फॉर नेट जीरो एजुकेशन, एक्सचेंज एंड ट्रांसफॉर्मेशन और एनवायरनमेंटल डिजाइन सॉल्यूशंस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा।
चार दिन के प्रशिक्षण में सीखेंगे नेट-जीरो कैंपस का मॉडल
चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी पहलुओं के समन्वय के साथ तैयार किया गया है। पहले दिन प्रतिभागियों को नेट-जीरो की बुनियादी अवधारणाओं, वैश्विक और भारतीय परिप्रेक्ष्य तथा सतत विकास के सामाजिक-आर्थिक मॉडल से अवगत कराया जाएगा।
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इसके साथ ही प्रतिभागियों को नालंदा विश्वविद्यालय के अत्याधुनिक परिसर का फील्ड विजिट कराया जाएगा। यहां वे हरित भवन निर्माण तकनीक, टिकाऊ सामग्री, ऊर्जा दक्षता तथा जल और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्थाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे।
आगामी सत्रों में ऊर्जा दक्षता, कार्बन उत्सर्जन में कमी, स्वदेशी और पारंपरिक जल संचयन प्रणालियों तथा नेट-जीरो वेस्ट की वैश्विक कार्यप्रणालियों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम के अंतिम चरण में संस्थागत बदलाव के लिए आवश्यक व्यवहार परिवर्तन, ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग प्रणाली, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासन
मानकों तथा कार्बन और उत्सर्जन व्यापार जैसे वित्तीय एवं नीतिगत पहलुओं पर मंथन किया जाएगा।
ऑनलाइन जुड़ने का विकल्प, आवास की सुविधा भी मिलेगी
पेशेवरों की व्यस्त दिनचर्या को देखते हुए आयोजकों ने पाठ्यक्रम में लचीले विकल्प भी दिए हैं। प्रतिभागी पहले दिन के आधारभूत सत्र के बाद कार्यक्रम छोड़ सकते हैं या दूसरे दिन से ऑनलाइन माध्यम से शेष कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
केवल पहले दिन के एग्जीक्यूटिव सत्र के लिए शुल्क 10,000 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि पूरे चार दिवसीय आवासीय पाठ्यक्रम का शुल्क 25,000 रुपये है। परिसर में ठहरने के इच्छुक प्रतिभागियों के लिए एकल आवास 5,000 रुपये और साझा आवास 3,000 रुपये के अतिरिक्त शुल्क पर उपलब्ध होगा। इसमें नाश्ता और रात्रिभोज शामिल रहेगा, जबकि दोपहर का भोजन सभी प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क होगा।
15 नवंबर तक पंजीकरण पर 5 हजार रुपये की छूट
नालंदा विश्वविद्यालय की इस पहल के तहत 15 नवंबर 2026 तक अर्ली-बर्ड पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थियों, शोधार्थियों और सरकारी कर्मचारियों को 5,000 रुपये की विशेष छूट दी जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं।
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कार्यक्रम का उद्देश्य कॉरपोरेट जगत के अधिकारियों, सस्टेनेबिलिटी प्रोफेशनल्स, शोधार्थियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को हरित भविष्य तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी की दिशा में नेतृत्व करने के लिए तैयार करना है। यह सर्टिफिकेट कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सहयोग तथा सेंटर फॉर नेट जीरो एजुकेशन, एक्सचेंज एंड ट्रांसफॉर्मेशन और एनवायरनमेंटल डिजाइन सॉल्यूशंस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा।
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चार दिन के प्रशिक्षण में सीखेंगे नेट-जीरो कैंपस का मॉडल
चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी पहलुओं के समन्वय के साथ तैयार किया गया है। पहले दिन प्रतिभागियों को नेट-जीरो की बुनियादी अवधारणाओं, वैश्विक और भारतीय परिप्रेक्ष्य तथा सतत विकास के सामाजिक-आर्थिक मॉडल से अवगत कराया जाएगा।
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इसके साथ ही प्रतिभागियों को नालंदा विश्वविद्यालय के अत्याधुनिक परिसर का फील्ड विजिट कराया जाएगा। यहां वे हरित भवन निर्माण तकनीक, टिकाऊ सामग्री, ऊर्जा दक्षता तथा जल और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्थाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे।
आगामी सत्रों में ऊर्जा दक्षता, कार्बन उत्सर्जन में कमी, स्वदेशी और पारंपरिक जल संचयन प्रणालियों तथा नेट-जीरो वेस्ट की वैश्विक कार्यप्रणालियों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम के अंतिम चरण में संस्थागत बदलाव के लिए आवश्यक व्यवहार परिवर्तन, ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग प्रणाली, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासन
मानकों तथा कार्बन और उत्सर्जन व्यापार जैसे वित्तीय एवं नीतिगत पहलुओं पर मंथन किया जाएगा।
ऑनलाइन जुड़ने का विकल्प, आवास की सुविधा भी मिलेगी
पेशेवरों की व्यस्त दिनचर्या को देखते हुए आयोजकों ने पाठ्यक्रम में लचीले विकल्प भी दिए हैं। प्रतिभागी पहले दिन के आधारभूत सत्र के बाद कार्यक्रम छोड़ सकते हैं या दूसरे दिन से ऑनलाइन माध्यम से शेष कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
केवल पहले दिन के एग्जीक्यूटिव सत्र के लिए शुल्क 10,000 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि पूरे चार दिवसीय आवासीय पाठ्यक्रम का शुल्क 25,000 रुपये है। परिसर में ठहरने के इच्छुक प्रतिभागियों के लिए एकल आवास 5,000 रुपये और साझा आवास 3,000 रुपये के अतिरिक्त शुल्क पर उपलब्ध होगा। इसमें नाश्ता और रात्रिभोज शामिल रहेगा, जबकि दोपहर का भोजन सभी प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क होगा।
15 नवंबर तक पंजीकरण पर 5 हजार रुपये की छूट
नालंदा विश्वविद्यालय की इस पहल के तहत 15 नवंबर 2026 तक अर्ली-बर्ड पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थियों, शोधार्थियों और सरकारी कर्मचारियों को 5,000 रुपये की विशेष छूट दी जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं।