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दर्द से राहत: बिहार के इस सरकारी अस्पताल में सात नई मशीनें; सदर अस्पताल में पहली बार फिजियो के ऐसे यंत्र दिए
Thu, 27 Aug 2026 08:12 AM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 08:12 AM IST
सार
Bihar News: बिहारशरीफ सदर अस्पताल के फिजियोथेरेपी वार्ड में सात अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। लेजर, टेकार, शॉकवेव समेत इन मशीनों से जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द का उपचार किया जा रहा है। रोजाना करीब 60 मरीज इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
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मॉडल अस्पताल बिहारशरीफ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सदर अस्पताल में जोड़ों व मांसपेशियों के दर्द तथा शारीरिक जकड़न से जूझ रहे मरीजों को अब दर्दनिवारक दवाओं के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलेगी। अस्पताल के फिजियोथेरेपी वार्ड में आधुनिक तकनीकों से लैस सात नई मशीनें स्थापित की गई हैं, जहां लेजर, टेकार और शॉकवेव थेरेपी के जरिए मरीजों का प्रभावी उपचार शुरू हो गया है। वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 60 मरीज दर्द निवारण के लिए इस नई सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
लंबे समय तक बैठने से बढ़ रही हड्डियों और नसों की समस्या
फिजियोथेरेपिस्ट शिवकुमार चौधरी के अनुसार, घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव के कारण हड्डियों व नसों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में फिजियोथेरेपी बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को दोबारा गतिशील बनाने का सुरक्षित माध्यम साबित हो रही है। वार्ड में स्थापित टेकार थेरेपी मशीन रेडियो तरंगों से गहरी मांसपेशियों के दर्द को कम करती है, जबकि लेजर थेरेपी से पुरानी चोटों का इलाज किया जा रहा है।
अलग-अलग मशीनों से इलाज
इसके अलावा सर्जरी के बाद घुटनों की गतिशीलता के लिए सीपीएम, एड़ी व लिगामेंट की चोटों के लिए शॉकवेव, पुराने दर्द में गर्माहट देने के लिए लॉन्ग वेव और चलने के अभ्यास के लिए ट्रेडमिल मशीन का उपयोग किया जा रहा है।
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बिना सलाह पेनकिलर लेना पड़ सकता है भारी
सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने बताया कि शरीर में दर्द होने पर बिना सलाह के पेनकिलर खाने की आदत लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। फिजियोथेरेपी दर्द को दबाने के बजाय वैज्ञानिक व्यायाम, सही पोश्चर और आधुनिक मशीनों की मदद से इसे जड़ से ठीक करने में मदद करती है।
8 सितंबर को मनाया जाएगा विश्व फिजियोथेरेपी दिवस
आगामी 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस ‘सक्रिय रहें, स्वस्थ रहें’ थीम पर मनाया जाएगा, जो हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम में शारीरिक सक्रियता के महत्व पर केंद्रित रहेगा।
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लंबे समय तक बैठने से बढ़ रही हड्डियों और नसों की समस्या
फिजियोथेरेपिस्ट शिवकुमार चौधरी के अनुसार, घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव के कारण हड्डियों व नसों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में फिजियोथेरेपी बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को दोबारा गतिशील बनाने का सुरक्षित माध्यम साबित हो रही है। वार्ड में स्थापित टेकार थेरेपी मशीन रेडियो तरंगों से गहरी मांसपेशियों के दर्द को कम करती है, जबकि लेजर थेरेपी से पुरानी चोटों का इलाज किया जा रहा है।
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अलग-अलग मशीनों से इलाज
इसके अलावा सर्जरी के बाद घुटनों की गतिशीलता के लिए सीपीएम, एड़ी व लिगामेंट की चोटों के लिए शॉकवेव, पुराने दर्द में गर्माहट देने के लिए लॉन्ग वेव और चलने के अभ्यास के लिए ट्रेडमिल मशीन का उपयोग किया जा रहा है।
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बिना सलाह पेनकिलर लेना पड़ सकता है भारी
सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने बताया कि शरीर में दर्द होने पर बिना सलाह के पेनकिलर खाने की आदत लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। फिजियोथेरेपी दर्द को दबाने के बजाय वैज्ञानिक व्यायाम, सही पोश्चर और आधुनिक मशीनों की मदद से इसे जड़ से ठीक करने में मदद करती है।
8 सितंबर को मनाया जाएगा विश्व फिजियोथेरेपी दिवस
आगामी 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस ‘सक्रिय रहें, स्वस्थ रहें’ थीम पर मनाया जाएगा, जो हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम में शारीरिक सक्रियता के महत्व पर केंद्रित रहेगा।