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Bihar News: नालंदा में महादलित बस्ती के निवासियों की दुर्दशा; सरकारी योजनाओं से वंचित, मूलभूत सुविधाएं भी नहीं
Sat, 12 Oct 2024 07:56 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sat, 12 Oct 2024 07:56 PM IST
सार
Nalanda News: राज्य महादलित आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि लगभग 72 महादलित परिवारों को एन-30 से विस्थापित किया गया था। लेकिन दुःख की बात है कि लंबा समय बीत जाने के बाद भी इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ, जल, बिजली और स्वच्छता तक कुछ नहीं मिल पाया है।
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राज्य महादलित आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने बस्ती का किया दौरा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नालंदा जिले के बिहार शरीफ नगर निगम क्षेत्र के वार्ड-49 स्थित कोसुक महादलित बस्ती में निवास करने वाले लोगों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। हाल ही में इस बस्ती का दौरा करने पहुंचे राज्य महादलित आयोग के पूर्व अध्यक्ष सह राजद के पूर्व विधायक उदय कुमार मांझी ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की।
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विस्थापन और सुविधाओं की कमी
मांझी ने बताया कि लगभग 72 महादलित परिवारों को एन-30 से विस्थापित किया गया था। इन परिवारों को बिहार शरीफ-राजगीर मुख्य मार्ग के किनारे दो-दो डिसमिल जमीन आवंटित की गई थी। लेकिन दुःख की बात है कि इतने समय बीत जाने के बाद भी इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। न ही उन्हें अन्य आवश्यक सुविधाएं, जैसे जल, बिजली और स्वच्छता उपलब्ध कराई गई हैं। ये लोग झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। मांझी ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने इन लोगों की मदद के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
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योजना की कमी और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता
मांझी ने कहा कि इस बस्ती के निवासियों को हमेशा आश्वासन दिया जाता है, लेकिन वास्तविकता में कोई भी सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यह मामला राज्य सरकार के उन दावों पर सवाल खड़े करता है जिनमें कहा जाता है कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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‘एससी आयोग और मुख्यमंत्री तक ले जाएंगे यह मुद्दा’
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मांझी ने घोषणा की कि वे इस मुद्दे को एससी आयोग दिल्ली और मुख्यमंत्री तक ले जाएंगे। उनका उद्देश्य है कि महादलित बस्ती के निवासियों को जल्द से जल्द मूलभूत सुविधाएं मिलें, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके। मांझी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस मुद्दे को उठाने से स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी और उनकी समस्याओं का समाधान होगा।
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