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Gopal khemka murder: 25 साल पहले बिहारशरीफ से पटना गया था अशोक, अरबों की संपत्ति का नहीं हुआ बंटवारा; जानें

Tue, 08 Jul 2025 04:43 PM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: पटना ब्यूरो Updated Tue, 08 Jul 2025 04:43 PM IST
सार

Bihar: मथुरिया मोहल्ला निवासी सोनेलाल ने बताया कि अशोक साव शुरू से ही बिजनेसमैन रहे हैं। उन्होंने बिहारशरीफ में लोहे का कारोबार शुरू किया था। लेकिन करीब 20-25 साल पहले वे पटना चले गए और यहीं कारोबार में सक्रिय हो गए। इसके बाद उन्होंने अपने पैतृक घर और मोहल्ले से नाता लगभग तोड़ लिया। उनका अपने भाइयों से भी कोई खास संपर्क नहीं रहा। पढ़ें खबर

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Nalanda news Ashok Sao had gone to Patna from Bihar Sharif 25 years ago
गलियों में चर्चा करते आसपास के लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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चर्चित कारोबारी गोपाल खेमका हत्याकांड में बिहारशरीफ के रहने वाले अशोक साव का नाम सामने आने से इलाके में खलबली मच गई है। पुलिस ने अशोक साव को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे लगातार पूछताछ जारी है।

जानकारी के मुताबिक अशोक साव पटना के उदयगिरी अपार्टमेंट के फ्लैट संख्या 601 में रह रहे थे। उनका पैतृक घर नालंदा जिले के बिहारशरीफ शहर के लहेरी थाना क्षेत्र अंतर्गत मथुरिया मोहल्ला में है। बताया जाता है कि अशोक साव करीब 20 से 25 साल पहले ही बिहारशरीफ छोड़कर पटना शिफ्ट हो गए थे।

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अशोक साव तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनसे छोटे अजय साव लोहे के कारोबार से जुड़े हैं जबकि सबसे छोटे भाई मेम साव परिवार का खर्च किराए की आमदनी से चलाते हैं। अब तक तीनों भाइयों के बीच अरबों की पारिवारिक संपत्ति का बंटवारा नहीं हो सका है।

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स्थानीय लोगों के अनुसार अशोक साव के पिता स्व. लखन साव का खुद का कोल्ड स्टोरेज था और वह आलू-प्याज की गद्दी चलाते थे। बिहारशरीफ में उनका कोल्ड स्टोरेज, शहर में दुकानें, मकान और सैकड़ों बीघा खेत हैं। परिवार के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर मामला न्यायालय में लंबित है। यही कारण है कि संपत्ति से होने वाली किराए की आमदनी फिलहाल कोर्ट के ट्रेजरी अकाउंट में जमा हो रही है।



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करीब 27-28 साल पहले अशोक साव की पत्नी का निधन ब्रेस्ट कैंसर से हो गया था। उनके परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। अशोक साव के मथुरिया मोहल्ला स्थित पैतृक घर पर अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो उनके भाइयों ने कैमरे पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया। वहीं मोहल्ले के बुजुर्ग और अधेड़ लोग अशोक साव का नाम हत्याकांड में आने से काफी हैरान हैं।

मथुरिया मोहल्ला निवासी सोनेलाल ने बताया कि अशोक साव शुरू से ही बिजनेसमैन रहे हैं। उन्होंने बिहारशरीफ में लोहे का कारोबार शुरू किया था। लेकिन करीब 20-25 साल पहले वे पटना चले गए और यहीं कारोबार में सक्रिय हो गए। इसके बाद उन्होंने अपने पैतृक घर और मोहल्ले से नाता लगभग तोड़ लिया। उनका अपने भाइयों से भी कोई खास संपर्क नहीं रहा। बताया जाता है कि अशोक साव पर वर्ष 2007 में सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में भी लहेरी थाना में मामला दर्ज हो चुका है, जिसमें वे चार्जशीटेड हैं। फिलहाल पुलिस गोपाल खेमका हत्याकांड में अशोक साव की संलिप्तता के तमाम पहलुओं की जांच कर रही है।

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